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तीन दशक तक अलीगढ़ नुमाइश की शान रहे राहत इंदौरी
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अपने दमदार अंदाज और फौलादी शायरी से लोगों के दिल और दिमाग में जगह बनाने वाले मशहूर शायर राहत इंदौरी का अलीगढ़ से बेहद करीबी नाता रहा। पिछले तकरीबन 3 दशकों से वह अलीगढ़ की नुमाइश में होने वाले कुल हिंद मुशायरे में शिरकत करते चले आ रहे थे। इसके अलावा अलीगढ़ के शायरों ने भी राहत इंदौरी के साथ देश और दुनिया में हर जगह मंच साझा किए। आज उनके निधन के बाद अलीगढ़ की शायर बिरादरी भी अफसोस में है।
रिहाना शाहीन को रेवो कहकर पुकारते थे राहत
मशहूर शायरा रिहाना शाहीन कहती हैं कि उन्होंने आखिरी बार राहत इंदौरी साहब के साथ दुबई में मंच साझा किया था। इसके बाद हालात ऐसे बने कि मुशायरे ही नहीं हुए। रिहाना शाहीन कहती हैं कि राहत उनको रेवो कहकर बुलाते थे। कुछ वर्षों तक तो इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि इसका मतलब क्या है। एक बार एक मुशायरे के दौरान उन्होंने राहत इंदौरी से पूछ लिया कि जनाब आप मुझे रेवो के नाम से बुलाते हैं, आखिरकार इसका मतलब क्या है तो उन्होंने बताया एक बहुत खूबसूरत मछली का नाम रेवो होता है। इस तरह के तमाम यादगार किस्से राहत इंदौरी के साथ रहे हैं।
बेबाक शायरी राहत की पहचान: जॉनी फास्टर
राहत इंदौरी के साथ ही कई बार मंच साझा कर चुके संगीतकार और शायर जॉनी पोस्टर कहते हैं कि पहली बार उन्होंने 90 के दशक में इंडो पाक मुशायरे के दौरान इंदौर में बुलवाया था। इसके बाद राहत इंदौरी उनके करीबी बन गए। तमाम मुशायरों में उनसे मुलाकात होती थी। उनकी शायरी का आलम यह था हजारों की भीड़ में भी ऐसी खामोशी छा जाती थी कि सुई गिरने की आवाज भी सुन ली जाए। उनका जैसा मिजाज था, वह शायरी में झलकता भी था। बेबाकी उनकी सबसे बड़ी खूबी थी।
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कई बार एएमयू में भी आए राहत इंदौरी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि राहत इंदौरी कई बार एएमयू में हुए मुशायरे में भी आए। इसके अलावा नुमाइश में होने वाले कुल हिंद मुशायरे में राहत एएमयू छात्रों की खास पसंद हुआ करते। छात्र खासतौर से राहत इंदौरी को सुनने के लिए मुशायरे में शिरकत करते। यहां पर शेर पढ़ने वाले शायरों को इस बात का अंदाजा रहता था कि हजारों की संख्या में यहां पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र भी मौजूद हैं। राहत इंदौरी अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते समय कई बार इस बात का जिक्र मंच से भी किया।
आज हिंदुस्तान से शायरी का एक बेजोड़ नगीना जुदा हो गया है। राहत इंदौरी की शायरी में समाज की धड़कन झलकती है। ऐसी ताकतें जो समाज में विघटन पैदा करती हैं, उन पर बेहद कड़ा प्रहार राहत इंदौरी ने अपनी शायरी के माध्यम से किया है और इस खूबसूरती के साथ किया है कि गजल के मानक और ग़जल की ना झुकी भी बनी रहे। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।
- सुरेश कुमार, प्रसिद्ध गजलकार
राहत इंदौरी हिंदी-उर्दू शायरी और विशेष रूप से कहें कि गंगा-जमुनी संस्कृति के बहुत बड़े शायर थे। उनका गजल पढ़ने का अंदाज ऐसा था कि वह अपनी शायरी के द्वारा सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचते थे। मेरा सौभाग्य रहा कि अनेक कार्यक्त्रस्मों में उनके साथ मैंने मंच साझा किया। उनके जाने से निश्चित रूप से शायरी का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।
- अशोक अंजुम
डॉ. राहत इंदौरी के इंतकाल से उर्दू अदब को धक्का लगा है। साथ ही उनके इंतकाल से कोरोना काल में खुद की हिफाजत करने का संकेत भी मिला है। डॉ. इंदौरी नामवर शायर थे। वह एएमयू एल्युमिनाई की ओर से दुबई, अमेरिका, इंग्लैंड सहित अन्य जगहों पर होने वाले मुशायरों में जरूर शिरकत करते थे।
- डॉ. राहत अबरार, डायरेक्टर, उर्दू एकेडमी एएमयू
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रिहाना शाहीन को रेवो कहकर पुकारते थे राहत
मशहूर शायरा रिहाना शाहीन कहती हैं कि उन्होंने आखिरी बार राहत इंदौरी साहब के साथ दुबई में मंच साझा किया था। इसके बाद हालात ऐसे बने कि मुशायरे ही नहीं हुए। रिहाना शाहीन कहती हैं कि राहत उनको रेवो कहकर बुलाते थे। कुछ वर्षों तक तो इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि इसका मतलब क्या है। एक बार एक मुशायरे के दौरान उन्होंने राहत इंदौरी से पूछ लिया कि जनाब आप मुझे रेवो के नाम से बुलाते हैं, आखिरकार इसका मतलब क्या है तो उन्होंने बताया एक बहुत खूबसूरत मछली का नाम रेवो होता है। इस तरह के तमाम यादगार किस्से राहत इंदौरी के साथ रहे हैं।
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बेबाक शायरी राहत की पहचान: जॉनी फास्टर
राहत इंदौरी के साथ ही कई बार मंच साझा कर चुके संगीतकार और शायर जॉनी पोस्टर कहते हैं कि पहली बार उन्होंने 90 के दशक में इंडो पाक मुशायरे के दौरान इंदौर में बुलवाया था। इसके बाद राहत इंदौरी उनके करीबी बन गए। तमाम मुशायरों में उनसे मुलाकात होती थी। उनकी शायरी का आलम यह था हजारों की भीड़ में भी ऐसी खामोशी छा जाती थी कि सुई गिरने की आवाज भी सुन ली जाए। उनका जैसा मिजाज था, वह शायरी में झलकता भी था। बेबाकी उनकी सबसे बड़ी खूबी थी।
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कई बार एएमयू में भी आए राहत इंदौरी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि राहत इंदौरी कई बार एएमयू में हुए मुशायरे में भी आए। इसके अलावा नुमाइश में होने वाले कुल हिंद मुशायरे में राहत एएमयू छात्रों की खास पसंद हुआ करते। छात्र खासतौर से राहत इंदौरी को सुनने के लिए मुशायरे में शिरकत करते। यहां पर शेर पढ़ने वाले शायरों को इस बात का अंदाजा रहता था कि हजारों की संख्या में यहां पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र भी मौजूद हैं। राहत इंदौरी अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते समय कई बार इस बात का जिक्र मंच से भी किया।
आज हिंदुस्तान से शायरी का एक बेजोड़ नगीना जुदा हो गया है। राहत इंदौरी की शायरी में समाज की धड़कन झलकती है। ऐसी ताकतें जो समाज में विघटन पैदा करती हैं, उन पर बेहद कड़ा प्रहार राहत इंदौरी ने अपनी शायरी के माध्यम से किया है और इस खूबसूरती के साथ किया है कि गजल के मानक और ग़जल की ना झुकी भी बनी रहे। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।
- सुरेश कुमार, प्रसिद्ध गजलकार
राहत इंदौरी हिंदी-उर्दू शायरी और विशेष रूप से कहें कि गंगा-जमुनी संस्कृति के बहुत बड़े शायर थे। उनका गजल पढ़ने का अंदाज ऐसा था कि वह अपनी शायरी के द्वारा सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचते थे। मेरा सौभाग्य रहा कि अनेक कार्यक्त्रस्मों में उनके साथ मैंने मंच साझा किया। उनके जाने से निश्चित रूप से शायरी का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।
- अशोक अंजुम
डॉ. राहत इंदौरी के इंतकाल से उर्दू अदब को धक्का लगा है। साथ ही उनके इंतकाल से कोरोना काल में खुद की हिफाजत करने का संकेत भी मिला है। डॉ. इंदौरी नामवर शायर थे। वह एएमयू एल्युमिनाई की ओर से दुबई, अमेरिका, इंग्लैंड सहित अन्य जगहों पर होने वाले मुशायरों में जरूर शिरकत करते थे।
- डॉ. राहत अबरार, डायरेक्टर, उर्दू एकेडमी एएमयू