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करछना की चार हजार बीघा जमीन पर फिर हुआ कब्जा

Mon, 23 Oct 2017 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 23 Oct 2017 01:35 AM IST
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Four thousand bigha of Kutcha occupied again on land
Field - फोटो : Bureau
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के भूमाफिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को करछना में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी पतीला लगा रहे हैं। दो महीने पहले यहां की करीब चार हजार बीघा जमीन को माफिया के कब्जे से मुक्त कराया था। पंद्रह दिन से इस जमीन पर फि र से माफिया ने परवल और सरसों की खेती के लिए जुताई शुरू कर दी है। अफसरों की गाड़ियां उस इलाके से निकल रही हैं लेकिन उन्हें यह सब नहीं दिख रहा है।
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जिलाधिकारी संजय कुमार ने  चार हजार बीघा इस सरकारी जमीन पर अभ्यारण्य, कृषि शोधन केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। जिसमें पशु-पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए कहा गया था। इस इलाके में भेड़िया, सियार, मोर, खरगोश के साथ अन्य दुर्लभ प्रजाति के पशु-पक्षियों के लिए यह स्थान उपयुक्त है। इस जमीन के कुछ भाग में किसान सहायता केंद्र और आवारा पशुओं के लिए बाड़ा बनाने की योजना भी बनाई गई थी। माफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाले उपजिलाधिकारी करछना विनय कुमार सिंह का स्थानांतरण हो गया। उसी के बाद भूमाफिया सक्रिय हो गए। पुराने बोर्ड और पत्थरों को भूमाफिया उखाड़ने लगे हैं।
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नैनी। दो महीने पहले भूमाफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई जिले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी। उस दिन खजुरौल में 279 हेक्टेयर, सेमरहा में 88 हेक्टेयर, रामपुर 108 हेक्टेयर, गड़ैला में 489 हेक्टेयर की जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त कराई थी। इस दौरान प्रशासन ने दो दर्जन लोगों के विरुद्ध लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 2/5 के अंतर्गत कार्रवाई की थी।
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करछना में प्रशासन द्वारा खाली कराई गई जमीन पर ही वन विभाग ने पूर्व में एक बार सघन वृक्षारोपण कराया था। करोड़ों की लागत से वहां पर ढाई से तीन सौ एकड़ में वृक्ष लगवाए थे। उनकी सिंचाई के लिए दो बोर कराया गया था। इस सबकी रखवाली के लिए एक चौकीदार नियुक्त किया गया था। लेकिन बाढ़ आई तो चौकीदार समेत वनकर्मी ऊपरी इलाके में चले आए। जब पानी कम हुआ तो माफियाओं ने सबमर्सिबल पंप खोल ले गए और लगे पेड़ों को काटकर वन विभाग का कब्जा तहस नहस कर दिया था। वन विभाग ने इसके लिए 6-7 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

पिछले बीस साल से भूमाफिया इस सरकारी जमीन पर कब्जा करके  खेती कराते चले आ रहे हैं। जिससे उनकी आय कई करोड़ में होती है। यहां पर गाजीपुर, बलिया, विहार और छत्तीसगढ़ के मजदूर खेती के लिए आते हैं। वे कछार में ही हैंडपंप समेत पूरी व्यवस्थाओं के साथ झोपड़ी डालकर रहते हैं। एक साल खेती करने के  बाद वे यहां से चले जाते हैं। जाते वक्त ये काश्तकार माफिया को अगले साल के लिए एडवांस देकर चले जाते हैं।


एक फसल खेती के  बाद काश्तकार माफियाओं को एडवांस पैसे देकर चले गए। इसी बीच प्रशासन ने जमीन माफिया के कब्जे से खाली करा दी गई। काश्तकार जब वापस आए तो उन्होंने माफियाओं पर पैसे वापस करने का दबाव बनाने लगे। जिसपर भूमाफिया ने जगह-जगह जमीन कब्जाकर खेती कराना शुरू कर दिया है।
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