सहारनपुर के एक रेस्टोरेंट में आयुष्मान भारत योजना के फर्जी गोल्डन कार्ड बनाते पांच लोग पकड़े गए। ये सभी आरोपी खुद को बेकसूर बता रहे हैं। लेकिन एक डायरी और लैपटॉप से सभी राज खुल गए। आगे जानिए पूरा अपडेट-
यूपी: रेस्टोरेंट में चल रहा था मोटी कमाई का ये धंधा, एक डायरी ने खोल दिए सभी राज, देखिए तस्वीरें
इन सभी का कहना था कि वे पात्र लोगों के कार्ड बना रहे थे। पुलिस ने जब लैपटॉप खोलकर देखा तो उसमें दस नवंबर की तिथि में 50 कार्ड बने पाए गए। इसके अलावा डायरी में 12 अक्तूबर तक के ऐसे लोगों की लिस्ट मिली है, जिनके फर्जी कार्ड बनाए गए हैं। डायरी में रेस्टोरेंट संचालक के अलावा अन्य कई नाम लिखे मिले हैं, जो रैकेट का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस इन सभी की धरपकड़ करेगी।
मोटी कमाई करता था रैकेट
पकड़े गए लोगों में तीन ग्राहक हैं, जिन्होंने बताया है कि वे कार्ड बनवाने आए थे। उन्होंने बताया कि उनसे एक से दो हजार रुपये तक कार्ड बनाने के एवज में मांगे गए थे। यानी दस नवंबर को बनाए गए 50 कार्डों की एवज में 50 हजार से एक लाख रुपये तक की अवैध कमाई की गई है।
खुद को बताया अस्पताल का कर्मचारी
पकड़ा गया रेस्टोरेंट संचालक आयुष्मान की टीम के सामने खुद को जिला अस्पताल का कर्मचारी बताता रहा। उसका कहना था कि वह निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करता है। कार्ड भी फ्री में बनाकर दिए जाते हैं। कई लोग उनके बनाए कार्ड पर देहरादून स्थित अस्पताल में इलाज करा चुके हैं। इससे यह भी साबित होता है कि उत्तराखंड की आईडी पर बने फर्जी कार्डों से उत्तराखंड में ही इलाज कराया जाता था, जिससे कोई शक ना हो।
सीएमओ कार्यालय द्वारा सूचना मिली थी कि माहीपुरा में फर्जी गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। पुलिस को साथ लेकर छापा मारा तो शिकायत सही पाई गई। कई लोगों को पकड़ा है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। ये लोग उत्तराखंड के रहने वालों की आईडी पर यहां फर्जी नाम से गोल्डन कार्ड बनाते थे। - डॉ. सुशील गुप्ता, नोडल अधिकारी
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