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लापरवाही: खुले गड्ढों में गिरकर हो चुकी हैं तीन मौतें, जानलेवा गड्ढों की नहीं होती निगरानी
Tue, 15 Jun 2021 02:42 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 15 Jun 2021 02:42 PM IST
सार
शहर की सड़कों से लेकर गली-मुहल्लों व कॉलोनियों में बिजली, पानी, सीवर और बोरिंग के गड्ढे खुले पड़े हैं। हादसों के बाद अफसर जांच और कार्रवाई के दावे करते हैं, लेकिन हकीकत में इनकी कोई निगरानी नहीं होती।
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आगरा: शहर में खुला 'मौत का' गड्ढा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
खुले गड्ढों में गिरकर पांच साल में तीन मौतें हो चुकी हैं। फिर भी शहर की सड़कों से लेकर गली-मुहल्लों व कॉलोनियों में बिजली, पानी, सीवर और बोरिंग के गड्ढे खुले पड़े हैं। हादसों के बाद अफसर जांच और कार्रवाई के दावे करते हैं, लेकिन हकीकत में इनकी कोई निगरानी नहीं होती।
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30 दिसंबर 2015 की रात बोदला-बिचपुरी रोड पर जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा खोदेगड्ढे में गिरने से सेक्टर-सात निवासी वासुदेव यादव की मौत हो गई थी। वे जूता फैक्टरी से काम खत्म कर घर लौट रहे थे। रास्ते में अंधेरा था। सड़क पर खुला पड़ा उन्हें नहीं दिखा। गड्ढे के चारों ओर कोई बैरिकेडिंग भी नहीं की गई थी। इस मामले में इंजीनियर व ठेकेदार के विरुद्ध थाना जगदीशपुरा में तब मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में जांच दाखिल दफ्तर हो गई।
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इसके दूसरे दिन 31 जनवरी को यहां गड्ढे मे गिरने से पथौली निवासी गौरव के सिर में फ्रैक्चर होने से मृत्यु हो गई। फरवरी 2017 में देवरी रोड पर सड़क किनारे खुले पड़े सीवर मैनहोल में मोनू की मौत हुई थी। मोनू अपनी बहन की शादी के कार्ड बांटने जा रहा था। पिछले पांच साल में खुले पड़े सरकारी गड्ढे, मैनहोल व बोरवेल में गिरकर तीन लोगों की मौत हो चुकी हैं। मौतों के बाद जांच बंद हो गईं। अक्सर हादसों के बाद अफसर कार्रवाई व जांच की खानापूरी करते हैं, लेकिन पिछले छह साल मे कोई निगरानी तंत्र विकसित नहीं हो सका है।
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कराई जाएगी निगरानी
बोरवेल हादसे दोबारा नहीं हो इसके लिए खुले गड्ढों की निगरानी तय की जाएगी। बिना अनुमति बोरिंग खोदाई नहीं होगी। गड्ढे खुले छोड़ने पर ठेकेदार पर कार्रवाई होगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
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