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सावधान ! ओएलएक्स पर साइबर अपराधियों ने बिछा रखा है जाल, ऐसे बनाते हैं ठगी का शिकार
Sun, 01 Mar 2020 01:23 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 01 Mar 2020 01:23 PM IST
सार
आगरा में ओएलएक्स पर बाइक का विज्ञापन देकर एक युवक से खाते में 85 हजार रुपये जमा करा लिए गए। इसके बाद मोबाइल बंद कर दिया। छह महीने में इस तरह के 30 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
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साइबर क्राइम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओएलएक्स पर भी साइबर अपराधियों ने ठगी करने के लिए जाल फैला रखा है। कभी विज्ञापन देने वालों से रकम भेजने के नाम पर ठगी कर रहे हैं तो कभी विज्ञापन देकर लोगों से रकम ट्रांसफर करा रहे हैं। पीड़ित लोग पुलिस के पास शिकायत लेकर आ रहे हैं।
आगरा में छह महीने में 30 से अधिक शिकायत पुलिस के पास पहुंच चुकी हैं। साइबर सेल जांच कर रही है। हालांकि पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पा रही है। एक मामले में बाइक का विज्ञापन देकर खाते में 85 हजार रुपये जमा करवा लिए।
अवधपुरी निवासी करन उपाध्याय छात्र है। उसने कुछ महीने पहले ओएलएक्स पर बुलेट बाइक का विज्ञापन देखा था। इस पर लिखे मोबाइल नंबर पर कॉल किया। विज्ञापन देने वाले ने 45 हजार रुपये में बुलट बेचने का आश्वासन दिया। इस पर करन मान गया।
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इसके बाद करन से एडवांस में रकम पेटीएम से जमा करने के लिए बोला गया। करन ने पांच हजार रुपये जमा कर दिए। रकम न आने का झांसा देकर आठ बार में 85 हजार रुपये जमा करा लिए गए। इसके बाद मोबाइल बंद कर लिया।
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आगरा में छह महीने में 30 से अधिक शिकायत पुलिस के पास पहुंच चुकी हैं। साइबर सेल जांच कर रही है। हालांकि पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पा रही है। एक मामले में बाइक का विज्ञापन देकर खाते में 85 हजार रुपये जमा करवा लिए।
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अवधपुरी निवासी करन उपाध्याय छात्र है। उसने कुछ महीने पहले ओएलएक्स पर बुलेट बाइक का विज्ञापन देखा था। इस पर लिखे मोबाइल नंबर पर कॉल किया। विज्ञापन देने वाले ने 45 हजार रुपये में बुलट बेचने का आश्वासन दिया। इस पर करन मान गया।
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इसके बाद करन से एडवांस में रकम पेटीएम से जमा करने के लिए बोला गया। करन ने पांच हजार रुपये जमा कर दिए। रकम न आने का झांसा देकर आठ बार में 85 हजार रुपये जमा करा लिए गए। इसके बाद मोबाइल बंद कर लिया।
रकम भेजने का झांसा देकर ट्रांसफर कराए आठ हजार
बिचपुरी रोड निवासी विशाल रावत ने तीन महीने पहले अपना एसी बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन दिया था। 25 हजार रुपये कीमत तय की। शनिवार सुबह विशाल के पास एक फोन आया।
फोन करने वाले ने खुद को सैन्य कर्मी बताया। कहा कि परिवार आगरा में रहता है। वो एसी खरीदने के लिए बेटे को भेज देगा। पांच हजार रुपये एडवांस में देगा। बाकी बाद में। विशाल से फोन पे से रकम ट्रांसफर करने को कहा। उससे नंबर ले लिया।
विशाल के पास दो रुपये का मैसेज आया। इस पर विशाल ने मैसेज पर क्लिक कर दिया। इससे उसके खाते में दो रुपये आ गए। इसके बाद पांच हजार रुपये भेजने के बजाए, रुपये ट्रांसफर करा लिए। जब विशाल ने विरोध किया तो रकम वापस करने के नाम पर भी 10 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए।
फोन करने वाले ने खुद को सैन्य कर्मी बताया। कहा कि परिवार आगरा में रहता है। वो एसी खरीदने के लिए बेटे को भेज देगा। पांच हजार रुपये एडवांस में देगा। बाकी बाद में। विशाल से फोन पे से रकम ट्रांसफर करने को कहा। उससे नंबर ले लिया।
विशाल के पास दो रुपये का मैसेज आया। इस पर विशाल ने मैसेज पर क्लिक कर दिया। इससे उसके खाते में दो रुपये आ गए। इसके बाद पांच हजार रुपये भेजने के बजाए, रुपये ट्रांसफर करा लिए। जब विशाल ने विरोध किया तो रकम वापस करने के नाम पर भी 10 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए।
ऐसे किसी भी लिंक पर क्लिक न करें
साइबर सेल के एक्सपर्ट के मुताबिक, ओएलएक्स या अन्य जगह पर खरीदारी या सामान बेचते समय रिक्वेस्ट मनी के लिंक का इस्तेमाल नहीं करें। रुपये प्राप्त करने के लिए किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना होता है। न ही पे के बटन को दबाएं।
फर्जी एनईएफटी/आरटीजीएस पर भरोसा न करें। भुगतान प्राप्त होने पर ही सामान की डिलीवरी करें। गूगल पर सर्च किए गए कस्टमर केयर नंबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साइबर अपराधियों ने गूगल पर फर्जी नंबर डाल रखे हैं। कॉल करने पर ठगी कर लेते हैं।
किसी भी समस्या होने पर बैंक, ई वालेट या अन्य की असली वेबसाइट पर जाकर ही कस्टमर केयर नंबर और ईमेल का इस्तेमाल करें। अपने खाते और कार्ड की जानकारी किसी अंजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए।
फर्जी एनईएफटी/आरटीजीएस पर भरोसा न करें। भुगतान प्राप्त होने पर ही सामान की डिलीवरी करें। गूगल पर सर्च किए गए कस्टमर केयर नंबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साइबर अपराधियों ने गूगल पर फर्जी नंबर डाल रखे हैं। कॉल करने पर ठगी कर लेते हैं।
किसी भी समस्या होने पर बैंक, ई वालेट या अन्य की असली वेबसाइट पर जाकर ही कस्टमर केयर नंबर और ईमेल का इस्तेमाल करें। अपने खाते और कार्ड की जानकारी किसी अंजान व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए।