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साइबर अपराधियों के निशाने पर सैन्य अधिकारी
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 06 Jun 2015 02:07 AM IST
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साइबर अपराधियों के निशाने पर अब सैन्य अधिकारी भी आ गए हैं। पिछले एक साल में आगरा के कर्नल, मेजर, सूबेदार समेत 40 सैन्य कर्मियों को लाखों की चोट पहुंचाई गई है। यह चौंकाने वाली रिपोर्ट है साइबर सेल की। एक तो आनलाइन शॉपिंग की ई-मेल भेजकर, दूसरा फेसबुक पर फर्जी एकाउंट से दोस्ती करके। दोनों तरीकों में एटीएम और डेबिट कार्ड के नंबर हासिल कर आनलाइन शॉपिंग से फ्रॉड किया गया।
साइबर सेल के पास पहले सैन्य कर्मियों की एक दो शिकायतें आईं, लेकिन पिछले छह महीने से तो शिकायतों की लाइन लगी हुई है। किसी के एकाउंट से 50 हजार उड़ाए गए तो किसी के एक से दो लाख। साइबर सेल के मुताबिक साइबर अपराधी फेस बुक पर युवतियों के नाम से फर्जी आईडी बनाते हैं, फिर सैन्य कर्मियों से दोस्ती करते हैं। एटीएम और डेबिट कार्ड के नंबर मालूम करने के लिए दो तरीके इस्तेमाल किए गए हैं। एक तो उनकी ई-मेल आईडी मालूम कर आनलाइन शॉपिंग का फर्जी मेल किया गया। शॉपिंग के लिए डेबिट कार्ड नंबर भरकर मेल किया गया तो साइबर अपराधियों को मिल गया। फिर उन्होंने उससे आनलाइन शॉपिंग कर ली। दूसरा, सैन्य अधिकारियों को फर्जी कॉल करके बैंक के नया एटीएम या डेबिट कार्ड भेजने की बात कही गई और नंबर मालूम कर लिया गया। फिर आनलाइन शॉपिंग कर ली। साइबर सेल के प्रभारी नितिन कसाना का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का साइबर अपराधियों के जाल में फंसना चौंकाने वाली बात है।
सैन्य अधिकारी क्यों बने निशाना
साइबर सेल के मुताबिक जो सैन्य अधिकारी और कर्मचारी ग्रुप में सिम कार्ड खरीदते हैं, उनके नंबर सिरीज में होते हैं। अगर एक निशाना बन जाता है तो उसके बाद उसी सिरीज के सभी नंबरों पर ट्राई किया जाता है। सिर्फ सैन्य कर्मी नहीं, पुलिस और अन्य महकमों के लोगों को भी इसी तरह चूना लगाया जाता है।
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शिकार बनें तो 24 घंटे के अंदर करें शिकायत
अगर आपके एकाउंट से कोई आनलाइन शॉपिंग करके आपको चूना लगा दे तो साइबर सेल में शिकायत करने में देरी मत कीजिएगा। आपके पास जैसे ही एकाउंट से पैसा कटने का मैसेज आए, तुरंत इसकी सूचना दीजिए। आपके खाते से आनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी को पेमेंट होने से पहले ट्रांजक्शन रुकवाया जा सकता है। बशर्ते कि आप 24 घंटे में सूचना दे दें।
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साइबर सेल के पास पहले सैन्य कर्मियों की एक दो शिकायतें आईं, लेकिन पिछले छह महीने से तो शिकायतों की लाइन लगी हुई है। किसी के एकाउंट से 50 हजार उड़ाए गए तो किसी के एक से दो लाख। साइबर सेल के मुताबिक साइबर अपराधी फेस बुक पर युवतियों के नाम से फर्जी आईडी बनाते हैं, फिर सैन्य कर्मियों से दोस्ती करते हैं। एटीएम और डेबिट कार्ड के नंबर मालूम करने के लिए दो तरीके इस्तेमाल किए गए हैं। एक तो उनकी ई-मेल आईडी मालूम कर आनलाइन शॉपिंग का फर्जी मेल किया गया। शॉपिंग के लिए डेबिट कार्ड नंबर भरकर मेल किया गया तो साइबर अपराधियों को मिल गया। फिर उन्होंने उससे आनलाइन शॉपिंग कर ली। दूसरा, सैन्य अधिकारियों को फर्जी कॉल करके बैंक के नया एटीएम या डेबिट कार्ड भेजने की बात कही गई और नंबर मालूम कर लिया गया। फिर आनलाइन शॉपिंग कर ली। साइबर सेल के प्रभारी नितिन कसाना का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का साइबर अपराधियों के जाल में फंसना चौंकाने वाली बात है।
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सैन्य अधिकारी क्यों बने निशाना
साइबर सेल के मुताबिक जो सैन्य अधिकारी और कर्मचारी ग्रुप में सिम कार्ड खरीदते हैं, उनके नंबर सिरीज में होते हैं। अगर एक निशाना बन जाता है तो उसके बाद उसी सिरीज के सभी नंबरों पर ट्राई किया जाता है। सिर्फ सैन्य कर्मी नहीं, पुलिस और अन्य महकमों के लोगों को भी इसी तरह चूना लगाया जाता है।
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शिकार बनें तो 24 घंटे के अंदर करें शिकायत
अगर आपके एकाउंट से कोई आनलाइन शॉपिंग करके आपको चूना लगा दे तो साइबर सेल में शिकायत करने में देरी मत कीजिएगा। आपके पास जैसे ही एकाउंट से पैसा कटने का मैसेज आए, तुरंत इसकी सूचना दीजिए। आपके खाते से आनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी को पेमेंट होने से पहले ट्रांजक्शन रुकवाया जा सकता है। बशर्ते कि आप 24 घंटे में सूचना दे दें।