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शहादत को सलाम: दो साल के बेटे ने शहीद पिता को दी मुखग्नि, अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, पत्नी ने कही ये बड़ी बात

Tue, 15 Dec 2020 05:47 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 15 Dec 2020 05:47 PM IST
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Salute to the martyrdom: mass gathering to pay tribute to martyr Vikas Kumar in Muzaffarnagar
शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट का मंगलवार दोपहर उनके पैतृक आवास पचेंडा में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भारी संख्या में लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान जिले भर से लोग शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए और परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके आवास पर पहुंचे। दो साल के मासूम बेटे ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी तो हर आंख नम हो गई। पति की शहादत के बाद पत्नी ने कहा कि सीआरपीएफ उन्हें पति की शहादत का बदला लेने का मौका दे। 

Salute to the martyrdom: mass gathering to pay tribute to martyr Vikas Kumar in Muzaffarnagar
शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। सोमवार को बेटे की शहादत की खबर मिलते ही लोग विकास के परिवार को ढांढस बंधाने के लिए घर पहुंचने लग थे। विकास सिंघल अपने पूरे परिवार के इकलौते सैनिक थे। शुरुआत से ही विकास सेना में शामिल होने को लेकर बेहद उत्साहित रहते थे।

 

Salute to the martyrdom: mass gathering to pay tribute to martyr Vikas Kumar in Muzaffarnagar
शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

चाचा मनोज सिंघल और भाई पंकज ने बताया कि शुरूआती शिक्षा के बाद सेना के प्रति अपने इसी जुनून के चलते विकास वर्ष 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। भर्ती के बाद भी वे लगातार खुद को साबित करते रहे, जिनकी अति दक्षता को देख उनका प्रमोशन डिप्टी कमांडेंट के पद पर कर दिया गया। इसके बाद विकास सिंघल को सीआरपीएफ की बड़े ऑपरेशन करने वाली कोबरा विंग में भेज दिया गया।

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Salute to the martyrdom: mass gathering to pay tribute to martyr Vikas Kumar in Muzaffarnagar
शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए गन्ना मंत्री सुरेश राणा - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 2020 की शुरूआत में ही विकास सिंघल को छत्तीसगढ़ में भेज दिया गया। करीब छह माह नक्सल प्रभावित क्षेत्र मेें ड्यूटी देने के उपरांत उनका स्थानांतरण मध्यप्रदेश किया गया, लेकिन यहां से तीन माह बाद ही करीब एक पखवाड़े पूर्व उन्हें फिर से छत्तीसगढ़ भेज दिया गया। यहां उनकी तैनाती नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में हुई, जहां रविवार को नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी में हुए विस्फोट की चपेट में आकर विकास सिंघल शहीद हो गए।

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शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

कृष्णापुरी निवासी पारुल से छह साल पूर्व हुई थी शादी
विकास सिंघल की शादी करीब छह साल पूर्व शहर के मोहल्ला कृष्णापुरी निवासी पारुल से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं, जिनमें पांच साल की बेटी निष्ठा व दो साल का बेटा केशव शामिल हैं। विकास की पत्नी दोनों बच्चों के साथ छत्तीसगढ़ में ही रह रहीं थीं। वह मंगलवार को शहीद पति के पार्थिव शरीर के साथ ही गांव पहुंची। बेटे केशव ने ही शहीद पिता को मुखाग्नि दी।

 

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