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सवा रुपये में तैयार हो रहे फल व सब्जियों के पौधे

Sat, 17 Apr 2021 12:29 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Apr 2021 12:29 AM IST
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Plants of fruits and vegetables are being prepared in 1.25  rupees
मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल नर्सरी की फोटो। - फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
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फलों और सब्जियों की नर्सरी लगाना खासा मुश्किल और खर्चीला काम है, लेकिन अब गरमी, धूल और पानी की किल्लत के बीच इस्राइली तकनीकी से इन छोटे छोटे पौधों को सुरक्षित रख कर मनमाफिक फसल लेना काफी हद तक आसान हो गया है। किसान एक रुपये प्रति पौधे की दर से अपनी पौध सरकारी पॉली हाउस में तैयार करा रहे हैं। इस तकनीक से तैयार तरबूज, खरबूज और इंदिरा प्रजाति की शिमला मिर्च की पौध से अब फसलें उगाई जा रही है। हाल ही में ऐसे 68 हजार पौधे तैयार कर लगभग एक दर्जन किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं। गंगा यमुना के दोआबे पर बसे अलीगढ़ में इसका पहला प्रयोग सफल रहा है।
जवाहर पार्क में हाल ही में इस्राइली तकनीक पर आधारित एक पॉली हाउस बनाया गया है, जिसमें ड्रिप सिंचाई सिस्टम, कोकोबीट, पर्कोलाइट, सेडनेट और कम्प्यूटराइज्ड कंट्रोल पैनल मशीन आदि सभी आधुनिक सुविधाएं हैं, जिससे संबंधित प्रजाति के बीज की जरूरत के अनुसार तापमान, मिट्टी, जैविक खाद और पानी की मात्रा को कम-ज्यादा कर उनको 30 दिन में तैयार कर लिया जाता है। एक करोड़ रुपये की लागत वाले इस पॉली हाउस में एक महीने में 90 हजार से एक लाख पौधे तैयार किए जा सकते हैं। अब किसान यहां टमाटर के बीज लेकर पहुंच रहे हैं, जो मई और जून में लगाए जाएंगे। इसी तरह से जुलाई में बरसात के समय में होने वाली सब्जियों और फलों के बीज भी यहां पौध बनने के लिए पहुंच रहे हैं।
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कुल बीज में से लगभग 90 प्रतिशत पौध बन जाते हैं
किसान अपनी पसंद का बीज लाकर इस पॉली हाउस में एक रुपये में तैयार कराते हैं। पौध तैयार होने के बाद 25 पैसे की पैकिंग कीमत देनी होती है। इस तरह से एक किसान को एक पौध तैयार कराने में लगभग सवा रुपये देने होते हैं। यहां लगाए गए कुल बीज में से लगभग 90 प्रतिशत पौधों में बदल जाते हैं। इससे उलटा किसान जब खुद नर्सरी लगाते हैं, तो सिंचाई, खाद, आवारा पशुओं से रक्षा में उनका खर्च अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। उनके लगाए बीज में लगभग 60 से 65 फीसदी पौधे उगते हैं। ऐसे में किसानों के लिए ये पॉली हाउस बड़ी सुविधा बन रहा है। अलीगढ़ मंडल के चार जिलों में ये इकलौता पॉली हाउस है, जिसको मार्च में शुरू किया गया है।
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मांग बढ़ने और खोले जा सकते हैं पाली हाउस
जिला उद्यान अधिकारी नंद किशोर सहानिया ने बताया कि इगलास, जटटारी, धनीपुर, अतरौली और मडराक के कई किसानों ने यहां से खरबूज की मधुराज और मृदुला, तरबुज की आइसबाक्स एवं स्वीट राउंड किस्म ले गए थे। उनकी फसल लगभग तैयार होने वाली है। इसके बाद शिमला मिर्च की इंदिरा नाम की प्रजाति का पौध तैयार हुई है। वर्तमान में केला व शिमला मिर्च की पौध है। बैंगन, टमाटर के पौधे भी किसान मांग रह हैं। प्रयोग सफल हो रहा है। मांग बढ़ने पर ऐसे और पॉली हाउस खोले जा सकते हैं। वहीं, जिन एक दर्जन किसानों को इसका लाभ मिला है, उन्हीं में से एक पाली मडराक निवासी किसान राजेश सिंह ने कहा कि सरकार का ये प्रयोग अनूठा है। खरबूज के 5500 और तरबूज के 5600 पौधे लिए थे। फसल भी बेहतर है।
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