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आईएएस चयन में बढ़ा इंजीनियरों का दबदबा

Tue, 11 Feb 2020 02:18 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 11 Feb 2020 02:18 PM IST
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Engineers dominate the IAS selection
UPSC Civil Services Result

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के चयन में इंजीनियरों का दबदबा तेजी से बढ़ा है। वहीं, डॉक्टरों के चयन का ग्राफ भी चढ़ा है लेकिन जो विद्यार्थी परंपरागत रूप से क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में विषय के रूप में मानविकी पढ़ रहे हैं और सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने रहे हैं, उनके लिए चुनौती बढ़ गई है।

Engineers dominate the IAS selection
UPSC

यह हालत तब है, जब आईएएस मेंस में इंजीनियरिंग, मेडिकल पृष्ठभूमि वाले छात्र मानविकी के विषयों को विकल्प के तौर पर चुन रहे हैं। वर्ष 2010 से 2016 के बीच चार परीक्षाओं के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यह चौंकाने वाले हैं। प्रतियोगी छात्रा शालिनी और उनकी टीम की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 में सिविल सेवा परीक्षा में 40 फीसदी चयनितों की शैक्षिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग और 37 फीसदी की शैक्षिक पृष्ठभूमि मानविकी से जुड़े विषयों की थी।

Engineers dominate the IAS selection
upsc

इसके बाद वर्ष दर वर्ष इंजीनियरिंग की शैक्षणिक पृष्ठभूमि वालों का ग्राफ बढ़ता और मानविकी की शैक्षिक पृष्ठभूमि वालों का ग्राफ गिरता गया। उपलब्ध आंकडों के अनुसार 2010 के बाद वर्ष 2013 में चयनितों में इंजीनियरों की सफलता का ग्राफ बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गया और मानविकी से जुड़े विषयों की पृष्ठभमि वाले चयनितों की संख्या घटकर 27 फीसरी रह गई। वर्ष 2016 में यह संख्या क्रमश: 59 एवं 21 फीसदी हो गई।

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हिंदी माध्यम वालों के लिए बढ़ गई चुनौती

हिंदी माध्यम के प्रतियोगियों के लिए मेंस में विकल्प विषय का पेपर चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इंजीनियरिंग के छात्र ज्यादातार सवालों के जवाब प्वाइंट प्रेजेंटेशन या फ्लो चार्ट के माध्यम से देते हैं जो अंग्रेजी भाषा में होते हें। वहीं परंपरागत रूप से मानविकी से जुड़े विषय पढ़ रहे हिंदी माध्यम के प्रतियोगी उसी सवाल का जवाब देवनागरी लिपि में विस्तार से लिखते हैं। पेपर सेटिंग की यह विसंगति हिंदी माध्यम के प्रतियोगियों के लिए मुसीबत बनी हुई है।

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अभ्यर्थियों के सुझाव
सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में विकल्प के रूप में चुने जाने वाले मानविकी से जुड़े विषयों के प्रश्नपत्र में सवालों की संख्या कम की जाए और जवाब देने की शब्द सीमा बढ़ाई जाए ताकि विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

जिस अभ्यथी की जो भी शैक्षणिक पृष्ठभमि हो, वह उसी पृष्ठभूमि से जुड़ा कोई एक विषय विकल्प के तौर पर चुने। आयोग यह व्यवस्था अनिवार्य करे, ताकि लंबे समय से मानविकी विषय पढ़ रहे प्रतियोगियों को भी चयन के समान अवसर मिलें और अंतिम चयन में क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों की भी पर्याप्त भागीदारी हो।
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