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उदयपुर में गरीबी से हारा बेबस पति: पत्नी की मौत के बाद 7 दिन तक नहीं दे सका अंतिम विदाई, मदद के लिए आगे आए हाथ
Fri, 25 Sep 2026 07:54 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 25 Sep 2026 07:54 PM IST
सार
पत्नी की मौत के बाद पति के पास अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं थे। आर्थिक तंगी के चलते महिला का शव सात दिन तक एमबी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा रहा, बाद में पुलिस और संस्था ने मदद की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले के सुखेर क्षेत्र में आर्थिक तंगी और बेबसी का भयानक रूप सामने आया। बीमारी के चलते एक महिला की मौत के बाद उसका पति इतना असहाय था कि गरीबी के कारण वह पत्नी का अंतिम संस्कार तक नहीं करा सका। पैसे के अभाव में महिला का शव सात दिन तक एमबी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा रहा। बाद में पुलिस की पहल और सामाजिक संस्था की मदद से महिला का अंतिम संस्कार कराया गया।
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जानकारी के अनुसार कालोड़ा गोवर्धन क्षेत्र निवासी मदन गमेती अपनी 40 वर्षीय पत्नी लीला उर्फ नीलम के साथ बेदला में निर्माणाधीन मकान में चौकीदारी का काम करते थे। लीला पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। तबीयत बिगड़ने पर मदन ने 17 सितंबर को उन्हें उपचार के लिए एमबी अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान अगले ही दिन 18 सितंबर को लीला की मौत हो गई।
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पत्नी की मौत के बाद मदन के सामने उसके अंतिम संस्कार कराने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई। पुलिस को दी जानकारी में उसने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उसके पास पत्नी का अंतिम संस्कार कराने तक के पैसे नहीं हैं। परिवार में मासूम बेटा भी पिता के साथ मौजूद था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार अपनी आंखों के सामने महिला को अंतिम विदाई देने में असमर्थ था।
मदन ने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में सुखेर थाने में तैनात उपनिरीक्षक मनोहर सिंह को जानकारी दी। इसके बाद महिला का शव एमबी अस्पताल के मुर्दाघर में सुरक्षित रखवा दिया गया। परिवार अंतिम संस्कार के इंतजाम की उम्मीद में रहा लेकिन पैसों का इंतजाम नहीं हो सका। आखिरकार मामले की जानकारी मिलने पर उपनिरीक्षक मनोहर सिंह ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए मेवाड़ प्रताप संस्थान से सहयोग मांगा। संस्था की मदद से जरूरी प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपा गया। इसके बाद पुलिस और संस्था के सहयोग से अशोकनगर मोक्षधाम में लीला का अंतिम संस्कार कराया गया। इस दौरान पति मदन और उनका मासूम बेटा मौजूद रहे।