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सावधान! फर्जी हेल्प लाइन-कस्टमर केयर नंबर से जाल में फंसा रहे बदमाश, विशेषज्ञों की सलाह जानकर ऐसे बचें
Mon, 04 Jan 2021 12:10 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 04 Jan 2021 12:10 PM IST
सार
साल 2020 में सौ से अधिक मामले में ऐसे पुलिस के पास पहुंचे हैं। कई मामलों में रकम वापस नहीं कराई जा सकी है। साइबर सेल के मुताबिक, साइबर अपराधी विभिन्न कंपनी के हेल्प लाइन नंबर के नाम से गूगल पर अपना नंबर डालते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बैंक खाते से रकम निकल गई, बीमा पालिसी का प्रीमियम भरना है, एटीएम कार्ड ब्लाक कराना है, कंपनी में गैस एजेंसी के लिए आवेदन करना है, ऑनलाइन मंगाए गए सामान की शिकायत दर्ज करानी है, या फिर कुछ और...। इंटरनेट पर कस्टमर केयर और हेल्प लाइन नंबर की खोज करके कॉल करने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए। इन दिनों साइबर अपराधियों ने इंटरनेट पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर और हेल्प लाइन नंबर का जाल फैला रखा है। काल करने पर अपराधी न सिर्फ आपकी निजी जानकारी ले लेंगे, बल्कि खाते से रकम भी उड़ा देंगे।
साल 2020 में सौ से अधिक मामले में ऐसे पुलिस के पास पहुंचे हैं। कई मामलों में रकम वापस नहीं कराई जा सकी है। साइबर सेल के मुताबिक, साइबर अपराधी विभिन्न कंपनी के हेल्प लाइन नंबर के नाम से गूगल पर अपना नंबर डालते हैं।
जब कोई व्यक्ति नंबर पर कॉल करता है तो उसे मदद का झांसा देते हैं। इसके बाद खाते की जानकारी लेते हैं। बहाने से रकम निकाल लेते हैं। कई बार योजना, बीमा पालिसी, टेंडर और एजेंसी निकलने का झांसा देकर भी ठगते हैं। फिर मोबाइल नंबर बंद कर लेते हैं।
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साल 2020 में सौ से अधिक मामले में ऐसे पुलिस के पास पहुंचे हैं। कई मामलों में रकम वापस नहीं कराई जा सकी है। साइबर सेल के मुताबिक, साइबर अपराधी विभिन्न कंपनी के हेल्प लाइन नंबर के नाम से गूगल पर अपना नंबर डालते हैं।
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जब कोई व्यक्ति नंबर पर कॉल करता है तो उसे मदद का झांसा देते हैं। इसके बाद खाते की जानकारी लेते हैं। बहाने से रकम निकाल लेते हैं। कई बार योजना, बीमा पालिसी, टेंडर और एजेंसी निकलने का झांसा देकर भी ठगते हैं। फिर मोबाइल नंबर बंद कर लेते हैं।
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केस : 1 : मैनपुरी के एक व्यापारी को आईओसी की गैस एजेंसी लेनी थी। इसके लिए उन्होंने एक साल पहले गूगल पर आईओसी की बेवसाइट सर्च की थी। इसमें एक वेबसाइट खुल गई। मगर, यह असली कंपनी जैसी बनाई गई थी। वेबसाइट पर एक कस्टमर केयर नंबर लिखा हुआ था। व्यापारी ने उस नंबर पर कॉल कर दिया। काल करने वाले ने आईओसी का अधिकारी बताया।
इसके बाद गैस एजेंसी लेने के लिए की जानी वाली प्रक्रिया के बारे में बता दिया। व्यापारी ने अपने दस्तावेज भेज दिए। इसके बाद उनसे एजेंसी देने के नाम पर कई बार में 55 लाख रुपये खाते में जमा करा लिए गए। नंबर बंद कर लिया गया। पीड़ित ने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। इसमें पता चला कि वेबसाइट को कोलकाता के गैंग ने पुणे के साफ्टवेयर इंजीनियर से बनवाया था। वेबसाइट बनाने के लिए पैसा नागपुर की बैंक के खाते में ट्रांसफर किया गया था। इससे ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी। रेंज साइबर सेल अब भी केस की जांच कर रही है।
बीमा प्रीमियम के नाम पर 97 लाख रुपये ठगे थे
केस : 2 : शाहगंज निवासी प्रताप सिंह चाहर की कई बीमा पालिसी का प्रीमियम नहीं भर पाया था। इन्हें भरने के लिए एक साल पहले उन्होंने गूगल पर बीमा कंपनी का हेल्प लाइन नंबर सर्च किया। उन्हें एक नंबर मिल गया। इस पर नंबर पर बात की। बात करने वाले ने खुद को बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बताया। प्रलोभन दिया कि बीमा की राशि जमा करने पर रकम में वृद्धि हो जाएगी। यह रकम जल्द से जल्द दिलवा भी देंगे। इसके बाद प्रताप सिंह से कई बार में 97 लाख रुपये जमा करा लिए गए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। इसमें पता चला कि नाइजीरियन गैंग ने ठगी की थी। पुलिस ने एक युवती सहित सात आरोपियों को पकड़ा था। इनमें एक युवक नाइजीरिया का था। वह गैंग को संचालित कर रहा था।
इसके बाद गैस एजेंसी लेने के लिए की जानी वाली प्रक्रिया के बारे में बता दिया। व्यापारी ने अपने दस्तावेज भेज दिए। इसके बाद उनसे एजेंसी देने के नाम पर कई बार में 55 लाख रुपये खाते में जमा करा लिए गए। नंबर बंद कर लिया गया। पीड़ित ने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। इसमें पता चला कि वेबसाइट को कोलकाता के गैंग ने पुणे के साफ्टवेयर इंजीनियर से बनवाया था। वेबसाइट बनाने के लिए पैसा नागपुर की बैंक के खाते में ट्रांसफर किया गया था। इससे ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी। रेंज साइबर सेल अब भी केस की जांच कर रही है।
बीमा प्रीमियम के नाम पर 97 लाख रुपये ठगे थे
केस : 2 : शाहगंज निवासी प्रताप सिंह चाहर की कई बीमा पालिसी का प्रीमियम नहीं भर पाया था। इन्हें भरने के लिए एक साल पहले उन्होंने गूगल पर बीमा कंपनी का हेल्प लाइन नंबर सर्च किया। उन्हें एक नंबर मिल गया। इस पर नंबर पर बात की। बात करने वाले ने खुद को बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बताया। प्रलोभन दिया कि बीमा की राशि जमा करने पर रकम में वृद्धि हो जाएगी। यह रकम जल्द से जल्द दिलवा भी देंगे। इसके बाद प्रताप सिंह से कई बार में 97 लाख रुपये जमा करा लिए गए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। इसमें पता चला कि नाइजीरियन गैंग ने ठगी की थी। पुलिस ने एक युवती सहित सात आरोपियों को पकड़ा था। इनमें एक युवक नाइजीरिया का था। वह गैंग को संचालित कर रहा था।
एक्सपर्ट की राय
इंटरनेट पर हेल्प लाइन नंबर खोजने से बचें
रेंज साइबर सेल के एक्सपर्ट चेतन भारद्वाज के मुताबिक, इंटरनेट पर साइबर अपराधियों ने अपना जाल फैला रखा है। विभिन्न कंपनियों के नाम और डिजाइन जैसी वेबसाइट बना रखी है। इनमें अपने मोबाइल नंबर दिए हुए हैं। असली की पहचान नहीं होने की वजह से लोग वेबसाइट पर विश्वास करने लगते हैं। इसके बाद दिए नंबर कॉल करते हैं। अपराधी खाते की जानकारी लेकर रकम निकाल लेते हैं। इसलिए इंटरनेट पर हेल्प लाइन और कस्टर केयर नंबर खोजने से बचें।
इसके साथ ही गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। अगर, कॉल कर रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि किसी तरह खाते की जानकारी नहीं दें। मोबाइल एप भी डाउनलोड नहीं करना चाहिए। कई बार साइबर अपराधी मोबाइल स्क्रीन शेयरिंग और एक्सिस करने के एप डाउनलोड करवाकर भी मोबाइल हैक कर लेते हैं। इसके बाद खाते से रकम निकाल लेते हैं।
इंटरनेट पर हेल्प लाइन नंबर खोजने से बचें
रेंज साइबर सेल के एक्सपर्ट चेतन भारद्वाज के मुताबिक, इंटरनेट पर साइबर अपराधियों ने अपना जाल फैला रखा है। विभिन्न कंपनियों के नाम और डिजाइन जैसी वेबसाइट बना रखी है। इनमें अपने मोबाइल नंबर दिए हुए हैं। असली की पहचान नहीं होने की वजह से लोग वेबसाइट पर विश्वास करने लगते हैं। इसके बाद दिए नंबर कॉल करते हैं। अपराधी खाते की जानकारी लेकर रकम निकाल लेते हैं। इसलिए इंटरनेट पर हेल्प लाइन और कस्टर केयर नंबर खोजने से बचें।
इसके साथ ही गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। अगर, कॉल कर रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि किसी तरह खाते की जानकारी नहीं दें। मोबाइल एप भी डाउनलोड नहीं करना चाहिए। कई बार साइबर अपराधी मोबाइल स्क्रीन शेयरिंग और एक्सिस करने के एप डाउनलोड करवाकर भी मोबाइल हैक कर लेते हैं। इसके बाद खाते से रकम निकाल लेते हैं।