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Aligarh News: बंदिश के बावजूद हुई महापंचायत, गरजे शेखावत
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महापंचायत में शामिल सवर्ण समाज के लोग। संवाद
प्रशासन की बंदिशों के बावजूद आईटीआई रोड स्थित एक निजी लॉज में मंगलवार को सवर्ण महापंचायत का आयोजन किया गया। करणी सेना के संस्थापक राजस्थान से आए डॉ. राज शेखावत ने फर्जी तरीके से दर्ज कराए जा रहे एससी-एसटी के मामलों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और इसके दुरुपयोग को रोकने की मांग की।
उन्होंने कहा कि विवादित यूजीसी कानून को पूरी तरह से वापस लिया जाए और आरक्षण के वर्तमान मापदंडों और व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। इससे पहले कार्यक्रम को निरस्त कराने के प्रशासनिक दबाव के बावजूद आयोजक जिद पर अड़े रहे और आखिरकार पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ही महापंचायत संपन्न हुई। दिल्ली हाईकोर्ट की अधिवक्ता गुंजन पाठक, सौरभ दुबे, स्वामी आनंद स्वरूप ने भी विचार रखे।
अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने महापंचायत से पहले कई आयोजकों को हिरासत में लिया और इस आंदोलन को कमजोर करने की पूरी कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि पूरी रात आयोजक मंडल को थाने में बैठाए रखा गया और शासन के आदेश पर कार्यक्रम स्थल को भी तहस-नहस किया गया। इसके बावजूद युवाओं के जोश के आगे प्रशासन की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुईं।
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शुक्रताल में बनेगी राष्ट्रीय आंदोलन की रूपरेखा
राकेश शर्मा ने बताया कि 21 और 22 सितंबर को मुजफ्फरनगर के शुक्रताल में देश के सभी प्रांतों के सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे। इसी बैठक में यूजीसी और एससी-एसटी कानून के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े और तेज आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
ये रहे मौजूद
महापंचायत का आयोजन संयोजक नितिन सक्सेना, गौरव सारस्वत, शांतनु गुप्ता और देवेंद्र शर्मा आदि द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्वामी आनंद स्वरूप, डॉ. राज शेखावत, युद्धि राणा, सौरभ दुबे और गुंजन पाठक आदि मौजूद रहे।
एक दिन पहले कहा-कार्यक्रम निरस्त कर दो : आयोजक
आयोजक नितिन सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को कार्यक्रम होना था। सोमवार की दोपहर को थाना बन्ना देवी में हमें बुलाया गया और कार्यक्रम निरस्त करने के लिए कहा गया। रात के तीन बजे तक पुलिस प्रशासन आयोजकों पर कार्यक्रम निरस्त करने के लिए दबाव डालता रहा। इसके बाद सहमति बनी कि आयोजक जिम्मेदारी लें कि कोई भी ऐसी बात नहीं होगी, जिससे शांति व्यवस्था या किसी वर्ग की भावनाएं आहत हों। आयोजकों ने यह भरोसा दिया। इसके बाद मंगलवार की सुबह आयोजन स्थल पुलिस तैनात थी और ताला बंद था। जब गेट पर ही आयोजक और कार्यक्रम में शामिल होने आए लोग बैठ गए तो इसके बाद लॉज का ताला खुलवा दिया गया और कार्यक्रम आयोजित हुआ।
अनुमति के लिए पत्र दिया गया था, लेकिन हमारी ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई थी। पहले से इस तरह के कार्यक्रम की कोई परंपरा भी नहीं थी।
- किंशुक श्रीवास्तव, एडीएम सिटी
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उन्होंने कहा कि विवादित यूजीसी कानून को पूरी तरह से वापस लिया जाए और आरक्षण के वर्तमान मापदंडों और व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। इससे पहले कार्यक्रम को निरस्त कराने के प्रशासनिक दबाव के बावजूद आयोजक जिद पर अड़े रहे और आखिरकार पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ही महापंचायत संपन्न हुई। दिल्ली हाईकोर्ट की अधिवक्ता गुंजन पाठक, सौरभ दुबे, स्वामी आनंद स्वरूप ने भी विचार रखे।
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अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने महापंचायत से पहले कई आयोजकों को हिरासत में लिया और इस आंदोलन को कमजोर करने की पूरी कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि पूरी रात आयोजक मंडल को थाने में बैठाए रखा गया और शासन के आदेश पर कार्यक्रम स्थल को भी तहस-नहस किया गया। इसके बावजूद युवाओं के जोश के आगे प्रशासन की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुईं।
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शुक्रताल में बनेगी राष्ट्रीय आंदोलन की रूपरेखा
राकेश शर्मा ने बताया कि 21 और 22 सितंबर को मुजफ्फरनगर के शुक्रताल में देश के सभी प्रांतों के सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे। इसी बैठक में यूजीसी और एससी-एसटी कानून के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े और तेज आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
ये रहे मौजूद
महापंचायत का आयोजन संयोजक नितिन सक्सेना, गौरव सारस्वत, शांतनु गुप्ता और देवेंद्र शर्मा आदि द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्वामी आनंद स्वरूप, डॉ. राज शेखावत, युद्धि राणा, सौरभ दुबे और गुंजन पाठक आदि मौजूद रहे।
एक दिन पहले कहा-कार्यक्रम निरस्त कर दो : आयोजक
आयोजक नितिन सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को कार्यक्रम होना था। सोमवार की दोपहर को थाना बन्ना देवी में हमें बुलाया गया और कार्यक्रम निरस्त करने के लिए कहा गया। रात के तीन बजे तक पुलिस प्रशासन आयोजकों पर कार्यक्रम निरस्त करने के लिए दबाव डालता रहा। इसके बाद सहमति बनी कि आयोजक जिम्मेदारी लें कि कोई भी ऐसी बात नहीं होगी, जिससे शांति व्यवस्था या किसी वर्ग की भावनाएं आहत हों। आयोजकों ने यह भरोसा दिया। इसके बाद मंगलवार की सुबह आयोजन स्थल पुलिस तैनात थी और ताला बंद था। जब गेट पर ही आयोजक और कार्यक्रम में शामिल होने आए लोग बैठ गए तो इसके बाद लॉज का ताला खुलवा दिया गया और कार्यक्रम आयोजित हुआ।
अनुमति के लिए पत्र दिया गया था, लेकिन हमारी ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई थी। पहले से इस तरह के कार्यक्रम की कोई परंपरा भी नहीं थी।
- किंशुक श्रीवास्तव, एडीएम सिटी