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नेहरू नगर में सांप्रदायिक तनाव
नेहरू नगर में सांप्रदायिक तनाव
Updated Wed, 28 Dec 2016 12:41 AM IST
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नेहरू नगर में सांप्रदायिक तनाव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नेहरू नगर के नेहरू अपार्टमेंट के पास खाली पड़ी जमीन में महिला का शव दफनाए जाने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई। दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। विरोध के बावजूद शव को दफनाए जाने का प्रयास किया गया तो पुलिस ने लाठी बरसाकर भीड़ को तितर-बितर कर दिया। इसके दो घंटे बाद प्रशासन की अनुमति मिलने पर शव को वहीं पर दफनाया गया। इसके बाद भी इलाके में तनाव बना है। पुलिस तैनात है।
यह शव हींग की मंडी के लाडू गली निवासी चांद के परिवार की महिला सईदा रहमानी खातून का था। जनाजा लेकर लोग करीब 12 बजे नेहरू अपार्टमेंट के पास पहुंच गए थे। तभी दूसरे समुदाय के स्थानीय लोगों ने विरोध कर जनाजा रुकवा दिया। उनका कहना था कि यह जगह लखनऊ के किसी शख्स की है। यह कब्रिस्तान के रूप में दर्ज नहीं है। यहां शव दफनाने नहीं दिया जाएगा। इस पर पुलिस पहुंच गई।
इसी बीच कुछ लोग जनाजा लेकर खाली पड़ी उस जगह पर पहुंच गए। पुलिस ने रोका तो माने नहीं। इस पर पुलिस ने लाठी बरसाकर भीड़ को खदेड़ दिया। इसके बाद दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। बीच में भारी पुलिस बल रहा।
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एएसपी अनुराग वत्स भी पहुंच गए। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों को बुलाया। इसके बाद लेखपाल ने राजस्व रिकार्ड देखकर बताया कि जगह का आधा हिस्सा कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। इसका निशान भी लगाया गया। इसके बाद शव को वहीं पर दफनाया गया। इस बीच दोनों समुदाय के लोगों ने धार्मिक नारे लगाए तो माहौल गरमा गया।
फोन पर जानकारी लेते रहे सपा-भाजपा नेता
आगरा।विवाद के दौरान एक समुदाय के लोग भाजपा नेताओं को फोन करते रहे। दूसरे ने सपा नेताओं से संपर्क साधा। दोनों ही दलों में से कोई प्रमुख नेता मौके पर नहीं पहुंचा। हालांकि पुलिस अफसरों के पास दोनों दलों के नेताओं के फोन घनघनाते रहे। सपा से सौरभ गुप्ता, पप्पू राघव, मुकेश यादव पहुंचे। विहिप से भी तीन चार कार्यकर्ता पहुंचे थे।
दो घंटे तक जनाजा लेकर खड़े रहे लोग
आगरा। कब्रिस्तान पर विवाद हो जाने के बाद पुलिस ने प्रशासन से संपर्क साधा। लेखपाल ने आकर राजस्व रिकार्ड चेक किए। मौके पर नापजोख की। इस प्रक्रिया में दो घंटे का समय लगा। इस दौरान पेट्रोल पंप पर जनाजा कंधे पर लोग खड़े रहे। इसके बाद जब प्रशासन ने कह दिया कि जमीन कब्रिस्तान की है, तब शव को सुपुर्द ए खाक किया गया।
पुलिस से उलझे पूर्व मंत्री
बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री चौधरी बशीर अपने समर्थकों समेत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने उनसे कहा कि अधिकारियों ने पुलिस चौकी पर बुलाया। उन्होंने कहा कि वह नहीं जाएंगे, अफसर यहां आएंगे। इस पर दरोगा से उनकी गहमागहमी हो गई। हालांकि पुलिस के समझाने पर बाद में उन्होंने चौकी जाकर अधिकारियों से वार्ता की। वहां पहुंचे समाजसेवी समी अघाई समेत कई लोगों ने शांति बनाए रखने की अपील की।
अपनी बात पर अड़े रहे दोनों पक्ष
शव दफनाने के लिए आए लाडू गली के लोगों का कहना था कि यह वक्फ की जमीन है। यहां सईद रहमानी खातून से पूर्व उनके परिवार के शव सुपुर्द ए खाक किए जाते रहे हैं। उनके शौहर मुख्तियार और देवर अख्तियार को भी यहीं पर सुपुर्द ए खाक किया गया था। दूसरी ओर नेहरू नगर के वीरेंद्र दीक्षित, सीताराम, राकेश का कहना था कि एक शव यहां रात में चोरी छुपे कुछ दिन पहले ही दफनाया गया। इसके अतिरिक्त कोई शव नहीं दफनाया गया है। यह जमीन लखनऊ के किसी शख्स ही है न कि कब्रिस्तान।
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यह शव हींग की मंडी के लाडू गली निवासी चांद के परिवार की महिला सईदा रहमानी खातून का था। जनाजा लेकर लोग करीब 12 बजे नेहरू अपार्टमेंट के पास पहुंच गए थे। तभी दूसरे समुदाय के स्थानीय लोगों ने विरोध कर जनाजा रुकवा दिया। उनका कहना था कि यह जगह लखनऊ के किसी शख्स की है। यह कब्रिस्तान के रूप में दर्ज नहीं है। यहां शव दफनाने नहीं दिया जाएगा। इस पर पुलिस पहुंच गई।
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इसी बीच कुछ लोग जनाजा लेकर खाली पड़ी उस जगह पर पहुंच गए। पुलिस ने रोका तो माने नहीं। इस पर पुलिस ने लाठी बरसाकर भीड़ को खदेड़ दिया। इसके बाद दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। बीच में भारी पुलिस बल रहा।
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एएसपी अनुराग वत्स भी पहुंच गए। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों को बुलाया। इसके बाद लेखपाल ने राजस्व रिकार्ड देखकर बताया कि जगह का आधा हिस्सा कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। इसका निशान भी लगाया गया। इसके बाद शव को वहीं पर दफनाया गया। इस बीच दोनों समुदाय के लोगों ने धार्मिक नारे लगाए तो माहौल गरमा गया।
फोन पर जानकारी लेते रहे सपा-भाजपा नेता
आगरा।विवाद के दौरान एक समुदाय के लोग भाजपा नेताओं को फोन करते रहे। दूसरे ने सपा नेताओं से संपर्क साधा। दोनों ही दलों में से कोई प्रमुख नेता मौके पर नहीं पहुंचा। हालांकि पुलिस अफसरों के पास दोनों दलों के नेताओं के फोन घनघनाते रहे। सपा से सौरभ गुप्ता, पप्पू राघव, मुकेश यादव पहुंचे। विहिप से भी तीन चार कार्यकर्ता पहुंचे थे।
दो घंटे तक जनाजा लेकर खड़े रहे लोग
आगरा। कब्रिस्तान पर विवाद हो जाने के बाद पुलिस ने प्रशासन से संपर्क साधा। लेखपाल ने आकर राजस्व रिकार्ड चेक किए। मौके पर नापजोख की। इस प्रक्रिया में दो घंटे का समय लगा। इस दौरान पेट्रोल पंप पर जनाजा कंधे पर लोग खड़े रहे। इसके बाद जब प्रशासन ने कह दिया कि जमीन कब्रिस्तान की है, तब शव को सुपुर्द ए खाक किया गया।
पुलिस से उलझे पूर्व मंत्री
बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री चौधरी बशीर अपने समर्थकों समेत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने उनसे कहा कि अधिकारियों ने पुलिस चौकी पर बुलाया। उन्होंने कहा कि वह नहीं जाएंगे, अफसर यहां आएंगे। इस पर दरोगा से उनकी गहमागहमी हो गई। हालांकि पुलिस के समझाने पर बाद में उन्होंने चौकी जाकर अधिकारियों से वार्ता की। वहां पहुंचे समाजसेवी समी अघाई समेत कई लोगों ने शांति बनाए रखने की अपील की।
अपनी बात पर अड़े रहे दोनों पक्ष
शव दफनाने के लिए आए लाडू गली के लोगों का कहना था कि यह वक्फ की जमीन है। यहां सईद रहमानी खातून से पूर्व उनके परिवार के शव सुपुर्द ए खाक किए जाते रहे हैं। उनके शौहर मुख्तियार और देवर अख्तियार को भी यहीं पर सुपुर्द ए खाक किया गया था। दूसरी ओर नेहरू नगर के वीरेंद्र दीक्षित, सीताराम, राकेश का कहना था कि एक शव यहां रात में चोरी छुपे कुछ दिन पहले ही दफनाया गया। इसके अतिरिक्त कोई शव नहीं दफनाया गया है। यह जमीन लखनऊ के किसी शख्स ही है न कि कब्रिस्तान।