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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Wasim Barelvi enthralled the audience with poetry and ghazals, famous poet left the legacy of Bazma.

Prayagraj : वसीम बरेलवी ने शेरो और गजलों से बांधा समा, बज्म ए विरासत में पहुंचे मशहूर शायर

Sun, 22 Dec 2024 05:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 22 Dec 2024 05:19 PM IST
सार

बिशप जानसन इंटर कॉलेज के सभागार में शुरुआत यश मालवीय ने अपनी बेहतरीन ग़ज़लों और नज़्मों के साथ की। उन्होंने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ''निराला'' की प्रसिद्ध कविता "वर दे वीणावादिनी ...से मुशायरे को आगे बढ़ाया। इनके बाद सुशांत चट्टोपाध्याय ''समीर'' ने अपनी नज़्में पढ़ीं।

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Wasim Barelvi enthralled the audience with poetry and ghazals, famous poet left the legacy of Bazma.
बज्म ए विरासत में गजल प्रस्तुत करते वसीम बरेलवी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मशहूर शायर वसीम बरेलवी ने शनिवार की रात बज्म-ए-विरासत की यात्रा को शेरों, गजलों के जरिए बढ़ाया। उन्होंने कई शेर पढ़े। मोहब्बत नासमझ होती है समझाना जरूरी है/हमारा अज्म-ए-सफर कब किधर का हो जाए...। तमाम उर्म बड़े सक्त इम्तिहान में था/लहू न हो तो कोई तर्जुमा नहीं होता...। उनके शेरों पर एक तरफ तालियों का शोर और दूसरी ओर फरमाइशें होती रहीं।

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बिशप जानसन इंटर कॉलेज के सभागार में शुरुआत यश मालवीय ने अपनी बेहतरीन ग़ज़लों और नज़्मों के साथ की। उन्होंने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ''निराला'' की प्रसिद्ध कविता "वर दे वीणावादिनी ...से मुशायरे को आगे बढ़ाया। इनके बाद सुशांत चट्टोपाध्याय ''समीर'' ने अपनी नज़्में पढ़ीं। शाहिद अंजुम ने अपनी रायबरेली की ग़ज़लें पढ़ीं। पॉपुलर मेरठी ने खूब गुदगुदाया। इसी तरह नई पीढ़ी के शायर अजहर इकबाल ने अपनी गहरी संवेदना की शायरी से तालियां बटोरीं। शायर राजेश रेड्डी के शेर सराहे गए।

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फ़रीद और निखत काज़मी की याद में फिल्म चर्चा

फ़रीद काज़मी और निखत काज़मी को याद कका गया। इस सत्र में सुधीर मिश्रा, नंदिता दास, सुतापा सिकदर, और क़ौसर मुनीर जैसी प्रमुख फिल्मी हस्तियां शामिल हुईं। चर्चा का प्रारंभ मिडिल ऑफ द रोड सिनेमा के भविष्य पर सुधीर मिश्रा ने किया। उन्होंने बिमल रॉय और सत्यजीत रे के दौर को इसका बेहतरीन उदाहरण बताया। नंदिता दास ने अच्छी फिल्मों को थिएटर में देखने का अनुरोध करते हुए कहा कि सिनेमा केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म तक सीमित न हो।

सुतापा सिकदर ने समाज और संस्कृति पर सिनेमा के प्रभाव को रेखांकित किया। हिंदी सिनेमा और साहित्य के संबंध पर चर्चा करते हुए नंदिता दास ने कहा कि साहित्य आधारित फिल्में अक्सर क्षेत्रीय सिनेमा का हिस्सा मानकर मुख्यधारा से कम आंकी जाती हैं। सुधीर मिश्रा ने साहित्यिक फिल्मों के मूल भाव को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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जीवन ही सबसे बड़ा गुरु: विकास स्वरूप

प्रसिद्ध उपन्यासकार विकास स्वरूप ने अपने लेखन पर चर्चा की। उन्होंने सामाजिक थ्रिलर लेखन को अपनी विशेषता बताया। कहा कि "जीवन ही सबसे बड़ा गुरु है।" अपनी पुस्तक क्यू एंड ए और उसकी फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं समाधान और आशा के साथ समाप्त होती हैं।

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