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UP: वेयर हाउस में भरा पड़ा खाद, समितियों से खाली हाथ लौट रहे किसान; बाजरा- मक्का बुआई की चल रही तैयारी
Sat, 11 Jul 2026 01:45 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 11 Jul 2026 01:45 PM IST
सार
आगरा में वेयरहाउस में हजारों टन डीएपी खाद उपलब्ध होने के बावजूद किसान सहकारी समितियों से खाली हाथ लौट रहे हैं। धान, बाजरा और सब्जियों की खेती के बीच खाद की कमी से किसान चिंतित हैं।
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डीएपी खाद।
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विस्तार
खेतों में धान की पौध रोपी जा रही है। बाजरा- मक्का बुआई की तैयारी चल रही है। किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं पहुंची है, जबकि वेयर हाउस में डीएपी बड़ी मात्रा में भंडारित है।
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जिले में 16 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। वहीं 1.5 लाख हेक्टेयर से अधिक बाजरा की खेती की जाती है। बड़ी मात्रा किसान खरीफ की मक्का और सब्जियों की फसल भी करते हैं। इस समय खेतों में धान की पौध रोपाई चल रही है। किसानों को डीएपी की जरूरत है। लेकिन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं है। उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जबकि वेयर हाउस में 8225 टन डीएपी का भंडार है। समितियाें और दुकानों पर मात्र 2742 टन भेजी गई है।
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जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जिले में डीएपी की कोई कमी नहीं है। 10967 टन डीएपी की उपलब्धता है। इसमें से वेयर हाउस में 8225 टन डीएपी उपलब्ध है। वहीं प्राइवेट दुकान और सहकारी समितियों पर डीएपी 2742 टन की उपलब्धता है। धान के खेती के लिए औसतन बासमती के लिए 60 किलो प्रति हेक्टेयर और अन्य किस्मों के लिए 40 किलो प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है।
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एआर सहकारिता सतीश कुमार का कहना है कि जिन समितियों से मांग भेजी जा रही है। उन पर डीएपी भेजने की तैयारी चल रही है। एक सप्ताह में सभी समितियों पर खाद उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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किसान लाखन सिंह त्यागी ने बताया कि खेत में धान रोपाई चल रही है। सहकारी समिति शेखपुरा पर खाद नहीं है। बिना खाद के पौध लगानी पड़ रही है। इससे पैदावार में कमी आ सकती है।
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किसान गजेंद्र लोधी का कहना है कि एक एकड़ में सब्जियों की फसल लगी है। सहकारी समिति बस्तई से डीएपी नहीं मिल रही है। बिना खाद के सब्जियों का उत्पादन कम हो रहा है।
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जिले में 16 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। वहीं 1.5 लाख हेक्टेयर से अधिक बाजरा की खेती की जाती है। बड़ी मात्रा किसान खरीफ की मक्का और सब्जियों की फसल भी करते हैं। इस समय खेतों में धान की पौध रोपाई चल रही है। किसानों को डीएपी की जरूरत है। लेकिन सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं है। उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जबकि वेयर हाउस में 8225 टन डीएपी का भंडार है। समितियाें और दुकानों पर मात्र 2742 टन भेजी गई है।
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किसान गजेंद्र लोधी का कहना है कि एक एकड़ में सब्जियों की फसल लगी है। सहकारी समिति बस्तई से डीएपी नहीं मिल रही है। बिना खाद के सब्जियों का उत्पादन कम हो रहा है।
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