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सारस के कुनबे में शामिल हुआ नन्हा मेहमान
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शेखा झील के पक्षी विहार में सारस के जोड़े द्वारा घोंसला बनाकर दिए गए अंडे से नन्हे सारस ने जन्म ले लिया है। हालांकि दूसरा अंडे से जीवित शिशु सारस नहीं निकल सका, लेकिन सारस के कुनबे में एक और सदस्य के जुड़ने से पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर है। फिलहाल सारस का जोड़ा नन्हें सारस को लेकर झील के इर्द-गिर्द धान के खेतों में घूमते देखा जा सकता है।
प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस की संख्या में बीते कई वर्षों में आई गिरावट ने वन्य जीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। इसके बाद सारस की निगरानी से लेकर इनके संरक्षण के लिए जिलेवार समिति बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति के प्रयास से बीते दो साल में प्रदेश में सारस की संख्या में इजाफा हुआ है।
यहां मौजूद शेखा झील के पक्षी विहार में बीते कई वर्षों से सारस क्रेन के जोड़े प्रजनन करते चले आ रहे हैं। इस बार भी सारस के दो जोड़ों ने अंडे दिए थे। इसमें से एक घोंसले के दो अंडे शिकारी चील खा गई, जबकि दूसरे जोड़े द्वारा दिए गए दो अंडों में से एक नन्हे सारस ने झील में जन्म ले लिया है। 22 अगस्त की शाम अंडे से निकले नन्हे सारस को लेकर सारस का जोड़ा रात में ही घोंसले से निकल गया। झील पर तैनात पक्षी विशेषज्ञ और नेचर गाइड इशाक मोहम्मद ने बताया कि शिशु सारस की सुरक्षा के लिए सारस का जोड़ा इसे आसपास के धान के खेतों में लेकर रहता है, जिससे उसे सुरक्षित रखा जा सके।
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बता दें कि सारस क्रेन के प्रजनन का समय जून माह से शुरू हो जाता है और जुलाई-अगस्त माह में अंडों से बच्चे बाहर निकल आते हैं। अधिकांशत: दो अंडों में से एक अंडे का बच्चा ही जीवित निकलता है। पक्षी प्रेमी विराग शर्मा ने बताया कि शेखाझील का ईको सिस्टम बेहद सकारात्मक है। इस कारण प्रतिवर्ष सारस यहां आकर प्रजनन करते हैं।
- मादा सारस एक बार में औसतन दो अंडे देती है। इसमें अधिकांशत: एक ही शिशु जीवित रहता है। लगभग एक महीने के समय के बाद अंडे से शिशु बाहर निकलता है।
- इशाक मोहम्मद, नेचर गाइड, पक्षी विशेषज्ञ
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प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस की संख्या में बीते कई वर्षों में आई गिरावट ने वन्य जीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। इसके बाद सारस की निगरानी से लेकर इनके संरक्षण के लिए जिलेवार समिति बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति के प्रयास से बीते दो साल में प्रदेश में सारस की संख्या में इजाफा हुआ है।
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यहां मौजूद शेखा झील के पक्षी विहार में बीते कई वर्षों से सारस क्रेन के जोड़े प्रजनन करते चले आ रहे हैं। इस बार भी सारस के दो जोड़ों ने अंडे दिए थे। इसमें से एक घोंसले के दो अंडे शिकारी चील खा गई, जबकि दूसरे जोड़े द्वारा दिए गए दो अंडों में से एक नन्हे सारस ने झील में जन्म ले लिया है। 22 अगस्त की शाम अंडे से निकले नन्हे सारस को लेकर सारस का जोड़ा रात में ही घोंसले से निकल गया। झील पर तैनात पक्षी विशेषज्ञ और नेचर गाइड इशाक मोहम्मद ने बताया कि शिशु सारस की सुरक्षा के लिए सारस का जोड़ा इसे आसपास के धान के खेतों में लेकर रहता है, जिससे उसे सुरक्षित रखा जा सके।
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बता दें कि सारस क्रेन के प्रजनन का समय जून माह से शुरू हो जाता है और जुलाई-अगस्त माह में अंडों से बच्चे बाहर निकल आते हैं। अधिकांशत: दो अंडों में से एक अंडे का बच्चा ही जीवित निकलता है। पक्षी प्रेमी विराग शर्मा ने बताया कि शेखाझील का ईको सिस्टम बेहद सकारात्मक है। इस कारण प्रतिवर्ष सारस यहां आकर प्रजनन करते हैं।
- मादा सारस एक बार में औसतन दो अंडे देती है। इसमें अधिकांशत: एक ही शिशु जीवित रहता है। लगभग एक महीने के समय के बाद अंडे से शिशु बाहर निकलता है।
- इशाक मोहम्मद, नेचर गाइड, पक्षी विशेषज्ञ

मादा सारस के साथ झील में घूमता नन्हा सारस।- फोटो : HARDUAGANJ