अलीगढ़ हाईवे: यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, रातभर दौड़ती रहीं स्लीपर बसें, चेकपोस्ट पर नहीं हुई जांच
बृहस्पतिवार रात संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कानपुर से दिल्ली जाने वाले हाईवे पर बौनेर मोड़ से खेरेश्वर चौराहे तक पड़ताल की। इस दौरान एक भी स्लीपर बस की चेकिंग होती नहीं मिली।
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अलीगढ़ में हाईवे पर रात के समय पुलिस गश्त, चेकपोस्ट और बैरिकेडिंग के बावजूद स्लीपर बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों में है। बृहस्पतिवार रात संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने कानपुर से दिल्ली जाने वाले हाईवे पर बौनेर मोड़ से खेरेश्वर चौराहे तक पड़ताल की। इस दौरान एक भी स्लीपर बस की चेकिंग होती नहीं मिली।
हाईवे पर पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन बसों के भीतर यात्रियों की सुरक्षा जांच का कोई इंतजाम नजर नहीं आया। मैनपुरी से दिल्ली जा रही बस में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की यह तस्वीर चिंता बढ़ा रही है।
अकराबाद से गभाना-बुलंदशहर बॉर्डर तक करीब 50 किलोमीटर और टप्पल बॉर्डर तक करीब 70 किलोमीटर लंबा हाईवे जिले से होकर गुजरता है। इस मार्ग की सुरक्षा आठ थानों की पुलिस के पास है। पड़ताल के दौरान यूपी-112 की पांच गाड़ियां और तीन लैपर्ड बाइक गश्त करती मिलीं। बौनेर बाईपास और खेरेश्वर चौराहे पर बैरिकेडिंग मिली।
रोरावर थाने के पास एक चेक प्वाइंट पर पुलिसकर्मी कुर्सियों पर बैठकर टॉर्च से गुजरते वाहनों पर नजर रखते दिखे, लेकिन किसी स्लीपर बस को रोककर अंदर की स्थिति जांचते नहीं देखा गया। प्रशासन का दावा है कि बीते छह माह में आठ बसें और 48 घंटे में दो बसों को सीज किया है। इसके बावजूद मौके पर स्लीपर बसों की अंदरूनी सुरक्षा की पड़ताल होती नहीं दिखी।
बस के भीतर की सुरक्षा पर निगरानी नहीं
रात में लंबी दूरी की स्लीपर बसों में बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी होते हैं। ऐसे में केवल वाहन को बाहर से देख लेना या कागजात की जांच करना पर्याप्त नहीं है। चालक-परिचालक का सत्यापन, बस के भीतर की स्थिति, यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन इंतजामों की जांच भी जरूरी है। सोमवार रात की पड़ताल में इन पहलुओं की जांच होती नहीं दिखी।
पैनिक बटन और सीसीटीवी भी जांच के दायरे में नहीं
बसों में पैनिक बटन और सीसीटीवी लगाने के निर्देश हैं। चालक और परिचालक के सत्यापन का भी प्रावधान है। ऐसे में रात की चेकिंग में यह देखना भी जरूरी है कि सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं या नहीं और जरूरत पड़ने पर काम भी करेंगे या नहीं। मैनपुरी की घटना के बाद स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच को लेकर यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है।
समय-समय पर होती है जांच : आरटीओ
आरटीओ प्रशासन दीपक कुमार शाह ने बताया कि हाईवे से गुजरने वाली स्लीपर क्लास और निजी बसों की चेकिंग दस्तों द्वारा समय-समय पर की जाती है। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई भी होती है। मैनपुरी की घटना को देखते हुए अब चेकिंग को और प्रभावी बनाया जाएगा।
हाईवे सुरक्षा प्राथमिकता में : एसएसपी
एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने बताया कि पूरा हाईवे पुलिस की सुरक्षा प्राथमिकता में है। टोल पर पुलिस पीवीआर के साथ सीसीटीवी और अन्य निगरानी व्यवस्था है। रात में पेट्रोलिंग होती है। बस संचालकों को पैनिक बटन समेत अन्य सुरक्षा इंतजाम रखने के निर्देश हैं। चालक और परिचालकों के सत्यापन का भी प्रावधान है।
पड़ताल
- 70 किमी तक हाईवे का हिस्सा
- 8 थाने सुरक्षा व्यवस्था के जिम्मे
- 5 यूपी-112 गाड़ियां गश्त करती मिलीं
- 3 लैपर्ड बाइक गश्त करती मिलीं
- 2 जगह बैरिकेडिंग मिली
- 1 चेक प्वाइंट पर पुलिस मिली
- 0 स्लीपर बस की चेकिंग होती मिली