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फर्जी मार्क्सशीट लगाकर बना लिपिक और कर दिया बड़ा 'खेल'
ब्यूरो/अमर उजाला एटा
Updated Mon, 24 Jul 2017 08:34 PM IST
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नगर पालिका परिषद एटा में एक बाबू ने लिपिक पद पर प्रोन्नति पाने के लिए कर्मचारी ने इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट लगा दी। साथ ही पालिका की दो रसीद बुकों को गायब कर सरकारी धन का गबन कर लिया। पिछले दिनों शिकायत के बाद जांच में खुलासा होने पर डीएम ने ईओ को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
पालिका में कार्यरत कर्मचारी निरंकार सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत डीएम से की गई थी। शिकायत में कहा गया कि कर्मचारी ने गलत तरीके से प्रोन्नति प्राप्त की और करोड़ों रुपये की वसूली की। इस पर डीएम अमित किशोर ने एडीएम वित्त और राजस्व महेश चंद्र शर्मा को जांच सौंपी।
जांच में सामने आया कि निरंकार सिंह की नियुक्ति पालिका में माली पद पर हुई थी, लेकिन इसकी पत्रावली गायब है। इसके बाद उन्होंने माली से दफ्तरी पद पर प्रोन्नति पाई, लेकिन पत्रावली भी जांच में प्रस्तुत नहीं की गई। इसकी तलाश कराने के लिए ईओ को निर्देश दिए गए हैं।
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जांच में सामने आया कि कर्मचारी निरंकार सिंह ने 25-11-2005 को प्रार्थना पत्र देकर प्रोन्नति करने का अनुरोध करते हुए इंटरमीडिएट की मार्कशीट लगाई, जो फर्जी थी। इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए डीएम ने कार्रवाई करने के लिए लिखा है।
वहीं आरोप है कि निरंकार सिंह ने रसीद बुक नंबर 875601 और 376401 में काटी रसीदों और धन को राजकोष में जमा नहीं कराया। इसे गबन की श्रेणी में मानते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि 26-8-2016 को हुई प्रोन्नति में वरिष्ठ कर्मचारियों को छोड़कर निरंकार सिंह को लिपिक बना दिया गया, जो कि शासनादेश के विपरीत है। डीएम ने ईओ संतराम सरोज को कर्मचारी निरंकार सिंह के खिलाफ 15 दिन में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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पालिका में कार्यरत कर्मचारी निरंकार सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत डीएम से की गई थी। शिकायत में कहा गया कि कर्मचारी ने गलत तरीके से प्रोन्नति प्राप्त की और करोड़ों रुपये की वसूली की। इस पर डीएम अमित किशोर ने एडीएम वित्त और राजस्व महेश चंद्र शर्मा को जांच सौंपी।
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जांच में सामने आया कि निरंकार सिंह की नियुक्ति पालिका में माली पद पर हुई थी, लेकिन इसकी पत्रावली गायब है। इसके बाद उन्होंने माली से दफ्तरी पद पर प्रोन्नति पाई, लेकिन पत्रावली भी जांच में प्रस्तुत नहीं की गई। इसकी तलाश कराने के लिए ईओ को निर्देश दिए गए हैं।
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जांच में सामने आया कि कर्मचारी निरंकार सिंह ने 25-11-2005 को प्रार्थना पत्र देकर प्रोन्नति करने का अनुरोध करते हुए इंटरमीडिएट की मार्कशीट लगाई, जो फर्जी थी। इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए डीएम ने कार्रवाई करने के लिए लिखा है।
वहीं आरोप है कि निरंकार सिंह ने रसीद बुक नंबर 875601 और 376401 में काटी रसीदों और धन को राजकोष में जमा नहीं कराया। इसे गबन की श्रेणी में मानते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि 26-8-2016 को हुई प्रोन्नति में वरिष्ठ कर्मचारियों को छोड़कर निरंकार सिंह को लिपिक बना दिया गया, जो कि शासनादेश के विपरीत है। डीएम ने ईओ संतराम सरोज को कर्मचारी निरंकार सिंह के खिलाफ 15 दिन में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।