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Agra News: बुखार और डायरिया की चपेट में बच्चे, नहीं मिल रहा उचित उपचार
Wed, 27 Mar 2024 11:40 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 27 Mar 2024 11:40 PM IST
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बुखार और डायरिया की चपेट में बच्चे, नहीं मिल रहा उचित उपचार
प्राथमिक उपचार के साथ ही सौ शैया और जिला अस्पताल से रेफर हो रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। जिले में पिछले कुछ दिन से बुखार और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ दिखाई दे रही है। जिला अस्पताल और सौ शैया अस्पताल में पहुुंचने वाले मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है। बच्चे लगातार बुखार और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं लेकिन जिले में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 80 बच्चे प्राथमिक उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराना पड़ता है। लेकिन अस्पताल में ओपीडी के समय के बाद डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण तीमारदार मरीज को यहां से रेफर करा ले जाते हैं। इसका कारण यह है कि अस्पताल में मात्र एक ही बालरोग विशेषज्ञ हैं। सौ शैया अस्पताल की बात करें तो यहां ओपीडी में तो आठ साल तक के बच्चों को उपचार दिया जाता है। भर्ती की स्थिति आने पर यहां से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है और जिला अस्पताल से सैफई के लिए।
पांच दिन में तीन बच्चों की हो चुकी है मौत
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो पिछले पांच दिन में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। ये तीनों बच्चे यहां मृत अवस्था में ही पहुंचे थे। तीनों ने निजी अस्पताल में उपचार लिया था।
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केस नंबर-एक
शहर के मोहल्ला खरगजीत नगर निवासी रागिनी अपने पांच साल के बच्चे अंशु को लेकर सौ शैया अस्पताल पहुंचीं। बच्चे की हालत अधिक खराब थी। डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। रागिनी अपने बच्चे को जिला अस्पताल दो बजे लेकर पहुंचीं। बताया कि यहां बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं बाद में अंशु ने अपने बच्चे को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
केस नंबर- 2
शहर के मोहल्ला देवी रोड निवासी कांती देवी अपने तीन साल की पुत्री निशी को डायरिया की दिक्कत होने पर बुधवार को 2:25 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचीं। यहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को बालरोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी गई। पता चला कि बालरोग विशेषज्ञ कल ओपीडी में मिलेंगे इसके बाद कांती अपनी बच्ची को लेकर निजी अस्पताल चली गईं।
बच्चों को उचित उपचार दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। बाल मरीज भर्ती कराए जा रहे हैं। लोग अपनी मर्जी से ही बच्चों को ले जा रहे हैं।
डॉ. मदनलाल, सीएमएस
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प्राथमिक उपचार के साथ ही सौ शैया और जिला अस्पताल से रेफर हो रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। जिले में पिछले कुछ दिन से बुखार और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ दिखाई दे रही है। जिला अस्पताल और सौ शैया अस्पताल में पहुुंचने वाले मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है। बच्चे लगातार बुखार और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं लेकिन जिले में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 80 बच्चे प्राथमिक उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराना पड़ता है। लेकिन अस्पताल में ओपीडी के समय के बाद डॉक्टर उपलब्ध न होने के कारण तीमारदार मरीज को यहां से रेफर करा ले जाते हैं। इसका कारण यह है कि अस्पताल में मात्र एक ही बालरोग विशेषज्ञ हैं। सौ शैया अस्पताल की बात करें तो यहां ओपीडी में तो आठ साल तक के बच्चों को उपचार दिया जाता है। भर्ती की स्थिति आने पर यहां से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है और जिला अस्पताल से सैफई के लिए।
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पांच दिन में तीन बच्चों की हो चुकी है मौत
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए तो पिछले पांच दिन में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। ये तीनों बच्चे यहां मृत अवस्था में ही पहुंचे थे। तीनों ने निजी अस्पताल में उपचार लिया था।
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केस नंबर-एक
शहर के मोहल्ला खरगजीत नगर निवासी रागिनी अपने पांच साल के बच्चे अंशु को लेकर सौ शैया अस्पताल पहुंचीं। बच्चे की हालत अधिक खराब थी। डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। रागिनी अपने बच्चे को जिला अस्पताल दो बजे लेकर पहुंचीं। बताया कि यहां बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं बाद में अंशु ने अपने बच्चे को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
केस नंबर- 2
शहर के मोहल्ला देवी रोड निवासी कांती देवी अपने तीन साल की पुत्री निशी को डायरिया की दिक्कत होने पर बुधवार को 2:25 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचीं। यहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को बालरोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी गई। पता चला कि बालरोग विशेषज्ञ कल ओपीडी में मिलेंगे इसके बाद कांती अपनी बच्ची को लेकर निजी अस्पताल चली गईं।
बच्चों को उचित उपचार दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। बाल मरीज भर्ती कराए जा रहे हैं। लोग अपनी मर्जी से ही बच्चों को ले जा रहे हैं।
डॉ. मदनलाल, सीएमएस