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तीन साल से नहीं किए जलभराव से निपटने के उपाय
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आगरा। बारिश के बाद शहर की सड़कें नदियां बन रही हैं तो गलियां, मोहल्ले तालाब जैसे दिख रहे हैं। ऐसी तस्वीरें देखने के बाद भी नगर निगम ने तीन साल से जलभराव से निपटने के स्थायी उपाय नहीं किए हैं। जिन जगहों पर स्थायी रूप से जलभराव हो रहा है, उनके निदान के उपाय अपनाए ही नहीं गए। ख्वासपुरा, उखर्रा, बाईंपुर समेत शहर में 16 ऐसी जगहें हैं, जहां बारिश में हर बार पानी भरता है। नगर निगम पंपसेट से पानी निकलवाने के नाम पर करोड़ों रुपये का डीजल खर्च कर रहा है, लेकिन निदान के स्थायी उपाय (नाला निर्माण) नहीं कर रहा।
उखर्रा में नाला बना न पंपसेट लगे
27 जुलाई 2018 को भारी बारिश के बाद उखर्रा में जलभराव के कारण 150 से ज्यादा लोग अपने घरों में फंस गए, जिन्हें पीएसी के जवानों ने नाव चलाकर निकाला था। यहां 8 से 10 फुट तक पानी भर गया था। तब से अब तक तीन सालों के दौरान उखर्रा में दोबारा ऐसे हालात न बनें, इसके लिए कोई कार्य योजना नगर निगम ने बनाई ही नहीं। उखर्रा में हाल की बारिश के दौरान भी तीन से चार फीट तक पानी गलियों में भर गया। नाला न होने के कारण पानी निकलने का कोई जरिया नहीं।
तीन साल से प्रस्ताव लेकर घूम रहे
तीन साल से नाले का प्रस्ताव लेकर नगर निगम में घूम रहे हैं, पर न मेयर सुन रहे, न नगर आयुक्त। उखर्रा में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए थे, लेकिन अधिकारी यहां एक बार हादसे के बाद भी जलभराव के निदान की योजना स्वीकृत नहीं कर रहे। - ऊषा इंदौलिया, पार्षद, उखर्रा
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बाईंपुर में गंदे पानी के बीच से निकल रहे लोग
अकबर के मकबरे, सिकंदरा की दीवार से सटे बाईंपुर में 8 कालोनियों के रास्ते पर जलभराव है। तीन साल से क्षेत्र के लोग नगर निगम में गुहार लगा रहे हैं। 48 लाख रुपये का प्रस्ताव भी बन गया, लेकिन स्वीकृत नहीं किए। सुंदरवन कॉलोनी, बाईंपुर के कृष्ण गोपाल पार्षद से लेकर नगर आयुक्त तक जा चुके। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल एक बार अकेले और दूसरी बार नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे के साथ दौरा कर हालात देख चुके, पर न नाला निर्माण हुआ और न ही जलभराव की समस्या दूर हुई।
यह कैसी स्मार्ट सिटी
तीन साल से भटक रहे हैं ताकि नाला बन जाए और जलभराव की समस्या दूर हो जाए। यह कैसी स्मार्ट सिटी है, जहां जलभराव के लिए एक नाला तक नहीं बन रहा। हर दिन गंदे पानी से निकलकर बच्चों, महिलाओं को जाना पड़ता है। - कृष्ण गोपाल, बाईंपुर
ख्वासपुरा में कब्रों से बाहर निकले शव
नगर निगम की लापरवाही से जिंदा लोग ही नहीं, बल्कि मरने के बाद शवों की भी बेकदरी हो रही है। वार्ड 60 ख्वासपुरा वार्ड में बारिश का पानी निकलने की जगह नहीं। ऐसे में तालाब में पानी पहुंचने के बाद इसे पंप के जरिए बाहर नालियों तक फेंका जाता है, पर हर तरफ जलभराव के कारण पानी निकलने ही जगह नहीं रहती। ख्वासपुरा कब्रिस्तान में पानी भर जाने से 6 माह पहले दफनाए गए शव इस बार बाहर निकल आए, जिन्हें दोबारा दफनाया गया।
आठ माह से प्रस्ताव लंबित
आठ माह पहले नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखा था, जिस पर नगर आयुक्त ने काम शुरू कराने का सदन में वादा किया था, लेकिन अब जलनिगम और नगर निगम के बीच प्रस्ताव झूल रहा है। लोग परेशान हैं। कब्रिस्तान में जलभराव से मुर्दे बाहर आ गए। - जरीना बेगम, पार्षद, ख्वासपुरा
पैसे की कमी, कोई और हल निकालेंगे
मैने तीन साल में बड़े पैमाने पर नालों का निर्माण कराया है। 14वें वित्त आयोग की धनराशि से कई नालों की मरम्मत और नए नाले बनवाए, लेकिन 15वें वित्त आयोग की धनराशि में नाला निर्माण नहीं किया जा सकता। इससे पैसे की कमी हो गई है। ख्वासपुरा, उखर्रा जैसे कई प्वाइंट पर स्थायी निदान के लिए कुछ और हल निकालेंगे। - नवीन जैन, मेयर
सेवला में 14 दिन से फंसी मशीन
सेवला क्षेत्र में तालाब में सफाई के लिए भेजी गई पोकलेन मशीन 21 जुलाई से फंसी हुई है। 14 दिन से फंसी मशीन को बाहर निकालने की सुध न मेंटेनेंस एंड ट्रांसपोर्ट (एमएंडटी) वर्कशॉप प्रभारी को है और न नगर स्वास्थ्य अधिकारी को। क्षेत्रीय निवासी आशीष कुमार के मुताबिक नगर निगम की लाखों की मशीन पानी में खराब हो रही है। इन 14 दिनों में यह मशीन क्षेत्र में काफी सिल्ट और तालाब की सफाई कर सकती थी, लेकिन लापरवाही के कारण सब काम रुका हुआ है।
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उखर्रा में नाला बना न पंपसेट लगे
27 जुलाई 2018 को भारी बारिश के बाद उखर्रा में जलभराव के कारण 150 से ज्यादा लोग अपने घरों में फंस गए, जिन्हें पीएसी के जवानों ने नाव चलाकर निकाला था। यहां 8 से 10 फुट तक पानी भर गया था। तब से अब तक तीन सालों के दौरान उखर्रा में दोबारा ऐसे हालात न बनें, इसके लिए कोई कार्य योजना नगर निगम ने बनाई ही नहीं। उखर्रा में हाल की बारिश के दौरान भी तीन से चार फीट तक पानी गलियों में भर गया। नाला न होने के कारण पानी निकलने का कोई जरिया नहीं।
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तीन साल से प्रस्ताव लेकर घूम रहे
तीन साल से नाले का प्रस्ताव लेकर नगर निगम में घूम रहे हैं, पर न मेयर सुन रहे, न नगर आयुक्त। उखर्रा में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आए थे, लेकिन अधिकारी यहां एक बार हादसे के बाद भी जलभराव के निदान की योजना स्वीकृत नहीं कर रहे। - ऊषा इंदौलिया, पार्षद, उखर्रा
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बाईंपुर में गंदे पानी के बीच से निकल रहे लोग
अकबर के मकबरे, सिकंदरा की दीवार से सटे बाईंपुर में 8 कालोनियों के रास्ते पर जलभराव है। तीन साल से क्षेत्र के लोग नगर निगम में गुहार लगा रहे हैं। 48 लाख रुपये का प्रस्ताव भी बन गया, लेकिन स्वीकृत नहीं किए। सुंदरवन कॉलोनी, बाईंपुर के कृष्ण गोपाल पार्षद से लेकर नगर आयुक्त तक जा चुके। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल एक बार अकेले और दूसरी बार नगर आयुक्त निखिल टी फुंडे के साथ दौरा कर हालात देख चुके, पर न नाला निर्माण हुआ और न ही जलभराव की समस्या दूर हुई।
यह कैसी स्मार्ट सिटी
तीन साल से भटक रहे हैं ताकि नाला बन जाए और जलभराव की समस्या दूर हो जाए। यह कैसी स्मार्ट सिटी है, जहां जलभराव के लिए एक नाला तक नहीं बन रहा। हर दिन गंदे पानी से निकलकर बच्चों, महिलाओं को जाना पड़ता है। - कृष्ण गोपाल, बाईंपुर
ख्वासपुरा में कब्रों से बाहर निकले शव
नगर निगम की लापरवाही से जिंदा लोग ही नहीं, बल्कि मरने के बाद शवों की भी बेकदरी हो रही है। वार्ड 60 ख्वासपुरा वार्ड में बारिश का पानी निकलने की जगह नहीं। ऐसे में तालाब में पानी पहुंचने के बाद इसे पंप के जरिए बाहर नालियों तक फेंका जाता है, पर हर तरफ जलभराव के कारण पानी निकलने ही जगह नहीं रहती। ख्वासपुरा कब्रिस्तान में पानी भर जाने से 6 माह पहले दफनाए गए शव इस बार बाहर निकल आए, जिन्हें दोबारा दफनाया गया।
आठ माह से प्रस्ताव लंबित
आठ माह पहले नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखा था, जिस पर नगर आयुक्त ने काम शुरू कराने का सदन में वादा किया था, लेकिन अब जलनिगम और नगर निगम के बीच प्रस्ताव झूल रहा है। लोग परेशान हैं। कब्रिस्तान में जलभराव से मुर्दे बाहर आ गए। - जरीना बेगम, पार्षद, ख्वासपुरा
पैसे की कमी, कोई और हल निकालेंगे
मैने तीन साल में बड़े पैमाने पर नालों का निर्माण कराया है। 14वें वित्त आयोग की धनराशि से कई नालों की मरम्मत और नए नाले बनवाए, लेकिन 15वें वित्त आयोग की धनराशि में नाला निर्माण नहीं किया जा सकता। इससे पैसे की कमी हो गई है। ख्वासपुरा, उखर्रा जैसे कई प्वाइंट पर स्थायी निदान के लिए कुछ और हल निकालेंगे। - नवीन जैन, मेयर
सेवला में 14 दिन से फंसी मशीन
सेवला क्षेत्र में तालाब में सफाई के लिए भेजी गई पोकलेन मशीन 21 जुलाई से फंसी हुई है। 14 दिन से फंसी मशीन को बाहर निकालने की सुध न मेंटेनेंस एंड ट्रांसपोर्ट (एमएंडटी) वर्कशॉप प्रभारी को है और न नगर स्वास्थ्य अधिकारी को। क्षेत्रीय निवासी आशीष कुमार के मुताबिक नगर निगम की लाखों की मशीन पानी में खराब हो रही है। इन 14 दिनों में यह मशीन क्षेत्र में काफी सिल्ट और तालाब की सफाई कर सकती थी, लेकिन लापरवाही के कारण सब काम रुका हुआ है।