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बच्चे की पहचान को डीएनए जांच, लखनऊ जाएंगे सैंपल
Updated Wed, 05 Dec 2018 12:57 AM IST
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चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में मंगलवार को डीएनए जांच के लिए माता-पिता संग बच्ची के रक्त नमूने लिए गए। टीम ने बच्चे के फुट प्रिंट(पैरों की छाप) भी ली। इस मामले में लंबी जद्दोजहद के बाद विवेचक के प्रयास से जांच के रास्ते खुले। जबकि प्राचार्य मेडिकल कॉलेज के निर्देश पर गठित विशेषज्ञों की कमेटी ने अभी रिपोर्ट नहीं दी है। निर्देश के मुताबिक सैंपल विवेचक को दिए गए हैं। जिसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया है।
बेटे को खोज रही माता-पिता का रो रोकर हाल खराब है। अभिलेखों में दर्ज बेटा अचानक बेटी कैसे हो गई, इसी की जांच कराने को दंपति भटक रहे थे। आरोप, शिकायत, गुहार से जो बात नहीं बनी उसके लिए एफआईआर दर्ज कराने के कारण रास्ते खुले। सीएमएस बेली के निर्देश पर डॉ. नीता साहू के नेतृत्व में चिल्ड्रेन अस्पताल गई टीम ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बच्ची के फुट प्रिंट(पैरों की छाप) और माता प्रीति, पिता विनोद कुमार गुप्ता के साथ बच्ची के रक्त नमूने लिए। नमूनों की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला में की जाएगी। रिपोर्ट विवेचक को ही मिलेगी, तब स्थिति साफ होगी।
क्या है मामला
प्रतापगढ़ के सहिबापुर जमेठी गांव निवासी विनोद कुमार गुप्ता की पत्नी प्रीती ने 17 नवंबर को कुंडा सीएचसी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों का वजन कम था, इसलिए चिकित्सकों ने दोनों को चिल्ड्रेन अस्पताल रेफर कर दिया था। रास्ते में एक बच्चे की मौत हो गई और दूसरे को सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन) में भर्ती कराया गया था। प्रसूता प्रीति और उसके पति विनोद का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत से उनका बच्चा बदल दिया गया।
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विशेषज्ञों की कमेटी ने नहीं दी रिपोर्ट
चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चा बदले जाने का मामला गरमाया तो इसे गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें बीएचयू के बालरोग विभाग के हेड डॉ. राजनीति कुमार, गायनी हेड डॉ. अमृता चौरसिया, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दिलीप चौरसिया, फोरेंसिक विभाग के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट देनी थी, जो आज तक नहीं दी गई है।
अस्पताल कर्मचारी झाड़ रहे पल्ला
प्रीति और विनोद का आरोप है कि बच्चा बदलने के मामले में चिल्ड्रेन के डॉक्टर और स्टाफ नर्स बार-बार बयान बदल रहे हैं। दोनों ने बताया कि गड़बड़ी तब की गई, जब परिवार को लोग दूसरे बच्चे का अंतिम संस्कार करने गए थे। उस वक्त अस्पताल में कोई तीमारदार नहीं था। अब जिससे पूछताछ की जा रही है, वो कह रहा है कि वह अवकाश पर थे या दूसरी जगह ड्यूटी कर रहे थे। जबकि कुंडा से चिल्ड्रेन तक के अभिलेखों में साफ है कि दोनों बच्चे मेल थे। दो दिन चिल्ड्रेन में भी जांच, दवा की पर्ची पर बेबी ऑफ प्रीति मेल लिखा गया है।
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बेटे को खोज रही माता-पिता का रो रोकर हाल खराब है। अभिलेखों में दर्ज बेटा अचानक बेटी कैसे हो गई, इसी की जांच कराने को दंपति भटक रहे थे। आरोप, शिकायत, गुहार से जो बात नहीं बनी उसके लिए एफआईआर दर्ज कराने के कारण रास्ते खुले। सीएमएस बेली के निर्देश पर डॉ. नीता साहू के नेतृत्व में चिल्ड्रेन अस्पताल गई टीम ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बच्ची के फुट प्रिंट(पैरों की छाप) और माता प्रीति, पिता विनोद कुमार गुप्ता के साथ बच्ची के रक्त नमूने लिए। नमूनों की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला में की जाएगी। रिपोर्ट विवेचक को ही मिलेगी, तब स्थिति साफ होगी।
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क्या है मामला
प्रतापगढ़ के सहिबापुर जमेठी गांव निवासी विनोद कुमार गुप्ता की पत्नी प्रीती ने 17 नवंबर को कुंडा सीएचसी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों का वजन कम था, इसलिए चिकित्सकों ने दोनों को चिल्ड्रेन अस्पताल रेफर कर दिया था। रास्ते में एक बच्चे की मौत हो गई और दूसरे को सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन) में भर्ती कराया गया था। प्रसूता प्रीति और उसके पति विनोद का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत से उनका बच्चा बदल दिया गया।
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विशेषज्ञों की कमेटी ने नहीं दी रिपोर्ट
चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चा बदले जाने का मामला गरमाया तो इसे गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें बीएचयू के बालरोग विभाग के हेड डॉ. राजनीति कुमार, गायनी हेड डॉ. अमृता चौरसिया, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दिलीप चौरसिया, फोरेंसिक विभाग के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट देनी थी, जो आज तक नहीं दी गई है।
अस्पताल कर्मचारी झाड़ रहे पल्ला
प्रीति और विनोद का आरोप है कि बच्चा बदलने के मामले में चिल्ड्रेन के डॉक्टर और स्टाफ नर्स बार-बार बयान बदल रहे हैं। दोनों ने बताया कि गड़बड़ी तब की गई, जब परिवार को लोग दूसरे बच्चे का अंतिम संस्कार करने गए थे। उस वक्त अस्पताल में कोई तीमारदार नहीं था। अब जिससे पूछताछ की जा रही है, वो कह रहा है कि वह अवकाश पर थे या दूसरी जगह ड्यूटी कर रहे थे। जबकि कुंडा से चिल्ड्रेन तक के अभिलेखों में साफ है कि दोनों बच्चे मेल थे। दो दिन चिल्ड्रेन में भी जांच, दवा की पर्ची पर बेबी ऑफ प्रीति मेल लिखा गया है।