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Ghaziabad News: निवाड़ी विधि विज्ञान प्रयोगशाला को मिली एनएबीएल प्रमाणिकता
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मोदीनगर। कस्बा निवाड़ी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला को एनएबीएल (राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड) का प्रमाण पत्र मिला है। यह प्रमाण पत्र हासिल करने वाली प्रदेश की पहली प्रयोगशाला बन गई है। एनएबीएल के संयुक्त निदेशक विकास जायसवाल ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक प्रोफेसर डॉ. आदर्श कुमार को प्रमाण पत्र सौंपा।
निदेशक प्रो. डॉ. आदर्श कुमार ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि करीब डेढ़ साल तक एनएबीएल की टीम ने निवाड़ी प्रयोगशाला में जांच रिपोर्ट, सैंपल कलेक्शन समेत विभिन्न मानकों की जांच की। टीम ने कई बार औचक निरीक्षण किया और अपने सैंपल की जांच कराकर गुणवत्ता परखी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी चेकिंग की गई। यह प्रमाणिकता चार साल के लिए दी गई है, इसके बाद टीम फिर जांच कर अवधि बढ़ाने पर विचार करेगी। इसे प्रयोगशाला के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
11 में से तीन अनुभागों को मिली प्रमाणिकता
निदेशक ने बताया कि निवाड़ी प्रयोगशाला में 11 अनुभागों में जांच होती है, जिनमें से तीन- भौतिक, प्रलेख और डीएनए को प्रमाणिकता मिली है। प्रलेख में हस्ताक्षर, हैंडराइटिंग, डॉक्यूमेंटेशन आदि की जांच होती है। भौतिक में घटना में प्रयुक्त फंदे की रस्सी व चुन्नी के भार, बैलिस्टिक आदि की जांच की जाती है। डीएनए अनुभाग में अज्ञात शव की शिनाख्त आदि का काम होता है।
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उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला के अंतर्गत पश्चिमी यूपी के नौ जिले आते हैं और इन जिलों के अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्यों का भार इसी प्रयोगशाला पर है। प्रदेश में केवल निवाड़ी प्रयोगशाला में ही पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) जांच होती है। स्टाफ बढ़ने से जांच रिपोर्ट में तेजी आएगी। प्रदेश में कुल 12 विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं और तीन मंडलों में इसी साल तीन नई प्रयोगशालाएं शुरू हो जाएंगी, जिससे काम का भार कम होगा।
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निदेशक प्रो. डॉ. आदर्श कुमार ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में बताया कि करीब डेढ़ साल तक एनएबीएल की टीम ने निवाड़ी प्रयोगशाला में जांच रिपोर्ट, सैंपल कलेक्शन समेत विभिन्न मानकों की जांच की। टीम ने कई बार औचक निरीक्षण किया और अपने सैंपल की जांच कराकर गुणवत्ता परखी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी चेकिंग की गई। यह प्रमाणिकता चार साल के लिए दी गई है, इसके बाद टीम फिर जांच कर अवधि बढ़ाने पर विचार करेगी। इसे प्रयोगशाला के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
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11 में से तीन अनुभागों को मिली प्रमाणिकता
निदेशक ने बताया कि निवाड़ी प्रयोगशाला में 11 अनुभागों में जांच होती है, जिनमें से तीन- भौतिक, प्रलेख और डीएनए को प्रमाणिकता मिली है। प्रलेख में हस्ताक्षर, हैंडराइटिंग, डॉक्यूमेंटेशन आदि की जांच होती है। भौतिक में घटना में प्रयुक्त फंदे की रस्सी व चुन्नी के भार, बैलिस्टिक आदि की जांच की जाती है। डीएनए अनुभाग में अज्ञात शव की शिनाख्त आदि का काम होता है।
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उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला के अंतर्गत पश्चिमी यूपी के नौ जिले आते हैं और इन जिलों के अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्यों का भार इसी प्रयोगशाला पर है। प्रदेश में केवल निवाड़ी प्रयोगशाला में ही पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) जांच होती है। स्टाफ बढ़ने से जांच रिपोर्ट में तेजी आएगी। प्रदेश में कुल 12 विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं और तीन मंडलों में इसी साल तीन नई प्रयोगशालाएं शुरू हो जाएंगी, जिससे काम का भार कम होगा।