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कमिश्नर ने दिखाए सख्त तेवर, आईजी भी गंभीर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 25 Sep 2017 02:04 AM IST
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- फोटो : amarujala
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लखनऊ और कानपुर के बाद इलाहाबाद में खून के अवैध कारोबार का खुलासा होने के बाद यहां के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों में खलबली मच गई है। कमिश्नर ने इस घटना के बाद सीएमओ और ड्रग लाइसेंस अथारिटी के सहायक आयुक्त को तलब किया है। उनसे इस धंधे को संचालित करने वाले रैकेट के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब तक की कार्रवाई का ब्योरा भी सीएमओ से तलब किया है। वहीं दूसरी ओर आईजी रमित शर्मा ने एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि वह एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी की मॉनिटरिंग में विवेचना कराएं।
शनिवार को अलोपीबाग स्थित तिलक हॉस्पिटल के मैनेजर हरेंद्र चौबे और वार्ड ब्वाय वसीम ने 12 हजार रुपये में दो यूनिट नकली खून पीड़ित महिला को दिया था। महिला की तबियत खराब होने पर उसे उपचार के लिए एसआरएन अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां इसका खुलासा हुआ। औषधि निरीक्षक और कोतवाली पुलिस ने छापा मारकर हॉस्पिटल के मैनेजर और वार्ड ब्वाय को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों ने बताया कि उनको नितिन नाम का व्यक्ति नकली खून सप्लाई करता था।
आईजी रमित शर्मा ने बताया कि पुलिस नितिन के जरिए राजफाश करेगी। इस केस की विवेचना की मॉनिटरिंग एडिशनल एसपी स्तर के पुलिस अधिकारी करेंगे। कहा कि नकली खून का धंधा गंभीर मामला है। इसलिए जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होने दी जाएगी।
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एसआरएन अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डा. देवेंद्र यादव ने बताया कि शनिवार को सीज किए गए खून की जांच सोमवार को कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित की गई जांच कमेटी के सामने होगी। इस जांच में सहायक आयुक्त (औषधि) केजी गुप्ता, औषधि निरीक्षक, एक मजिस्ट्रेट और ब्लड बैंक प्रभारी होंगे। यह भी संभव है कि यह खून स्मैकिए या बीमार व्यक्तियों ने चंद रुपयों के लालच में बेचा हो। इसकी भी जांच होगी कि इस ब्लड में हीमोग्लोबिन आदि मानक के अनुसार है या नहीं। इसके अलावा उसमें संक्रमण फैलाने वाली बीमारी के लक्षण तो नहीं है।
शहर के कई नर्सिग होम में खून बेचने वालों का गिरोह सक्रिय है। जो कि छह हजार रुपये से लेकर आठ हजार रुपये यूनिट के हिसाब से नर्सिंग होम के संचालकों के माध्यम से खून बेचते हैं। जिसका खुलासा एसआरएन अस्पताल में हो गया।
शहर के एसआरएन, काल्विन, बेली सहित कई प्रमुख अस्पतालों के गेटों पर खून बेचने वाले दलाल सक्रिय हैं। ये दलाल मरीज के तीमारदारों की परेशानी को भांप कर उन्हें खराब खून उपलब्ध करा देते हैं। ये लोग शहर के कीडगंज, दारागंज, शाहगंज, नखास कोना आदि इलाकों में रहने वाले स्मैकि यों को तीन सौ से लेकर पांच सौ रुपये का लालच देकर उनका किसी नर्सिंग होम में खून निकलवा लेते हैं। बाद में उस यूनिट पर एसआरएन, बेली, काल्विन और इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की ब्लड बैंक की फर्जी स्लिप लगाकर उसमें फर्जी सीरियल और बैच नंबर अंकित कर रहे हैं।
करीब सात साल पहले इंदिरा और संजीवनी नाम की दो ब्लड बैंकों में ब्लड के नाम पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उसी के बाद इन दोनों प्राइवेट ब्लड बैंक के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। पांच साल पहले एसआरएन अस्पताल के एक कर्मचारी को अपने घर से खून की पैकिंग कर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह एसआरएन अस्पताल की फर्जी पर्ची लगाकर खून बेचता था।
‘शहर में खून का गंदा कारोबार गंभीर मामला है। सीएमओ सहित सभी हेल्थ अफसर सोमवार को इस साल अवैध कारोबार के खिलाफ की गई कार्रवाई के साथ तलब किए हैं। भविष्य में नर्सिंग होम के अंदर इस तरह के धंधों को रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई का प्लान मांगा गया है।’ -आशीष गोयल, कमिश्नर
‘खून का धंधा करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि वह इस धंधे की गहराई से जांच कराएं। जिससे कि निचले स्तर पर इस धंधे में लिप्त बड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।’ रमित शर्मा, आईजी रेंज
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शनिवार को अलोपीबाग स्थित तिलक हॉस्पिटल के मैनेजर हरेंद्र चौबे और वार्ड ब्वाय वसीम ने 12 हजार रुपये में दो यूनिट नकली खून पीड़ित महिला को दिया था। महिला की तबियत खराब होने पर उसे उपचार के लिए एसआरएन अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां इसका खुलासा हुआ। औषधि निरीक्षक और कोतवाली पुलिस ने छापा मारकर हॉस्पिटल के मैनेजर और वार्ड ब्वाय को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों ने बताया कि उनको नितिन नाम का व्यक्ति नकली खून सप्लाई करता था।
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आईजी रमित शर्मा ने बताया कि पुलिस नितिन के जरिए राजफाश करेगी। इस केस की विवेचना की मॉनिटरिंग एडिशनल एसपी स्तर के पुलिस अधिकारी करेंगे। कहा कि नकली खून का धंधा गंभीर मामला है। इसलिए जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होने दी जाएगी।
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एसआरएन अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डा. देवेंद्र यादव ने बताया कि शनिवार को सीज किए गए खून की जांच सोमवार को कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित की गई जांच कमेटी के सामने होगी। इस जांच में सहायक आयुक्त (औषधि) केजी गुप्ता, औषधि निरीक्षक, एक मजिस्ट्रेट और ब्लड बैंक प्रभारी होंगे। यह भी संभव है कि यह खून स्मैकिए या बीमार व्यक्तियों ने चंद रुपयों के लालच में बेचा हो। इसकी भी जांच होगी कि इस ब्लड में हीमोग्लोबिन आदि मानक के अनुसार है या नहीं। इसके अलावा उसमें संक्रमण फैलाने वाली बीमारी के लक्षण तो नहीं है।
शहर के कई नर्सिग होम में खून बेचने वालों का गिरोह सक्रिय है। जो कि छह हजार रुपये से लेकर आठ हजार रुपये यूनिट के हिसाब से नर्सिंग होम के संचालकों के माध्यम से खून बेचते हैं। जिसका खुलासा एसआरएन अस्पताल में हो गया।
शहर के एसआरएन, काल्विन, बेली सहित कई प्रमुख अस्पतालों के गेटों पर खून बेचने वाले दलाल सक्रिय हैं। ये दलाल मरीज के तीमारदारों की परेशानी को भांप कर उन्हें खराब खून उपलब्ध करा देते हैं। ये लोग शहर के कीडगंज, दारागंज, शाहगंज, नखास कोना आदि इलाकों में रहने वाले स्मैकि यों को तीन सौ से लेकर पांच सौ रुपये का लालच देकर उनका किसी नर्सिंग होम में खून निकलवा लेते हैं। बाद में उस यूनिट पर एसआरएन, बेली, काल्विन और इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की ब्लड बैंक की फर्जी स्लिप लगाकर उसमें फर्जी सीरियल और बैच नंबर अंकित कर रहे हैं।
करीब सात साल पहले इंदिरा और संजीवनी नाम की दो ब्लड बैंकों में ब्लड के नाम पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उसी के बाद इन दोनों प्राइवेट ब्लड बैंक के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। पांच साल पहले एसआरएन अस्पताल के एक कर्मचारी को अपने घर से खून की पैकिंग कर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वह एसआरएन अस्पताल की फर्जी पर्ची लगाकर खून बेचता था।
‘शहर में खून का गंदा कारोबार गंभीर मामला है। सीएमओ सहित सभी हेल्थ अफसर सोमवार को इस साल अवैध कारोबार के खिलाफ की गई कार्रवाई के साथ तलब किए हैं। भविष्य में नर्सिंग होम के अंदर इस तरह के धंधों को रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई का प्लान मांगा गया है।’ -आशीष गोयल, कमिश्नर
‘खून का धंधा करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि वह इस धंधे की गहराई से जांच कराएं। जिससे कि निचले स्तर पर इस धंधे में लिप्त बड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो।’ रमित शर्मा, आईजी रेंज