सेहत से खिलबाड़: ब्रांड के नाम पर बेच रहे थे नकली आटा, वो भी ताैल में निकला कम, नमूना ले स्टॉक किया सीज
जांच में यह भी सामने आया कि दुकान से बेचे जा रहे पैकेटों पर कोई बैच नंबर दर्ज नहीं था। इससे साफ हुआ कि बाजार में कंपनी के नाम का गलत इस्तेमाल कर मिलावटी और नकली पैकेट बेचे जा रहे थे।
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अलीगढ़ के सुदामापुरी इलाके में अग्रवाल किराना स्टोर पर ब्रांड के नाम पर नकली आटा बेचने और ग्राहकों के साथ घटतौली किए जाने का भंडाफोड़ हुआ है। यहां पर 10 किलो के पैकेट में नौ किलो आटा ही ग्राहकों को मिल रहा था। बृहस्पतिवार को खुलासा होने पर जमकर हंगामा हुआ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और नमूना लेकर आटे का स्टॉक सीज कर दिया।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक सहायक अभियंता ने सुदामापुरी स्थित अग्रवाल किराना स्टोर से रुचि ब्रांड का 10 किलो पैकेट वाला आटा खरीदा। अभियंता को वजन कम लगा तो उन्होंने घर जाकर तौल की। पैकेज का वजन नौ किलो निकला। उन्होंने इसकी जानकारी खैर रोड स्थित नादा पुल के पास स्थित रुचि ब्रांड आटा कंपनी के संचालकों को दी।
कंपनी के संचालक दीपेंद्र अपनी टीम के साथ सक्रिय हुए। जांच में पुष्टि हुई कि अग्रवाल किराना स्टोर जिसके संचालक धर्मेंद्र और जितेंद्र अग्रवाल हैं, वहां कंपनी की ओर से कोई आपूर्ति नहीं की जा रही थी। इसके बाद दीपेंद्र ने अपने एक आदमी को ग्राहक के रूप में दुकान पर भेजा। वहां से रुचि ब्रांड के तीन और डबल हिरन ब्रांड का एक पैकेट आटा खरीदा गया। इन पैकेटों का वजन कराया गया तो सभी में निर्धारित वजन से एक किलो कम आटा निकला। गौरतलब है कि अलीगढ़ में इससे पहले भी पंचवटी आटा समेत कई अन्य ब्रांड में मिलावट और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
बिना बैच नंबर के बिक रहा था आटा
जांच में यह भी सामने आया कि दुकान से बेचे जा रहे पैकेटों पर कोई बैच नंबर दर्ज नहीं था। इससे साफ हुआ कि बाजार में कंपनी के नाम का गलत इस्तेमाल कर मिलावटी और नकली पैकेट बेचे जा रहे थे। कंपनी के लोग दुकान पर पहुंचे तो वहां हंगामा शुरू हो गया। स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी तन्मय अग्रहरि टीम के साथ मौके पर पहुंचे। रुचि ब्रांड के आटे का नमूना लेकर लैब में जांच के लिए भेजते हुए बाकी स्टॉक को सीज कर दिया। उद्योग व्यापार मंडल के भूपेंद्र वार्ष्णेय समेत कई व्यापारी नेता भी मौके पर पहुंचे। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम के साथ इनकी नोकझोंक भी हुई।
कंपनी के मालिक की शिकायत पर आटे का नमूना लिया गया है। लैब से रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। घटतौली का मामला बाट माप विभाग के अंतर्गत आता है और कॉपीराइट उल्लंघन या ब्रांड के नाम के दुरुपयोग पर कंपनी संचालक खुद कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।- दीपक सिंह, खाद्य सुरक्षा आयुक्त
आप भी कर सकते हैं आटे में मिलावट की जांच
- गेहूं के आटे में आमताैर पर पत्थर का चूरा, चॉक पाउडर या राख की मिलावट की जाती है। इसकी जांच घर पर आसानी से की जा सकती है।
- नींबू परीक्षण : थोड़ा सा आटा लेकर उसपर नींबू के रस की कुछ बूंदें डालें। यदि आटे से बुलबुले उठें या झाग बने तो यह चाॅक पाउडर या चूने की मिलावट का संकेत है।
- पानी परीक्षण : एक गिलास पानी में एक चम्मच आटा डालें और इसे अच्छी तरह मिलाएं।यदि पत्थर या चाॅक की मिलावट होगी, तो वह तली में बैठ जाएगी। यदि चोकर या हल्की अशुद्धियां होंगी, तो वे पानी पर तैरने लगेंगी।
- हथेली परीक्षण : थोड़ा सा आटा अपनी हथेली पर रखें। इसे उंगली से अच्छी तरह रगड़ें।यदि हथेली पर असामान्य चिकनाहट या चमक महसूस हो, तो उसमें मिलावट का संकेत है। शुद्ध आटा छूने में थोड़ा खुरदुरा लगता है।
- स्वाद परीक्षण : एक चुटकी आटा चखें। यदि मुंह में मिट्टी या किरकिराहट जैसा अजीब स्वाद आए तो आटा मिलावटी हो सकता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- खानपान की चीजें खरीदते समय पैकिंग और एक्सपायरी की तारीख जरूर जांचें।
- यदि पैकेज पर इसका उल्लेख नहीं तो यह नकली हो सकता है।
- खरीद का बिल जरूर लें, इससे शिकायत दर्ज कराने में सहायता मिलेगी।
- बाजार में खुली चीजें खरीदने से बचें। इनमें मिलावट की संभावना ज्यादा होती है।