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अलीगढ़ः नेताजी, इस बार वोटरों का मिजाज गर्म है, कुछ तो खर्च करना पड़ेगा

Thu, 03 Feb 2022 01:36 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:36 AM IST
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Netaji, the mood of voters is hot this time, something has to be spent
विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान मैदान में खड़े एक प्रत्याशी गांव में जनसंपर्क के लिए पहुंचे। तभी वोटों के एक सौदागर ने नेताजी का हाथ पकड़ा और उन्हें साइड में ले गया और पीछे से कान में फुसफुसाया। बोला, इस बार चुनाव में वोटरों का मिजाज कुछ गर्म है। इसलिए इन्हें मनाने में काफी मेेहनत करनी होगी। नेताजी बोले, भाई बस इतना बता दो करना क्या होगा? अपनी चुप्पी तोड़ते हुए वोटों का सौदागर बोला, चुनाव जीतकर विधायक बनना है तो वोटरों को मनाने व खुश करने को मिठाई आदि के नाम पर कुछ तो खर्च करना ही पड़ेगा। नेताजी, बस आप अपना इशारा कर दीजिए। सारे मुहल्ले व गांव के वोट सिर्फ आपको ही मिलेंगे जिससे चुनाव में आपकी जीत तय है। चुुनाव प्रचार के दौरान रोजाना ऐसे ही तमाम दिलचस्प नजारे देखने व सुनने को मिल रहे हैं। इससे चुनाव में वोटों के सौदागरों की खूब चांदी कट रही है। वे वोट दिलाने के बदले प्रत्याशियों से मोटी रकम ऐंठने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
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चुनाव नजदीक, बढ़ रही धड़कने
विधानसभा चुनाव में जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे ही चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों व उनके समर्थकों की धड़कने भी तेज हो गई हैं। ऐसे में मौके का फायदा उठाने को देहात में गली, मुहल्ले व गांव व शहर की कॉलोनियों में वोटों के सौदागर भी खासे सक्रिय हो गए हैं। ये सौदागर अपना वर्चस्व व विभिन्न समाज और जातियों को अपने पक्ष में दिखाकर उनका वोट दिलवाने का भरोसा दे रहे हैं। बदले में प्रत्याशियों से मोटी रकम भी वसूल रहे हैं। प्रत्याशी व उनके समर्थक भी चुनाव जीतने में कोई चूक नहीं करना चाहते है। जिससे इन सौदागरों की चुनाव में भूमिका काफी बढ़ गई है। वोटों के सौदागरों ने जाति-बिरादरी में अपने संगठन बना रखे हैं। वे प्रत्याशी को अधिकाधिकवोट दिलवाने का लालच दे रहे हैं। ऐसी स्थिति भी पैदा की जा रही है कि प्रत्याशी उनसे मिलें तो प्रत्याशियों को वोट के रूप में काफी फायदा हो सकता है। हर गांव व हर मुहल्ले का ठेका इन्हें दिया जा रहा है। प्रत्याशी भी इकट्ठे वोट पाने की चाह में इनके संपर्क में आने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं और वोटों के सौदागरों की मांगों को मोटी रकम देकर पूरा कर रहे हैं। यह बाद की बात है कि इन सौदागर के कहने पर उनकी बिरादरी, जाति, मुहल्ला व गांव वाले कितना वोट प्रत्याशी के पक्ष में देते हैं? लेकिन इनकी सक्रियता इन दिनों अपने पूरे चरम पर है।
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वोट के हिसाब से तय हो रही रकम
वोटों के सौदागर चुनाव में प्रत्याशियों को जातिगत आंकड़े गिनाने के साथ ही प्रति घर व वोट के हिसाब से अपना पैकेज भी समझा रहे हैं। गांव में जहां समुदाय के हिसाब से तो शहरी क्षेत्र में मुहल्ले के हिसाब से प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाने का लालच देकर प्रति वोट रकम वसूल कर रहे हैं। चुनाव आयोग की सख्ती के चलते प्रत्याशी इस बार खुलकर प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। प्रत्याशियों की मजबूरी है, सो वे वोटों के सौदागरों की मांगों को मानकर रकम चुका रहे हैं।
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