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जबलपुर: फायरिंग व मारपीट मामले में जेल में बंद धीरेंद्र शास्त्री के भाई को जमानत, जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला
Wed, 16 Sep 2026 01:14 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 01:14 PM IST
सार
फायरिंग और मारपीट के मामले में जेल में बंद धीरेंद्र शास्त्री के भाई को जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के बाद जमानत मंजूर करने का फैसला सुनाया।
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धीरेन्द्र शास्त्री के भाई को मिली हाईकोर्ट से जमानत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फायरिंग और मारपीट के आरोप में जेल में बंद बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम शास्त्री उर्फ 'छोटे सरकार' को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने उन्हें जमानत दे दी है।
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छतरपुर जिले के थाना गढ़ा थाना क्षेत्र में बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम शास्त्री उर्फ 'छोटे सरकार' के खिलाफ गाली-गलौज, लाठी से मारपीट और गोली चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में नियमित जमानत के लिए उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिका में तर्क दिया गया कि राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के कारण उन्हें झूठा फंसाया गया है। याचिकाकर्ता एक प्रसिद्ध संत के भाई हैं और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने की नीयत से यह कार्रवाई की गई है।
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याचिका में यह भी कहा गया कि आपसी दुश्मनी के कारण शिकायतकर्ता और ग्रामीणों ने उन पर हमला किया था, जिसकी शिकायत कराने वे थाने गए थे लेकिन पुलिस ने उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की और उल्टा उनके खिलाफ ही प्रकरण दर्ज कर लिया। इसके बाद से 15 जुलाई से वे न्यायिक हिरासत में हैं।
दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया गया। शासकीय अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आवेदक ने शिकायतकर्ता मोतीलाल कुशवाहा को रोककर गाली-गलौज की और सह-आरोपियों को लाठी से हमला करने के लिए उकसाया। इसके अलावा उन पर शिकायतकर्ता के पेट में गोली मारने का गंभीर आरोप है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद एकल पीठ ने 10 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए शालिग्राम शास्त्री को राहत प्रदान कर जमानत दे दी।
