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वकालत और राजनीति, दोनों में ही शुरू कर सकता हूं नई पारीः केशरीनाथ

Tue, 30 Jul 2019 01:24 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2019 01:24 AM IST
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New Initiative can be started in both advocacy and politics: Kesharinath
New Initiative can be started in both advocacy and politics: Kesharinath - फोटो : ALDCOMPACT
वकालत और राजनीति, दोनों शुरू कर सकता हूं : केशरीनाथ
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85 वर्ष की उम्र में जहां हर किसी की आराम की इच्छा होती है वहीं खांटी भाजपाई और दिग्गज राजनेता रहे केशरीनाथ त्रिपाठी अपनी एक और नई पारी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि वे वकालत और राजनीति दोनों में ही आने का विचार कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पांच वर्ष राज्यपाल पद पर रहे ‘पंडित जी’ (केशरीनाथ त्रिपाठी) सोमवार की सुबह ही कालका मेल से प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने अमर उजाला के राहुल शर्मा से बातचीत की और कहा कि वे अपने अब तक के जीवन के सफर की प्रमुख घटनाओं को एक पुस्तक में पेश करेंगे। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश :-
सवाल- बंगाल में राज्यपाल का कार्यभार कैसा रहा ?
जवाब- पांच साल कब बीत गए मालूम ही नहीं पड़ा। अपने इस कार्यकाल को मैं संतोषजनक कह सकता हूं। जनता के मन में खास तौर से वहां हिंदीवासियों के मन में एक छाप छोड़ कर आया हूं। बाकी वहां की जनता बताएगी।
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सवाल-दूसरी सियासी पारी कब शुरू कर रहे हैं ?
जवाब- (मुस्कुराते हुए) आज ही प्रयागराज आया हूं। अभी सप्ताह भर आराम करने का मूड है। इस दौरान लोगों से मुलाकात का भी सिलसिला रहेगा। हो सकता हैं कि मैं वकालत करूं। राजनीति में भी सक्रिय रहूंगा। अभी पार्टी के तमाम नेताओं ने मुझसे मिलने की इच्छा जाहिर की है। राज्यपाल बनने के पहले तक भी मैं पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा हूं। मुझे वैसे भी काम करने का नशा है। कभी खाली नहीं बैठता।
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सवाल- राज्यपाल रहते हुए सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं ?
जवाब- पश्चिम बंगाल में राज्यपाल रहने के दौरान साहित्य के क्षेत्र में तमाम उपलब्धियां मेरे खाते में आईं। मुझे वहां अनेक सम्मान मिले। मेरी कई रचनाओें का बांग्ला, उड़िया, मैथिली आदि भाषा में अनुवाद हुआ। प्रयागराज आने के दो दिन पूर्व वहां 101 साहित्यिक संस्थाओं ने मुझे सम्मानित किया। वहां हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना में मेरा योगदान रहा। सरकार को भी कई सुझाव दिए। तमाम सुझाव माने भी गए। इसमें परीक्षाआें की समय सारिणी, विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह, ऑन लाइन प्रवेश प्रक्रिया, शिक्षकों के लिए आचार संहिता प्रमुख रूप से शामिल रही। इसके अलावा बंगाल में चिकित्सकों की हड़ताल को खत्म करवाने में भी मेरी सक्रिय भूमिका रही।
सवाल- बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से तल्खियां रहीं क्या ?
जवाब- ऐसा नहीं है। ममता बनर्जी ने हमेशा मेरा सम्मान किया। ममता बनर्जी में दृष्टि है। उनमें अपने निर्णयों का पालन करवाने की भी क्षमता है। बंगाल में अपेक्षा के अनुसार उद्योग स्थापित नहीं हो रहे हैं। वहां बात-बात में हिंसा होना आम बात है। दुराचार के केस भी वर्षभर में दो से ढाई हजार के बीच हो जाते हैं। सैकड़ों की संख्या में वहां प्रतिवर्ष आत्महत्या की घटनाएं एवं अपहरण के वाकये सामने आ रहे हैं। यह निराशाजनक है।
सवाल- क्या कुछ न कर पाने का मलाल है ?
जवाब- पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे एक बात की निराशा होती है कि मैं एयरफोर्स ज्वाइन नहीं कर सका। मेरी इच्छा थी कि एयरफोर्स ज्वाइन करूं। इसके लिए आवेदन भी किया था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन ऐन मौके पर पैर में चोट लग जाने की वजह से एयरफोर्स ज्वाइन नहीं कर सका।
सवाल- केंद्र सरकार में आप कभी नहीं रहे। क्या कभी इच्छा नहीं हुई ?
जवाब- मेरा सियासी सफर काफी लंबा रहा है। छह बार मैं विधायक रहा। इसके अलावा यूपी में तीन बार अलग-अलग सरकार में मुझे स्पीकर पद का दायित्व भी मिला। इस वजह से केंद्र की राजनीति में जाने का समय नहीं मिला। मुझे इसका मलाल भी नहीं है। राज्यपाल का दायित्व भी केंद्र सरकार की ओर से ही मिला।

सवाल- आनंदी बेन के शपथ ग्रहण में रामनाईक रहे, बंगाल में आप नहीं रुके ऐसा क्यों?
जवाब- यह रामनाईक जी का निर्णय है कि उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना है या नहीं। वे शामिल हुए ये अच्छी बात है। जहां तक मेरा सवाल है तो नए राज्यपाल के आने से एक दिन पूर्व ही निवर्तमान राज्यपाल चले जाते हैं। उसी परंपरा का निर्वाह मैंने किया।

New Initiative can be started in both advocacy and politics: Kesharinath

New Initiative can be started in both advocacy and politics: Kesharinath- फोटो : ALDCOMPACT

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