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Jammu Accident: आह, आंसू और अफसोस में डूबा नाया गांव, दूसरे दिन भी नहीं जले चूल्हे, मातम और खामोशी
Sat, 01 Jun 2024 03:47 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 01 Jun 2024 03:47 PM IST
सार
जम्मू के अखनूर में तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस वीरवार को जम्मू-पुंछ हाईवे पर सड़क से फिसलकर 150 फीट गहरी खाई में खाई में गिर गई। इस भीषण हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 69 घायल हैं। बस में 90 से अधिक लोग सवार थे।
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Akhnoor Bus Accident
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
जम्मू में हुए बस हादसे में इगलास तहसील के गांव नाया के 12 लोगों की मौत के बाद युवाओं में गमगीन खामोशी है। गांव में आह, आंसू और अफसोस सब तरफ दिख रहा है। हर कोई गमजदा है। गांव में दो दिन से चूल्हे नहीं जल रहे हैं। बच्चों के लिए भी आस पड़ोस के गांव से खानेपीने का सामान भेजा जा रहा है।
पीड़ितों के रिश्तेदार और परिचित गांव में मृतक परिवारों के साथ हैं। वही उनकी देखभाल कर रहे हैं। लोगों का आना जाना लगा हुआ है। पीड़ित परिवारों की कुछ महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। भीषण गर्मी के कारण कुछ महिलाओं की तबीयत भी खराब हो रही है।
हादसे की खबर मिलने के बाद से कई महिलाओं ने शुक्रवार शाम तक कुछ नहीं खाया था, इसलिए उनकी हालत खराब होने लगी थी। छोटे बच्चे भी परेशान हैं। किशोरवय किसी तरह खुद को संभाल पा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्ति विभाग की टीम ने पीड़ित परिवारों तक खानेपीने का सामान पहुंचना शुरू कर दिया है, ताकि कोई बीमार न पड़े और गमगीन लोगों को कुछ सहारा दिया जा सके।
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बस हादसे के बाद गांव के दस से ज्यादा लोग जम्मू गए थे, जो अब वापस आ रहे हैं। गांव के सभी व्यक्तियों के सवाल एक जैसे हैं कि घटना कैसे हुई..? आखिर इतने लोगों की जान कैसे गई..? उन्हें क्यों नहीं बचाया जा सका..? सरकार इस हादसे के बाद पीड़ितों की क्या मदद कर रही है..? मृतकों के आश्रितों का गुजारा अब कैसे होगा..? गांव के बुजुर्ग भी इस हादसे के बाद सदमे में हैं। कुछ ने अपने दोस्तों तो कुछ ने पड़ोसी और रिश्तेदारों को खो दिया है। यह बुजुर्ग अब शवों के आने की बाट जोह रहे हैं ताकि आखिरी बार उन्हें फिर से देख सकें।
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पीड़ितों के रिश्तेदार और परिचित गांव में मृतक परिवारों के साथ हैं। वही उनकी देखभाल कर रहे हैं। लोगों का आना जाना लगा हुआ है। पीड़ित परिवारों की कुछ महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। भीषण गर्मी के कारण कुछ महिलाओं की तबीयत भी खराब हो रही है।
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हादसे की खबर मिलने के बाद से कई महिलाओं ने शुक्रवार शाम तक कुछ नहीं खाया था, इसलिए उनकी हालत खराब होने लगी थी। छोटे बच्चे भी परेशान हैं। किशोरवय किसी तरह खुद को संभाल पा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्ति विभाग की टीम ने पीड़ित परिवारों तक खानेपीने का सामान पहुंचना शुरू कर दिया है, ताकि कोई बीमार न पड़े और गमगीन लोगों को कुछ सहारा दिया जा सके।
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बस हादसे के बाद गांव के दस से ज्यादा लोग जम्मू गए थे, जो अब वापस आ रहे हैं। गांव के सभी व्यक्तियों के सवाल एक जैसे हैं कि घटना कैसे हुई..? आखिर इतने लोगों की जान कैसे गई..? उन्हें क्यों नहीं बचाया जा सका..? सरकार इस हादसे के बाद पीड़ितों की क्या मदद कर रही है..? मृतकों के आश्रितों का गुजारा अब कैसे होगा..? गांव के बुजुर्ग भी इस हादसे के बाद सदमे में हैं। कुछ ने अपने दोस्तों तो कुछ ने पड़ोसी और रिश्तेदारों को खो दिया है। यह बुजुर्ग अब शवों के आने की बाट जोह रहे हैं ताकि आखिरी बार उन्हें फिर से देख सकें।
मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी दे सरकार
इगलास। शुक्रवार शाम गांव के बाहर खड़े गगन चौधरी और उनके साथी युवा बोले कि केंद्र और प्रदेश सरकार मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का एलान करेगी, तभी अंतिम संस्कार किए जाएंगे। मृतकों के आश्रितों के पास अब जीवनयापन के साधन नहीं है, आखिर वह क्या करेंगे..? युवाओं में इन मौतों को लेकर रोष है।
इगलास। शुक्रवार शाम गांव के बाहर खड़े गगन चौधरी और उनके साथी युवा बोले कि केंद्र और प्रदेश सरकार मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का एलान करेगी, तभी अंतिम संस्कार किए जाएंगे। मृतकों के आश्रितों के पास अब जीवनयापन के साधन नहीं है, आखिर वह क्या करेंगे..? युवाओं में इन मौतों को लेकर रोष है।