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शहीद के चार साल के बेटे ने मुखाग्नि देते वक्त पूछा ऐसा सवाल, पसर गया हर तरफ सन्नाटा

Fri, 14 Jun 2019 08:23 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: कपिल kapil Updated Fri, 14 Jun 2019 08:23 PM IST
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Martyr Satendra Kashyap was cremated remains in village of Shamli
शहीद का बेटा - फोटो : अमर उजाला

पापा को कहां भेज रहे हो, मुझे उनके साथ खेलना है। यह सवाल शहीद के चार साल के बेटे दीपांशु ने अपने चाचा से किया तो हर तरफ सन्नाटा पसर गया। आगे देखें तस्वीरें...

Martyr Satendra Kashyap was cremated remains in village of Shamli
विलाप करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

शहीद सतेंद्र का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव में पहुंचा तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। घर से करीब एक किमी दूर श्मशान घाट तक शहीद की अंतिम यात्रा पहुंची। शहीद के चार वर्षीय बेटे दीपांशु ने चाचा केशव के साथ चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान दीपांशु ने अपने चाचा से कई बार पूछा कि पापा को कहां भेज रहे हो।

Martyr Satendra Kashyap was cremated remains in village of Shamli
शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

पापा ने कहा था कि वह आकर उनके साथ रहेंगे। मुझे उनके साथ खेलना है। मासूम के सवाल को सुनकर सन्नाटा पसर गया। वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। ग्रामीण बोले कि मासूम को क्या पता कि अब उसके पापा कभी लौटकर नहीं आएंगे।

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Martyr Satendra Kashyap was cremated remains in village of Shamli
शहीद को सलामी देते हुए - फोटो : अमर उजाला

बच्चों को पढ़ाकर अफसर बनाने की तमन्ना रह गई अधूरी
शहीद सतेंद्र की पत्नी सोनिया ने रोते हुए बताया कि उनकी 11 जून को आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने 19 जून को घर आने की बात कही थी। सोनिया के मुताबिक वे जब भी घर आते थे या फोन पर बात करते थे तो वे बच्चों की पढ़ाई और भाइयों की नौकरी के लिए चिंतित रहते थे। वे कहते थे कि हमने अपने दिन कैसे भी गुजारे हो, लेकिन बच्चों को वे पढ़ा लिखाकर उच्च शिक्षा दिलाकर अधिकारी बनाने का काम करेंगे, लेकिन अब उनके जाने के बाद हमें कुछ नहीं सूझ रहा है। चारों तरफ अंधेरा नजर आ रहा है। किसे पता था कि वो फिर घर पर कभी वापस नहीं आएंगे।

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Martyr Satendra Kashyap was cremated remains in village of Shamli
शव से लिपटकर रोता भाई - फोटो : अमर उजाला

शहीद की पत्नी ने कहा कि उनके पति का बलिदान खाली ना जाए। सरकार से बस एक ही मांग है कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की रणनीति बनाई जाए।

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