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आयकर छापे के खिलाफ पोंटी चढ्ढा के परिजनों की अर्जी खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 26 Oct 2015 11:13 PM IST
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चर्चित शराब व्यवसायी स्वर्गीय पोंटी चड्ढा के आवास पर पड़े आयकर विभाग के छापे को चुनौती देनी उनके परिजनों की अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अर्जी में आयकर विभाग के असेसमेंट आर्डर की वैधता को चुनौती दी गई थी। इससे पूर्व दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में पड़े छापे और जब्ती की कार्रवाई को सही करार दिया था। पोंटी के भाई राजेंद्र चड्ढा और अन्य लोगों ने पुनर्विचार अर्जी दाखिल कर कहा कि असेसमेंट आर्डर की वैधता पर सुनवाई की मांग की थी।
अर्जी पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति वीके मिश्र की खंडपीठ ने सुनवाई की। अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता एसपी गुप्ता और राजीव रंजन ने बहस की। वकीलों की दलील थी कि यदि वकील की गलती से रिकार्ड में मौजूद तथ्य फैसले में शामिल नहीं है तो उस स्थिति में पुनर्विचार अर्जी पर सुनवाई की जानी चाहिए। जिन तथ्योें को निर्णय में शामिल करना रह गया है उनको भी शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश के खिलाफ अपील विचाराधीन है इसलिए पुनर्विचार अर्जी पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग ने वर्ष 2011 में पोंटी चड्ढा के आवास पर छापा मारा था। इस छापे में पोंटी चड्ढा और उसके भाइयों की संपत्तियां जब्त कर ली गई। राजेंद्र चड्ढा आदि का कहना था कि छापा उनके भाई पोंटी के घर पर पड़ा था उसके भाइयों की संपत्तियां जब्त करना गलत है। कोर्ट ने कहा यदि भाई की संपत्ति जब्त हुई है तो वह इसका साक्ष्य देकर अपनी संपत्ति मुक्त करा सकता है।
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अर्जी पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति वीके मिश्र की खंडपीठ ने सुनवाई की। अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता एसपी गुप्ता और राजीव रंजन ने बहस की। वकीलों की दलील थी कि यदि वकील की गलती से रिकार्ड में मौजूद तथ्य फैसले में शामिल नहीं है तो उस स्थिति में पुनर्विचार अर्जी पर सुनवाई की जानी चाहिए। जिन तथ्योें को निर्णय में शामिल करना रह गया है उनको भी शामिल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश के खिलाफ अपील विचाराधीन है इसलिए पुनर्विचार अर्जी पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
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उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग ने वर्ष 2011 में पोंटी चड्ढा के आवास पर छापा मारा था। इस छापे में पोंटी चड्ढा और उसके भाइयों की संपत्तियां जब्त कर ली गई। राजेंद्र चड्ढा आदि का कहना था कि छापा उनके भाई पोंटी के घर पर पड़ा था उसके भाइयों की संपत्तियां जब्त करना गलत है। कोर्ट ने कहा यदि भाई की संपत्ति जब्त हुई है तो वह इसका साक्ष्य देकर अपनी संपत्ति मुक्त करा सकता है।
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