मौलाना डॉ. महफूजुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी किताबों को सच्चा दोस्त और हमदर्द मानते थे। उनका मानना था कि हर सवाल का जवाब इन किताबों में ही है। उन्होंने अलग-अलग धर्म और विषय की एक लाख से ज्यादा किताबों का अध्ययन किया।
कौन थे मौलाना शाहीन जमाली चतुर्वेदी: एक लाख किताबों का कर चुके थे अध्ययन, तीन तलाक के मुद्दों पर रखी थी बेबाक राय
15 अगस्त और 26 जनवरी पर करते थे ध्वजारोहण
मौलाना जमाली ने कई बार संस्कृत में मंत्रोच्चारण के साथ स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण भी किया था। स्वास्थ्य खराब होने पर भी 15 अगस्त और 26 जनवरी पर ध्वजारोहण में पहुंचते थे। हिंदू-मुस्लिमों को एकजुट कर सच्चे देशभक्त होने का पैगाम देते थे। कभी कोई गलतफहमी पैदा होती तो डांटते भी थे।
इंतकाल के बाद भी हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश
मौलाना जमाली हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल तो थे ही, बुधवार को इंतकाल के बाद भी उन्होंने बड़ा संदेश दिया। सदर बाजार स्थित मदरसा इमदादुल इस्लाम पहुंचने पर अफवाह फैल गई जनाजा मदरसे में ही दफनाया जा रहा है। कब्र की खोदाई कर दी गई है। इस पर जब सदर थाना इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा मौके पर पहुंचे तो वहां खोदाई नहीं मिली। हालांकि मदरसे में कब्रिस्तान पंजीकृत है लेकिन कैंट क्षेत्र में दफीना बंद है। जनाजा दफनाने को लेकर विचार-विमर्श के दौरान मौलाना के दोनों बेटों महमुदुर रहमान जमाली और मशहुदूर रहमान जमाली ने कहा कि हमारे अब्बू ने जीते जी हिंदू-मुस्लिमों को जोड़ने का कार्य किया है। उनके दफीने को लेकर अगर किसी को आपत्ति है तो यह काम नहीं किया जाएगा।
दारुल उलूम से आलिम फाजिल की पढ़ाई की थी
मौलाना जमाली ने दारुल उलूम देवबंद से 1969 में आलिम फाजिल की पढ़ाई पूरी की थी। वर्तमान में दारुल उलूम के नायब मोहतमिम अब्दुल खालिक मद्रासी उनके सहपाठी रहे हैं। मौलाना के इंतकाल की खबर मिलने पर अब्दुल खालिक मद्रासी बताते हैं कि मौलाना जमाली और मैंने करीब आठ साल तक एक साथ आलिम फाजिल की पढ़ाई की है। जमाली बेहतरीन शख्सियत थे, पढ़ाई के दिनों में उनका सबके प्रति बहुत अच्छा व्यवहार रहता था।
खानदान-ए-शेखुल हिंद के अशरफ उस्मानी बताते हैं कि मौलाना जमाली का देवबंद से गहरा ताल्लुक रहा। देवबंद टाइम्स के प्रकाशक मौलाना उस्मान (पूर्व चेयरमैन) के साथ उनकी टीम थी। इसमें मौलाना एजाज और अजहर सिद्दीकी मौलाना महफूजुर्रहमान के साथ काम करते थे। शानदार अरबी और संस्कृत बोलने वाले मौलाना जमाली की लेखनी भी शानदार थी। मौलाना उस्मान और मौलाना एजाज की जिंदगी तक मौलाना देवबंद आते-जाते थे।
दारुल उलूम सहित उलमा ने दुख जताया
मौलाना जमाली के इंतकाल पर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, नायब मोहतमिम मौलाना शकेब कासमी, उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, कारी इब्राहीम कासमी, मौलाना जैनुद्दीन कासमी, मौलवी तसव्वुर, तंजीम अब्ना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती यादे इलाही कासमी सहित अन्य उलमा ने गहरा दुख जताया है।