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Agra News: पैर के रास्ते बिना चीर-फाड़ दिमाग की उलझी नसों को किया अलग
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एसएन मेडिकल कॉलेज में सर्जरी करने वाली टीम।
आगरा। सरोजिनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर 19 वर्षीय युवक को नया जीवन दिया है। न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने पैर के रास्ते एक अति सूक्ष्म छिद्र बनाकर दिमाग में उलझी नसों के गुच्छे को बिना किसी चीर-फाड़ के अलग किया। निजी अस्पतालों में 10 लाख रुपये से अधिक खर्च वाला यह ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त हुआ है।
न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि एटा निवासी रवि कुमार (19) को गंभीर दौरे पड़ने के कारण अस्पताल लाया गया था। जांच में पाया गया कि दिमाग की नसें आपस में उलझी (आर्टेरियोवेनस मालफॉर्मेशन) हुई थीं। इससे रक्त संचार बाधित हो रहा था और दिमाग का एक हिस्सा कमजोर पड़ गया था।
न्यूरोसर्जन डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती दवाइयों के बाद एवीएम तकनीक से सर्जरी की गई। दिल की एंजियोप्लास्टी की तरह पैर की नस के जरिये तार डालकर दिमाग तक पहुंचाया गया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद नसों के गुच्छे को सुरक्षित अलग कर दिया गया। इस आधुनिक मिनिमल इनवेसिव तकनीक से मरीज के सिर में कोई चीरा नहीं लगाना पड़ा।
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इस जटिल ऑपरेशन में नोएडा के विशेषज्ञ डॉ. अंशुल जैन और न्यूरोसर्जन डॉ. तरुणेश शर्मा का विशेष सहयोग रहा। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मरीज को पूरी तरह ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। सर्जिकल टीम में डॉ. राहुल सिंह, डॉ. मोहित मंगला और एनेस्थीसिया टीम से डॉ. अर्चना अग्रवाल और डॉ. लवप्रिया शर्मा की मौजूदगी रही।
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न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि एटा निवासी रवि कुमार (19) को गंभीर दौरे पड़ने के कारण अस्पताल लाया गया था। जांच में पाया गया कि दिमाग की नसें आपस में उलझी (आर्टेरियोवेनस मालफॉर्मेशन) हुई थीं। इससे रक्त संचार बाधित हो रहा था और दिमाग का एक हिस्सा कमजोर पड़ गया था।
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न्यूरोसर्जन डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती दवाइयों के बाद एवीएम तकनीक से सर्जरी की गई। दिल की एंजियोप्लास्टी की तरह पैर की नस के जरिये तार डालकर दिमाग तक पहुंचाया गया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद नसों के गुच्छे को सुरक्षित अलग कर दिया गया। इस आधुनिक मिनिमल इनवेसिव तकनीक से मरीज के सिर में कोई चीरा नहीं लगाना पड़ा।
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इस जटिल ऑपरेशन में नोएडा के विशेषज्ञ डॉ. अंशुल जैन और न्यूरोसर्जन डॉ. तरुणेश शर्मा का विशेष सहयोग रहा। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मरीज को पूरी तरह ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। सर्जिकल टीम में डॉ. राहुल सिंह, डॉ. मोहित मंगला और एनेस्थीसिया टीम से डॉ. अर्चना अग्रवाल और डॉ. लवप्रिया शर्मा की मौजूदगी रही।