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हाईकोर्ट : अवैध कॉलोनी कैसे बनी, कानपुर विकास प्राधिकरण से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Thu, 10 Sep 2026 07:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 10 Sep 2026 07:33 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर में गंगापुर, मौजा देहली सुजानपुर स्थित नेहरू स्मारक सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड को कथित तौर पर अनधिकृत कॉलोनी बताए जाने के मामले में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के अधिकारियों से जवाब मांगा है।

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High Court seeks response from Kanpur Development Authority on how the illegal colony was built.
केडीए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर में गंगापुर, मौजा देहली सुजानपुर स्थित नेहरू स्मारक सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड को कथित तौर पर अनधिकृत कॉलोनी बताए जाने के मामले में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के अधिकारियों से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने केडीए के उपाध्यक्ष, सचिव और प्रवर्तन जोन-4 के प्रभारी अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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रवि कुमार व एक अन्य याचिका दायर की है। याचियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने प्री कंपाउंडिंग फीस जमाकर नक्शा पास करने की मांग में केडीए के समक्ष आवेदन किया था। केडीए ने आवेदन खारिज कर दिया और कहा कि नेहरू स्मारक गृह निर्माण समिति एक अवैध कॉलोनी है। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता अमित सिंह परिहार ने दलील दी हाउसिंग सोसाइटी बसी हुई है। इसमें प्रतिवादी ने अन्य लोगों के नक्शे पास किए हुए हैं और याची के नक्शा पास करने के आवेदन को हाउसिंग सोसाइटी को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया गया।
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कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि यदि उक्त कॉलोनी अनधिकृत है और विकास प्राधिकरण से उसका लेआउट प्लान स्वीकृत नहीं हुआ था तो इतनी बड़ी कॉलोनी केडीए के विकास क्षेत्र में कैसे बन गई। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि किन परिस्थितियों में प्राधिकरण ने इस कथित अवैध विकास को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को यह भी बताने का निर्देश दिया है कि जिस अवधि में कॉलोनी विकसित हुई, उस दौरान केडीए के उपाध्यक्ष और सचिव के पद पर कौन-कौन अधिकारी तैनात रहे। सभी संबंधित अधिकारियों के व्यक्तिगत हलफनामे 29 सितंबर 2026 तक दाखिल करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

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