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Aligarh News: पोल्ट्री कॉन्क्लेव में 50 करोड़ के एमओयू हुए
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मंडल स्तरीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव में शामिल पदाधिकारी। संवाद
पोल्ट्री उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को कमिश्नरी सभागार में एक दिवसीय मंडल स्तरीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। जिसमें पोल्ट्री फाॅर्मों को डिजिटल करने पर जोर दिया गया। यहां पर 50 करोड़ के एमओयू किए गए।
संयोजक एवं सीवीओ डॉ. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि विभाग और उद्यमियों के बीच 50 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के लिए एमओयू हुए हैं। एमओयू करने वालों में प्रतीक वार्ष्णेय, रॉबिन चौधरी, संजय तिवारी और अनुपम माहेश्वरी प्रमुख रहे। उद्यम में लगाई जाने वाली कुल पूंजी का 30 प्रतिशत पशुपालक द्वारा लगाया जाएगा और 70 प्रतिशत बैंक से लोन लिया जाएगा। ब्याज विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, मार्केटिंग, निवेश एवं रोजगार सृजन पर जोर दिया। पोल्ट्री फॉर्म को डिजिटिलाइज्ड करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। शुभारंभ करते हुए मंडलायुक्त ओपी आर्य ने कहा कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ाया जा सकता है।
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विशिष्ट अतिथि अपर निदेशक पशुपालन डॉ. अनिल कुमार गहलौत ने मंडल में पोल्ट्री उद्योग के विकास से रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने उद्यमियों एवं किसानों से सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। अपर निदेशक डॉ. हौसला प्रसाद ने विभागीय प्रयास और भविष्य की संभावनाएं बताईं। कार्यक्रम में अपर निदेशक डाॅ. प्रमोद कुमार, डाॅ. बृजेश त्रिपाठी, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डाॅ. पीके सिंह, पॉल्ट्री फॉर्म संचालक एवं किसान उपस्थित रहे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विवि के डॉ. प्रो. अमिताभ भट्टाचार्य, प्रमुख विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और विचार साझा किए। कहा कि पोल्ट्री उद्योग केवल अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक कृषि-आधारित उद्योग है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
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संयोजक एवं सीवीओ डॉ. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि विभाग और उद्यमियों के बीच 50 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के लिए एमओयू हुए हैं। एमओयू करने वालों में प्रतीक वार्ष्णेय, रॉबिन चौधरी, संजय तिवारी और अनुपम माहेश्वरी प्रमुख रहे। उद्यम में लगाई जाने वाली कुल पूंजी का 30 प्रतिशत पशुपालक द्वारा लगाया जाएगा और 70 प्रतिशत बैंक से लोन लिया जाएगा। ब्याज विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
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विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, मार्केटिंग, निवेश एवं रोजगार सृजन पर जोर दिया। पोल्ट्री फॉर्म को डिजिटिलाइज्ड करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। शुभारंभ करते हुए मंडलायुक्त ओपी आर्य ने कहा कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ाया जा सकता है।
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विशिष्ट अतिथि अपर निदेशक पशुपालन डॉ. अनिल कुमार गहलौत ने मंडल में पोल्ट्री उद्योग के विकास से रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने उद्यमियों एवं किसानों से सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। अपर निदेशक डॉ. हौसला प्रसाद ने विभागीय प्रयास और भविष्य की संभावनाएं बताईं। कार्यक्रम में अपर निदेशक डाॅ. प्रमोद कुमार, डाॅ. बृजेश त्रिपाठी, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डाॅ. पीके सिंह, पॉल्ट्री फॉर्म संचालक एवं किसान उपस्थित रहे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विवि के डॉ. प्रो. अमिताभ भट्टाचार्य, प्रमुख विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और विचार साझा किए। कहा कि पोल्ट्री उद्योग केवल अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक कृषि-आधारित उद्योग है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।