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छत्तीसगढ़: हाथ पर लिखे 'के.के.' टैटू ने खोला ब्लाइंड मर्डर का राज, कातिल को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
Wed, 07 Oct 2026 06:49 PM IST
बालोद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: बालोद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 06:49 PM IST
सार
अज्ञात महिला की हत्या की गुत्थी हाथ पर बने के.के. टैटू ने सुलझा दी। टैटू से मृतका की पहचान होने के बाद पुलिस ने सीडीआर, साइबर जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई। अब जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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चर्चित हत्याकांड में कोर्ट ने सुनाई आजीवन उम्रकैद की सजा, लोहारा थाना का मामला
विस्तार
बालोद जिले में हाथ पर लिखे 'के.के.' टैटू पुलिस के लिए ऐसा अहम सुराग साबित हुआ, जिसने डौंडीलोहारा के चर्चित ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझा दी। अज्ञात महिला की पहचान से शुरू हुई जांच आखिरकार आरोपी तक पहुंची और अब जिला एवं सत्र न्यायालय ने हत्या के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, तकनीकी साक्ष्यों और फॉरेंसिक जांच ने मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
अज्ञात शव ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती
डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। महिला की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी शिनाख्त करना था। जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतका के हाथ पर बने अंग्रेजी अक्षर 'के.के.'के टैटू पर पड़ी। पुलिस ने इसी टैटू को अहम सुराग मानते हुए गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटानी शुरू की।
लगातार जांच के बाद मृतका की पहचान बालोद के ग्राम पाररास निवासी कमला राजपूत के रूप में हुई। पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए उसके संपर्कों और घटनाक्रम से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई।
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CDR और फॉरेंसिक साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस
मृतका की पहचान होने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल और पुलिस टीम ने जांच तेज कर दी। घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों के साथ तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का बारीकी से विश्लेषण किया गया।
जांच में सामने आए तथ्यों और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले में उपलब्ध वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में चला मुकदमा
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 19/26 दर्ज कर बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या) और धारा 238 (साक्ष्य मिटाने) के तहत न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस तरह एक अज्ञात महिला के शव से शुरू हुई जांच हाथ पर बने महज दो अक्षरों के टैटू से आगे बढ़ते हुए आरोपी की गिरफ्तारी और अदालत से सजा तक पहुंच गई।
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अज्ञात शव ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती
डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। महिला की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी शिनाख्त करना था। जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतका के हाथ पर बने अंग्रेजी अक्षर 'के.के.'के टैटू पर पड़ी। पुलिस ने इसी टैटू को अहम सुराग मानते हुए गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटानी शुरू की।
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लगातार जांच के बाद मृतका की पहचान बालोद के ग्राम पाररास निवासी कमला राजपूत के रूप में हुई। पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए उसके संपर्कों और घटनाक्रम से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई।
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CDR और फॉरेंसिक साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस
मृतका की पहचान होने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल और पुलिस टीम ने जांच तेज कर दी। घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों के साथ तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का बारीकी से विश्लेषण किया गया।
जांच में सामने आए तथ्यों और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले में उपलब्ध वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में चला मुकदमा
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 19/26 दर्ज कर बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या) और धारा 238 (साक्ष्य मिटाने) के तहत न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस तरह एक अज्ञात महिला के शव से शुरू हुई जांच हाथ पर बने महज दो अक्षरों के टैटू से आगे बढ़ते हुए आरोपी की गिरफ्तारी और अदालत से सजा तक पहुंच गई।