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अविवाहित महिला का वारिस बन पांच बीघा जमीन का किया बैनामा
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प्रयागराज। सदर तहसील के मौजा मऊ कछार (सर्किट हाउस के करीब) में दो सगे भाइयों ने एक अविवाहित महिला का वारिस बनकर उसकी पांच बीघा जमीन का बैनामा करा लिया। मामले में महिला के भाई की शिकायत पर डीएम ने बैनामा निरस्त करते हुए पूरी जमीन को सरकारी खाते में दर्ज करने और फर्जीवाड़ा करने वाले क्रेता, विक्रेता के साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। एडीएम वित्त को मामले की जांच सौंपी गई है।
अविवाहित महिला के भाई राजाराम ने शिकायत की थी कि उसकी बहन सावित्री पुत्री खिन्नी लाल अविवाहित थी और उसकी मौत 2013 में हो गई। रामबाबू और श्यामबाबू (भाई) ने उसकी पांच बीघा जमीन पर अपना नाम वारिसन दर्ज करा लिया था। वारिसन नाम दर्ज होने से पहले ही पूरी जमीन को बेच भी दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व कमलेश कुमार ने बताया कि डीएम ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मौजूदा भूमि असामी है और इसे बेचा नहीं जा सकता है। सरकारी भूमि पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज करा लिया गया है जो कि अवैध है। डीएम ने पूरी भूमि को अभिलेखों में सरकार के नाम पर करने का आदेश देते हुए भूमि को क्रय करने वाले और बेचने वाले दोनों भाइयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश एसडीएम सदर को दिया। साथ ही एडीएम वित्त को मामले में सहायक अभिलेखाधिकारी, सर्वे कानूनगो, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि अगर इन अधिकारियों की संलिप्तता है तो इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
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अविवाहित महिला के भाई राजाराम ने शिकायत की थी कि उसकी बहन सावित्री पुत्री खिन्नी लाल अविवाहित थी और उसकी मौत 2013 में हो गई। रामबाबू और श्यामबाबू (भाई) ने उसकी पांच बीघा जमीन पर अपना नाम वारिसन दर्ज करा लिया था। वारिसन नाम दर्ज होने से पहले ही पूरी जमीन को बेच भी दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व कमलेश कुमार ने बताया कि डीएम ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मौजूदा भूमि असामी है और इसे बेचा नहीं जा सकता है। सरकारी भूमि पर फर्जी तरीके से नाम दर्ज करा लिया गया है जो कि अवैध है। डीएम ने पूरी भूमि को अभिलेखों में सरकार के नाम पर करने का आदेश देते हुए भूमि को क्रय करने वाले और बेचने वाले दोनों भाइयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश एसडीएम सदर को दिया। साथ ही एडीएम वित्त को मामले में सहायक अभिलेखाधिकारी, सर्वे कानूनगो, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि अगर इन अधिकारियों की संलिप्तता है तो इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
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