फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Corona warriors

कोरोना योद्धाः इनकी सेवा एवं त्याग को जमाने तक याद कर लोग बजाएंगे ताली

Tue, 19 May 2020 12:45 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 12:45 AM IST
विज्ञापन
Corona warriors
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

सफेद एप्रन वाली सिस्टर्स के त्याग एवं सेवा को लोग जमाने तक याद रखेंगे। कलेजे के टुकड़े को परिजनों के हवाले कर कोरोना जंग में यह अग्रिम पंक्ति की योद्धा की भूमिका निभा रही हैं। कोरोना वायरस से संक्रमित लोग जब घबराए हुए कोविड-19 हॉस्पिटल में पहुंचते हैं तो यही सिस्टर्स उनका संबल बनती हैं। इनकी भूमिका तो हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन महामारी में वह निखर कर सामने आई हैं। इनकी सेवा एवं त्याग इतिहास के पन्नों में दर्ज होंगे, जिसे लोग सदियों तक याद रखेंगे। हजार वर्ष बाद भी जब लोग कोरोना को याद करेंगे तो सिस्टर्स की भूमिका को याद कर ताली बजाएंगे।
अतरौली के 100 बेड कोविड-19 हॉस्पिटल में तैनात स्टाफ नर्स ज्योति सोलंकी 8 वर्ष की बेटी एवं 6 वर्ष के बेटा को उसके पापा एवं दादी के पास छोड़कर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही हैं। वह मूलरूप से बुलंदशहर जिले की डिबाई की रहने वाली हैं। वह नर्सिंग को भगवान का वरदान समझती है। भगवान की बार-बार शुक्रिया करती है कि वह उन्हें इस पेशे के लायक समझा। वह कहती है कि मरीजों की सेवा से जो सुख मिलता है, उसको शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन

अतरौली के कोविड-19 हॉस्पिटल में तैनात स्टाफ नर्स हेमा पीटर सिंह कहती हैं कि मरीजों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है। ऐसा लगता है जैसे जीवन सार्थक हो गया। कोरोना से संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटी हेमा का 9 वर्ष एवं 12 वर्ष का बेटा लखनऊ में अपनी बुआ के पास है। वह अपने पुत्रों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात कर लेती हैं। वह मूलरूप से आगरा की हैं। उनकी मम्मी और पापा दोनो नर्सिंग में थे। हेमा कहती हैं कि उन्हें गर्व होता है कि वह नर्सिंग के पेशे से हैं। पीड़ित मानवता की सेवा से बेहतर इस पृथ्वी पर कुछ भी नहीं है। आज मेरी जैसी अनगिनत बहनें दुनिया भर में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की सेवा में दिन रात जुटी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जेएन मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स सिस्टर शबा का कहना है कि एक नर्स के लिए हर मिनट और सेकेंड इम्तिहान होता है। आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर एवं सीसीयू का एक-एक पल महत्वपूर्ण एवं इम्तिहान है। कोरोना वायरस का मौजूदा दौर भी किसी इम्तिहान की घड़ी से कम नहीं है। यह हमलोगों के लिए अग्नि परीक्षा की तरह है। पूरा विश्वास है कि हमलोग कोरोना जंग जीतकर इस इम्तिहान में भी पास होंगे। सिस्टर शबा का कहना है कि मुझे एक नर्स होने पर गर्व होता है। देश एवं मानवती की सेवा कर खुशी मिलती है।

अतरौली के कोविड-19 में तैनात स्टाफ नर्स केएम प्रिया अपने डेढ़ साल के बेटे को घर छोड़कर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की सेवा कर रही है। वह मूलरूप से मैनपुरी की रहने वाली है। लॉकडाउन के समय से अपने बेटे एवं परिजनों से नहीं मिल पाई है। वह कहती है कि यह समय मानवता एवं देश की सेवा करने का है। बेटा एवं परिजनों से न मिल पाने का दुख तो है लेकिन खुशी इस बात की है कि संकट के समय में देश एवं पीड़ितों की सेवा कर रही हूं। वह कहती है कि दर्द से कराहते मरीजों के बीच रहना आसान काम नहीं है। कई बार तो मरीजों का दर्द देखकर मन दुखी हो जाता है। लेकिन उपचार के बाद जब मरीज मुस्कुराता है तो इतनी खुशी होती है, जिसको बयां नहीं कर सकती।

सिस्टर शबा ।

सिस्टर शबा ।- फोटो : CITY OFFICE

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed