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UP: टमाटर की कई एकड़ खड़ी फसल पर चलवाया ट्रैक्टर, इस बात से खफा हैं एटा के ये युवा किसान

Sun, 28 May 2023 02:52 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 28 May 2023 02:52 PM IST
सार

टमाटर की फसल करने वाले किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर चलवाकर खड़ी फसल का जुतवा दिया। किसानों का कहना है कि ऐसी फसल से क्या फायदा जिससे कमाई तो दूर उनकी लागत भी न निकल सके। 
 

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young farmers of Etah are upset over tractor being driven on several acres of standing tomato crop
टमाटर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में किसानों ने जो किया, जानकर हैरान रह जाएंगे। जिस फसल को खून पसीना बहाकर उगाया उसी के तैयार होने  पर ट्रैक्टर से जुतवा दिया गया। दरअसल किसान इस बात से नाराज हैं कि फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इस कारण लागत भी नहीं निकल रही और किसान फसल को खेतों में नष्ट करने को मजबूर हो गए हैं। खड़ी फसल को खेत में ही जुतवा रहे हैं।
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इस समय 28 किलो टमाटर की एक क्रेट की कीमत 50 से लेकर 80 रुपये मिल रही है। टमाटर व्यापारियों ने बताया कि मारहरा क्षेत्र का टमाटर दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों के साथ नेपाल भी जाता था। इस बार टमाटर की क्वालिटी बेहतर न होने के कारण बाहर नहीं भेजा जा रहा है। इसके चलते मंदी आ गई है। टमाटर की सही कीमत न मिलने का एक कारण यह भी है कि किसान खेत पर ही टमाटर को बेचना पसंद करता है। वह अपनी फसल को जनपद की मंडी में बेचने नहीं जाते हैं। यही कारण है कि किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। फसल में लगाई गई लागत भी नहीं निकल पा रही है। क्षेत्र में करीब 300 एकड़ में फसल की गई है।
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भाड़ा 100, कीमत 80, लागत में भी नुकसान

किसानों ने बताया कि बीते बर्ष टमाटर की क्रेट का भाव एक हजार से 1100 के करीब रहा था, लेकिन इस बार सिर्फ 80 रुपये में क्रेट बिक रही है। इसमें भाड़ा तक नहीं निकल रहा है। कानपुर-दिल्ली जाने वाले टमाटर की क्रेट का भाड़ा 100 से 120 रुपये तक आता है।

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लागत 15 हजार प्रति बीघा, कमाई मिलती थी एक लाख तक

अगर टमाटर की फसल की पैदावार की बात करें तो एक बीघा खेत में करीब 150 से 200 क्रेट तक निकल आती है। 500 रुपये से 1000 तक बिकने पर करीब 80 हजार से एक लाख तक आय मिल जाती थी। लेकिन इस बार किसानों पर बर्बादी छा गई है।

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ये बोले किसान

किसान वासुदेव ने बताया कि टमाटर सस्ता होने के कारण फसल तोड़ नहीं रहे। लगभग 8 बीघा टमाटर की खेती खड़ी हुई है। टमाटर को जानवरों को खिलाना पड़ रहा है। वहीं चरण सिंह का कहना है कि टमाटर के बिक्री भाव 4 रुपये किलो हैं। जिससे लागत भी नहीं निकल पा रही है। इसलिए खेतों में ही फसल की जुताई कराकर नष्ट कर रहे हैं। जिससे अन्य फसल की तैयारी कर सकें।

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व्यापारियों को भी नुकसान

व्यापारी मनीराम ने बताया कि  इस बार टमाटर के भाव न मिलने से किसान के साथ व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। किसान फसल की तोड़ाई तक नहीं करा रहा है। जिसने तोड़ लिए उसने सड़कों पर फेंक दिया है। वहीं धर्मेंन्द्र ने बताया कि टमाटर की फसल के समय मोहनपुरा मंडी से प्रतिदिन दर्जनों गाड़ी कानपुर, दिल्ली, पंजाब के लिए जाती थीं। भाव गिरने के बाद किसान खेतों ही फसल को नष्ट करा रहा है, जिससे मंडी में सुनसान बनी हुई है।
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