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सराफा कारोबारियों में अब ‘चौथ’ का खौफ
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Mon, 23 Nov 2015 11:58 PM IST
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आगरा सराफा एसोसिएशन के महामंत्री और शहर के सबसे बड़े चांदी कारोबारी धन कुमार जैन उर्फ धन्नू (40) को फुलट्टी क्षेत्र में रविवार रात गोली मारे जाने की घटना से सराफा कारोबार में दहशत है। डर इस बात का भी है कि बदमाश अब चौथ वसूली के लिए धमकी न देने लगें।
इसे पहले राजा मंडी में खौफ फैलाकर रंगदारी वसूली गई थी। जिस तरह बदमाश थाने के सामने फायर करते हुए भाग निकले, इससे उनका मकसद खौफ फैलाना ही लग रहा है।
सराफा कारोबारियों को दहला देने वाली यह सनसनीखेज वारदात ठीक उसी अंदाज में अंजाम दी गई है, जैसे दिसंबर 2012 और जनवरी 2013 में एक के बाद एक कई हमले हुए थे। पुलिस सूत्र बताते हैं कि उन हमलों के बाद कई सराफा व्यवसायियों पर बदमाशों ने चौथ वसूली के लिए टेलीफोनिक अटैक किए थे। उन घटनाओं में बिल्लू वर्मा नाम के अपराधी को पकड़ा गया था।
लेकिन यह खुलासा नहीं हो पाया था कि उसके सिर पर किसका हाथ है? सराफा कारोबारियों ने बताया कि बिल्लू के पिता सराफा का ही छोटा-मोटा काम करते थे। उन पर 20 लाख चांदी के गबन का आरोप लगा था। इसके बाद बिल्लू का आपराधिक चेहरा सामने आया। लेकिन वह इतना बड़ा बदमाश नहीं था कि अकेले दम पर छह सराफा कारोबारियों को निशाना बना सके। इन हमलों के बाद रंगदारी वसूली गई थी।
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यही वजह है कि सराफा कारोबारी पूरा जोर लगाकर पुलिस पर हमलावरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी का दबाव बना रहे हैं। उन्हें मालूम है कि अगर बदमाश खुले घूमते रहे, तो पूरे सराफा बाजार पर खतरा मंडराता रहेगा।
मास्टरमाइंड तक पहुंचे पुलिस
जिन छह सराफा कारोबारियों पर दिसंबर 2012 और जनवरी 2013 में हमले हुए थे, उनमें सबसे पहले आनंद अग्रवाल निशाना बनाए गए थे। उन्हें अंजना टाकीज के पास गोली मारी गई थी। वे आज सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधूरे खुलासे कर रही है।
बिल्लू के पीछे किसी और का भी हाथ है, उसे नहीं पकड़ा जा रहा। मास्टरमाइंड बचा हुआ है। यह भी मालूम नहीं किया गया कि जेल में बंद बिल्लू की पैरवी कौन कर रहा है? जब तक मास्टरमाइंड नहीं पकड़ा जाएगा, हमले होते रहेंगे।
चेहरे देखकर भी हमलावराें को नहीं पहचान पाई पुलिस
धन कुमार जैन को गोली मारे जाने के मामले में पुलिस को पांच सीसीटीवी फुटेज मिल गए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि एक में तो बदमाशों के चेहरे बिल्कुल स्पष्ट हैं। इसके बावजूद उनकी पहचान नहीं हो सकी है। क्राइम ब्रांच की टीम देर रात तक अंदाज ही लगाती रही। सराफ के परिवार से ही पूछा जा रहा है कि उन्हें किस-किस पर शक है?
2000
सराफा कारोबारी हैं शहर में
12
बाजारों में होता है सराफा का काम
08
सराफ कारोबारियों को गोली मारी जा चुकी तीन साल में
वही समय
सराफो के साथ लूट और गोली मारे जाने की 90 फीसदी वारदात रात सात से दस बजे के बीच हुई हैं।
वही रास्ता
80 फीसदी वारदात तब अंजाम दी गई है जब सराफ दुकान बंद कराकर घर लौट रहे थे।
वही तरीका
सभी वारदात में सराफ को निशाना बनाकर सामने से गोली मारी गई है।
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इसे पहले राजा मंडी में खौफ फैलाकर रंगदारी वसूली गई थी। जिस तरह बदमाश थाने के सामने फायर करते हुए भाग निकले, इससे उनका मकसद खौफ फैलाना ही लग रहा है।
सराफा कारोबारियों को दहला देने वाली यह सनसनीखेज वारदात ठीक उसी अंदाज में अंजाम दी गई है, जैसे दिसंबर 2012 और जनवरी 2013 में एक के बाद एक कई हमले हुए थे। पुलिस सूत्र बताते हैं कि उन हमलों के बाद कई सराफा व्यवसायियों पर बदमाशों ने चौथ वसूली के लिए टेलीफोनिक अटैक किए थे। उन घटनाओं में बिल्लू वर्मा नाम के अपराधी को पकड़ा गया था।
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लेकिन यह खुलासा नहीं हो पाया था कि उसके सिर पर किसका हाथ है? सराफा कारोबारियों ने बताया कि बिल्लू के पिता सराफा का ही छोटा-मोटा काम करते थे। उन पर 20 लाख चांदी के गबन का आरोप लगा था। इसके बाद बिल्लू का आपराधिक चेहरा सामने आया। लेकिन वह इतना बड़ा बदमाश नहीं था कि अकेले दम पर छह सराफा कारोबारियों को निशाना बना सके। इन हमलों के बाद रंगदारी वसूली गई थी।
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यही वजह है कि सराफा कारोबारी पूरा जोर लगाकर पुलिस पर हमलावरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी का दबाव बना रहे हैं। उन्हें मालूम है कि अगर बदमाश खुले घूमते रहे, तो पूरे सराफा बाजार पर खतरा मंडराता रहेगा।
मास्टरमाइंड तक पहुंचे पुलिस
जिन छह सराफा कारोबारियों पर दिसंबर 2012 और जनवरी 2013 में हमले हुए थे, उनमें सबसे पहले आनंद अग्रवाल निशाना बनाए गए थे। उन्हें अंजना टाकीज के पास गोली मारी गई थी। वे आज सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधूरे खुलासे कर रही है।
बिल्लू के पीछे किसी और का भी हाथ है, उसे नहीं पकड़ा जा रहा। मास्टरमाइंड बचा हुआ है। यह भी मालूम नहीं किया गया कि जेल में बंद बिल्लू की पैरवी कौन कर रहा है? जब तक मास्टरमाइंड नहीं पकड़ा जाएगा, हमले होते रहेंगे।
चेहरे देखकर भी हमलावराें को नहीं पहचान पाई पुलिस
धन कुमार जैन को गोली मारे जाने के मामले में पुलिस को पांच सीसीटीवी फुटेज मिल गए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि एक में तो बदमाशों के चेहरे बिल्कुल स्पष्ट हैं। इसके बावजूद उनकी पहचान नहीं हो सकी है। क्राइम ब्रांच की टीम देर रात तक अंदाज ही लगाती रही। सराफ के परिवार से ही पूछा जा रहा है कि उन्हें किस-किस पर शक है?
2000
सराफा कारोबारी हैं शहर में
12
बाजारों में होता है सराफा का काम
08
सराफ कारोबारियों को गोली मारी जा चुकी तीन साल में
वही समय
सराफो के साथ लूट और गोली मारे जाने की 90 फीसदी वारदात रात सात से दस बजे के बीच हुई हैं।
वही रास्ता
80 फीसदी वारदात तब अंजाम दी गई है जब सराफ दुकान बंद कराकर घर लौट रहे थे।
वही तरीका
सभी वारदात में सराफ को निशाना बनाकर सामने से गोली मारी गई है।