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आत्मरक्षा के हथियारों से खुदकुशी और कत्ल
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 04 Jan 2017 12:23 AM IST
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आत्मरक्षा के लिए दिए जाने वाले लाइसेंसी हथियार जान के लिए आफत बन रहे हैं। सच तो यह है कि ऐसे हथियारों से सुरक्षा के लिए एक भी फायर नहीं हो रहे हैं बल्कि पुलिस रेकार्ड बता रहे हैं कि लाइसेंसी असलहों से कत्ल और खुदकुशी की घटनाएं हो रही हैं। पुलिस अफसर भी इस तथ्य से चिंतित हैं कि लाइसेंसी हथियार सुरक्षा की बजाय कानून-व्यवस्था के लिए मुसीबत बन रहे हैं। ऐसे असलहों से कत्ल की कई घटनाओं में हंगामा और चक्काजाम हो चुका है।
ज्यादा पुरानी नहीं कुछ हालिया घटनाओं पर गौर करें। चार दिसंबर की सुबह प्रीतम नगर में किराए के कमरे में फौजी धमेंद्र कुमार की अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली लगने मौत हो गई। वह बंगलुरू से छुट्टी पर पत्नी-बच्चों के साथ आया था। पत्नी ने कहा था कि पिस्टल की सफाई करते वक्त फायर हुए थे हालांकि तीन गोलियां चलने से घटना संदिग्ध मानी गई थी। कुछ ही दिन बाद 28 दिसंबर को सरायइनायत के सुदनीपुर कला गांव निवासी सेना के लांसनायक राजकपूर की पत्नी रीना सिंह (35) ने भी पति से फोन पर कहासुनी के बाद लाइसेंसी रिवॉल्वर से ख्रुद को गोली से उड़ा दिया। नौ दिसंबर को सरायममरेज के नेदुला रनकीपुर गांव में सीमेंट कारोबारी अशोक सिंह (40) ने भी आत्महत्या के लिए अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया। पिछले महीने ही सुलेमसराय में सराफा कारोबारी ने भी गोली मारकर जान दी थी।
पुलिस रेकार्ड के अनुसार पिछले साल भर के दौरान 13 लोगों ने लाइसेंसी शस्त्र का इस्तेमाल अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए किया। इसी तरह कत्ल की 19 घटनाओं में लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल हुए। पुलिस के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि शस्त्र लाइसेंस इसी शर्त पर दिए जाते हैं कि उनका इस्तेमाल विकट परिस्थिति में आत्मरक्षा के लिए किया जाएगा। मगर पिछले साल भर के दौरान आत्म सुरक्षा के लिए फायर का एक भी केस सामने नहीं आया। एसएसपी शलभ माथुर ने शियाट्स की घटना के बाद थानेदारों को आदेश दिया है कि बेजा इस्तेमाल किए जाने वाले पर लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी जाए।
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दो सामूहिक कत्ल भी हुए लाइसेंसी से
-पिछले साल सामूहिक कत्ल की दो घटनाओं में भी लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल हुए थे। कौंधियारा के एकौनी में 29 मई को जमीन के एक टुकड़े के लिए झगड़े में दरोगा सुरेशचंद्र पांडेय ने तीन लोगों को लाइसेंसी राइफल की गोली से उड़ा दिया था। हालांकि दरोगा और उसके पिता को भी लोगों ने लाठी से पीटकर मार डाला था। इसी तरह, घूरपुर के मोहद्दीपुर में गेंहू पिसाई के चार रुपये के चक्कर में तीन लोग मारे गए थे। उनमें दो लोगों का कत्ल लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर किया गया।
47 हजार लाइसेंसी शस्त्र हैं जनपद में
जिलाधिकारी कार्यालय से जानकारी मिली कि इलाहाबाद जनपद में मौजूदा समय में लगभग 47 हजार लाइसेंसी बंदूक, राइफल, पिस्टल और रिवॉल्वर हैं। हाईकोर्ट से करीब साल भर तक लाइसेंस जारी करने पर रोक खत्म होने के बाद कुछ समय पहले कड़े प्रावधानों के साथ लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया दुबारा शुरू हुई है।
अतीक ने भी किया नाजायज इस्तेमाल
नेता भी लाइसेंसी असलहों के नाजायज इस्तेमाल से पीछे नहीं हैं। पूर्व सांसद अतीक अहमद के तीन शस्त्र लाइसेंस पिछले दिनों शियाट्स में हुए बवाल के बाद निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उनके तीन करीबियों के भी लाइसेंस निरस्त किए जा रहे हैं। आपराधिक इस्तेमाल की वजह से अतीक के हथियारों के लाइसेंस पहले भी रद्द किए जा चुके हैं। उनके लाइसेंसी पिस्टल से नाबालिग बेटे द्वारा शादी समारोह में फायरिंग का वीडियो भी वायरल हो चुका है।
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ज्यादा पुरानी नहीं कुछ हालिया घटनाओं पर गौर करें। चार दिसंबर की सुबह प्रीतम नगर में किराए के कमरे में फौजी धमेंद्र कुमार की अपनी लाइसेंसी पिस्टल से गोली लगने मौत हो गई। वह बंगलुरू से छुट्टी पर पत्नी-बच्चों के साथ आया था। पत्नी ने कहा था कि पिस्टल की सफाई करते वक्त फायर हुए थे हालांकि तीन गोलियां चलने से घटना संदिग्ध मानी गई थी। कुछ ही दिन बाद 28 दिसंबर को सरायइनायत के सुदनीपुर कला गांव निवासी सेना के लांसनायक राजकपूर की पत्नी रीना सिंह (35) ने भी पति से फोन पर कहासुनी के बाद लाइसेंसी रिवॉल्वर से ख्रुद को गोली से उड़ा दिया। नौ दिसंबर को सरायममरेज के नेदुला रनकीपुर गांव में सीमेंट कारोबारी अशोक सिंह (40) ने भी आत्महत्या के लिए अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया। पिछले महीने ही सुलेमसराय में सराफा कारोबारी ने भी गोली मारकर जान दी थी।
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पुलिस रेकार्ड के अनुसार पिछले साल भर के दौरान 13 लोगों ने लाइसेंसी शस्त्र का इस्तेमाल अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए किया। इसी तरह कत्ल की 19 घटनाओं में लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल हुए। पुलिस के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि शस्त्र लाइसेंस इसी शर्त पर दिए जाते हैं कि उनका इस्तेमाल विकट परिस्थिति में आत्मरक्षा के लिए किया जाएगा। मगर पिछले साल भर के दौरान आत्म सुरक्षा के लिए फायर का एक भी केस सामने नहीं आया। एसएसपी शलभ माथुर ने शियाट्स की घटना के बाद थानेदारों को आदेश दिया है कि बेजा इस्तेमाल किए जाने वाले पर लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी जाए।
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दो सामूहिक कत्ल भी हुए लाइसेंसी से
-पिछले साल सामूहिक कत्ल की दो घटनाओं में भी लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल हुए थे। कौंधियारा के एकौनी में 29 मई को जमीन के एक टुकड़े के लिए झगड़े में दरोगा सुरेशचंद्र पांडेय ने तीन लोगों को लाइसेंसी राइफल की गोली से उड़ा दिया था। हालांकि दरोगा और उसके पिता को भी लोगों ने लाठी से पीटकर मार डाला था। इसी तरह, घूरपुर के मोहद्दीपुर में गेंहू पिसाई के चार रुपये के चक्कर में तीन लोग मारे गए थे। उनमें दो लोगों का कत्ल लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर किया गया।
47 हजार लाइसेंसी शस्त्र हैं जनपद में
जिलाधिकारी कार्यालय से जानकारी मिली कि इलाहाबाद जनपद में मौजूदा समय में लगभग 47 हजार लाइसेंसी बंदूक, राइफल, पिस्टल और रिवॉल्वर हैं। हाईकोर्ट से करीब साल भर तक लाइसेंस जारी करने पर रोक खत्म होने के बाद कुछ समय पहले कड़े प्रावधानों के साथ लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया दुबारा शुरू हुई है।
अतीक ने भी किया नाजायज इस्तेमाल
नेता भी लाइसेंसी असलहों के नाजायज इस्तेमाल से पीछे नहीं हैं। पूर्व सांसद अतीक अहमद के तीन शस्त्र लाइसेंस पिछले दिनों शियाट्स में हुए बवाल के बाद निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उनके तीन करीबियों के भी लाइसेंस निरस्त किए जा रहे हैं। आपराधिक इस्तेमाल की वजह से अतीक के हथियारों के लाइसेंस पहले भी रद्द किए जा चुके हैं। उनके लाइसेंसी पिस्टल से नाबालिग बेटे द्वारा शादी समारोह में फायरिंग का वीडियो भी वायरल हो चुका है।