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हत्या के बाद एडमीशन माफिया ने की थी जेल में बात

Sun, 29 Jan 2017 02:02 AM IST
त्रिलोकी यादव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
त्रिलोकी यादव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 29 Jan 2017 02:02 AM IST
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Was murdered by the Mafia in prison after Admishn thing
phone call
डा. बंसल की हत्या की जांच में जुटी टीमों को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। यूं तो डाक्टर बंसल की कई लोगों से दुश्मनी थी लेकिन अब नोएडा के एक एडमीशन माफिया पर शक की सुई टिक गई है। पुलिस के राडार पर पहले से ही रहे अख्तर कटरा की सीडीआर खंगाली गई तो पुलिस केहोश उड़ गए। माफिया और अख्तर कटरा के बीच कई बार मोबाइल फोन पर बात हुई थी। हालांकि बाद में दोनों के नंबर बंद हो गए, लेकिन पुलिस को ऐसा क्लू मिल गया जिसके बाद एडमीशन माफिया सस्पेक्ट नंबर वन हो गया है। पुलिस एक केबाद एक कड़ी जोड़ने में लगी है। डा. बंसल की हत्या से कुछ दिन पहले ही अख्तर कटरा का एक साथी शूटर जेल से छूटा था और वह घटना के बाद से फरार है।
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डा. बंसल की हत्या केबाद पुलिस ने जब उनके दुश्मनों की सूची बनाई तो नोएडा का एक एडमीशन माफिया भी उसमें शामिल था लेकिन सस्पेक्ट नंबर पांच तक वह कहीं नहीं था। पुलिस ने नैनी जेल के तमाम शूटरों और अपराधियों की सूची भी तैयार की थी जो इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। उसमें अख्तर कटरा का नाम सबसे ऊपर था क्योंकि हत्या से तीन दिन पहले ही उसका एक शातिर शूटर नैनी जेल से बाहर आया था। तेलियरगंज के रहने वाले इस शूटर का घटना के बाद से अब तक कुछ पता नहीं। कुछ दिन पहले जब अख्तर कटरा की सीडीआर निकाली गई तो यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि हत्या के बाद नोएडा के एडमीशन माफिया ने अख्तर कटरा से कई बार बात की थी। इसके बाद से ही दोनों उस नंबर और मोबाइल का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इस सिरे को पकड़कर पुलिस ने छानबीन शुरू की तो माफिया सस्पेक्ट नंबर वन हो गया है।
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जांच में यह भी पता चला है कि उसका महर्षि सूचना और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय लखनऊ में भी एक व्यक्ति से ठीक ठाक संबंध थे। दोनों की लगातार बात हो रही थी। इसके बाद इलाहाबाद के कुछ ऐसे भूमाफियाओं से उसके संबंधों का पता चला है जिनसे डा. बंसल की दुश्मनी थी। पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक जितनी की कड़ियां मिल रही हैं एडमीशन माफिया पर शक बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस फिलहाल तेलियरगंज के उस शूटर की तलाश में लगातार दबिश दे रही है जो घटना केबाद से लापता है।
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 मूल रूप से आरा बिहार का रहने वाला यह एडमीशन माफिया नोएडा में एक एजुकेशनल ट्र्स्ट चलाता है। बताया जाता है कि नामी मेडिकल कालेजों में उसकी जबर्दस्त सेटिंग है और वह एमबीबीएस और मेडिकल के पीजी कोर्स में 50 लाख से लेकर एक करोड़ लेकर एडमीशन कराता है। कुछ साल पहले डा. बंसल और माफिया की मुलाकात हुई और जल्द ही ठीक ठाक दोस्ती हो गई। इसी बीच एक एडमीशन के लिए बंसल ने 65 लाख रुपये उसे दे दिए। इसमें दस लाख का चेक और 55 लाख रुपये नकद था।

माफिया वह एडमीशन करा नहीं पाया। रुपये वापस करने में भी आनाकानी करने लगा। दोनों में कई बार पंचायत के बाद मामला नहीं सुलझा तो जून 2016 में बंसल ने इस माफिया को इलाहाबाद बुलाया और सिविल लाइंस थाने में चार सौ बीसी का मुकदमा दर्ज करा के जेल भिजवा दिया। यहीं से  दोनों में दुश्मनी की शुरूआत हो गई। जेल में रहते हुए एडमीशन माफिया  ने बंसल के तमाम दुश्मनों से संपर्क साधना शुरू कर दिया। यहीं बैरक दो में उसकी मुलाकात अख्तर कटरा से हुई। अख्तर शातिर अपराधी है। वह नैनी शूटआउट में जेल में बंद है। जेल में दोनों की गाढ़ी छनने लगी। करीब सवा महीने बाद माफिया को बेल मिल गई लेकिन उसे 10 लाख का चेक वापस करना पड़ा था।


एजुकेशन माफिया को जिस तरह से इलाहाबाद बुलाकर गिरफ्तार करा दिया गया था, उससे वह काफी खफा था। उसने सिविल लाइंस थाने में पुलिस वालों केसामने कहा था कि चाहे मैं बर्बाद हो जाऊं, बंसल को छोड़ूंगा नहीं। पुलिस ने इस दौरान तमाम लोगों से पूछताछ की। पता चला कि माफिया ने जेल में रहते हुए और जेल से बाहर आने के बाद बंसल के तमाम दुश्मनों से संपर्क साधा था। बाद में उसे कोर्ट से बेल तो मिल गई लेकिन दस लाख का चेक बसंल को वापस करना पड़ा था।
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