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दुष्कर्म के आरोपी सांसद अतुल राय को हाईकोर्ट से राहत, गवाह की अर्जी खारिज
Fri, 18 Dec 2020 09:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 18 Dec 2020 09:58 PM IST
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सांसद अतुल राय (फाइल फोटो)
- फोटो : prayagraj
स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद सांसद अतुल राय के प्रकरण में दुबारा गवाही कराने व इलेक्ट्रानिक अभिलेख प्रस्तुत करने की मांग में दाखिल अर्जी खारिज कर दी है। जिससे अतुल राय को राहत मिली है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज आलोक श्रीवास्तव ने पीड़िता के अधिवक्ता, शासन के अधिवक्ता एवं अतुल राय के अधिवक्ता एलपी. दिवेदी के तर्कों को सुन कर दिया है ।
प्रकरण में अभियोजन के गवाह सत्य प्रकाश राय द्वारा अभियोजन की ओर से न्यायालय में पुन: गवाही देने और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख दाखिल करने की याचना के साथ अर्जी प्रस्तुत की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद अर्जी खारिज कर दी है ।
अदालत ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 138 से स्पष्ट होता है कि जब प्रति परीक्षा में कोई नया तथ्य आ जाए तब उन बातों के स्पष्टीकरण के लिए पुन: परीक्षा किया जा सकता है। इस मामले के पत्रावली से स्पष्ट है कि साक्षी संख्या दो की मुख्य परीक्षा और प्रति परीक्षा अंकित की जा चुकी है। उसके द्वारा दाखिल दस्तावेजों के संबंध में पुन: मुख्य परीक्षा कराए जाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय द्वारा गवाहों को दोबारा बुलाने की धारा का प्रयोग मनमाने तौर पर नहीं किया जाना चाहिए ।
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अदालत ने कहा कि जिन इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को साक्षी संख्या दो के द्वारा प्रस्तुत किए जाने का अनुरोध किया गया है, इनको प्राप्त करने का स्रोत या उपकरण क्या है। यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तारीख भी नियत कर दी।
प्रकरण वाराणसी जिले के लंका थाने का है। घोसी के बसपा सांसद अतुल राय के विरुद्ध धोखाधड़ी, दुष्कर्म और धमकाने के अलावा 67 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत एक मुकदमा पंजीकृत है। इस प्रकरण में वह जेल में बंद हैं। मामले में पीड़िता और एक अन्य साक्षी की गवाही हो चुकी है।
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प्रकरण में अभियोजन के गवाह सत्य प्रकाश राय द्वारा अभियोजन की ओर से न्यायालय में पुन: गवाही देने और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख दाखिल करने की याचना के साथ अर्जी प्रस्तुत की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद अर्जी खारिज कर दी है ।
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अदालत ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 138 से स्पष्ट होता है कि जब प्रति परीक्षा में कोई नया तथ्य आ जाए तब उन बातों के स्पष्टीकरण के लिए पुन: परीक्षा किया जा सकता है। इस मामले के पत्रावली से स्पष्ट है कि साक्षी संख्या दो की मुख्य परीक्षा और प्रति परीक्षा अंकित की जा चुकी है। उसके द्वारा दाखिल दस्तावेजों के संबंध में पुन: मुख्य परीक्षा कराए जाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय द्वारा गवाहों को दोबारा बुलाने की धारा का प्रयोग मनमाने तौर पर नहीं किया जाना चाहिए ।
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अदालत ने कहा कि जिन इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को साक्षी संख्या दो के द्वारा प्रस्तुत किए जाने का अनुरोध किया गया है, इनको प्राप्त करने का स्रोत या उपकरण क्या है। यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तारीख भी नियत कर दी।
प्रकरण वाराणसी जिले के लंका थाने का है। घोसी के बसपा सांसद अतुल राय के विरुद्ध धोखाधड़ी, दुष्कर्म और धमकाने के अलावा 67 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत एक मुकदमा पंजीकृत है। इस प्रकरण में वह जेल में बंद हैं। मामले में पीड़िता और एक अन्य साक्षी की गवाही हो चुकी है।