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काशी के इस कुंड में 12 कुंडों के स्नान के बराबर मिलता है फल, उमड़े श्रद्धालु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 20 Apr 2018 10:50 AM IST
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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट स्थित अनादि तीर्थ पुष्करणी चक्र मणिकर्णिका कुंड पर स्नान के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। भक्तों ने गुरुवार को माता की झांकी सजाई और पूजन अनुष्ठान किया। 12 कुंडों में स्नान के समान फल की प्राप्ति के लिए मध्य दोपहर में मोक्ष की कामना के साथ श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान किया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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मणिकर्णिका सिर्फ श्मशान नहीं है यह तीर्थ है। अस्सी से वरुणा तक सभी घाट हैं लेकिन तीर्थ सिर्फ मणिकर्णिका है। वर्ष में एक बार ही यह प्रतिमा कुंड पर आती है। भगवान विष्णु के चक्र द्वारा स्थापित कुंड में प्रथम स्नान शिव और पार्वती ने किया था।
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गुरुवार को चक्र पुष्करणी कुंड में विराजमान मणिकर्णी माता का दोपहर में पूजन किया गया। रोली सिंदूर व फूल अर्पित किए गए। इसके उपरांत उन्हें कुंड जल से स्नान कराया गया और शृंगार कर झांकी सजाई गई। पुरोहित जयेंद्र नाथ दूबे उर्फ बब्बू महाराज के नेतृत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने अनुष्ठान किया।
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इसके साथ ही डमरूओं की थाप के बीच मां मणिकर्णिका के प्रतिमा की महाआरती उतारी गई। पूरा कुंड हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
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तीर्थ पुरोहित के साथ डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। लोगों ने स्नान किया और देवी के चरणों में फूल अर्पित किए। स्नान के बाद देवी के विग्रह की सवारी निकाली और उन्हें ब्रह्मनाल स्थित मंदिर में विराजमान कराया गया।