भगवान आशुतोष के जलाभिषेक के लिए आखिरी दिन कांवड़ियों ने हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर दौड़ लगाई। सड़कों पर डाक कांवड़ दौड़ी, दिनभर कांवड़ियों की भागमभाग रही। अधिकारियों ने मार्गों का निरीक्षण किया। डाक कांवड़िए दिल्ली-देहरादून हाईवे, पानीपत-खटीमा हाईवे और मुजफ्फरनगर से बड़ौत जाने वाले मार्ग पर खूब दौड़े। रुड़की रोड पर सोमवार देर रात तक डाक कांवड़ियों ने दौड़ लगाई। सोमवार को भी जहां भगवान आशुतोष का जलाभिषेक किया गया। वहीं मंगलवार को भी शिव के जलाभिषेक का सिलसिला अनवरत जारी है।
Kanwar Yatra: आखिरी दिन डाक कांवड़ की भागम-भाग, बुजुर्ग भी दिखा रहे दमखम, सबसे कठिन है ये कांवड़
शिवरात्रि पर्व पर शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए डाक कांवड़ शुरू हो गई हैं। इसमें युवा ही नहीं बुजुर्ग भी दमखम दिखा रहे हैं। बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग पर 75 वर्षीय बुजुर्ग पंचवीर झज्जर ने बताया कि पिछले कई साल से डाक कांवड़ यात्रा में शामिल होता हूं। भगवान शिव शंकर भी भक्ति में लीन होगा। उन्होंने कहा कि खुद को स्वस्थ रखना भी एक पूजा है। जो व्यक्ति स्वस्थ है, उससे धनी व्यक्ति संसार में कोई ओर नहीं है।
हाईवे पर दौड़ती रहीं डाक कांवड़
कंकरखेड़ा बाईपास पर जहां एक तरफ पैदल कांवड़िया चल रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ डाक कांवड़ दौड़ रहीं हैं। बता दें कि डाक कांवड़ सबसे कठिन कांवड़ कही जाती है। इसमें अधिकतर युवा ही शामिल होते हैं। ये एक समूह में चलते हैं, एक के बाद एक युवक दौड़ते हुए जल के साथ कांवड़ को शिवालयों तक पहुंचते हैं। कांवड़ सेवा शिविर संचालकों के अनुसार इस बार डाक कांवड़ियों की पूर्व के वर्षों से दोगुना रही। दो वर्ष से कांवड़ यात्रा न होने के कारण इस बार कांवड़ियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
आज शाम से होगा चतुर्दशी का जलाभिषेक
शिवरात्रि पर आज शाम 6:30 बजे से मुख्य चतुर्दशी का जलाभिषेक आरंभ होगा। दिन भर मंदिर परिसर में शिव के जयकारे गूंजते रहे। मेरठ में बाबा औघड़नाथ मंदिर में सुबह पांच बजे से ही मेले जैसा माहौल बना हुआ है। नैंसी चौराहा और शनि देव मंदिर से आगे बैरिकैडिंग की गई है। मंदिर के आसपास कांवड़ियों की सेवा के लिए 25 शिविर लगाए गए हैं। शहर में शिवरात्रि पर चतुर्दशी के जलाभिषेक से 34 घंटे पूर्व ही हजारों की संख्या में कांवड़िए मेरठ पहुंच चुके हैं।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर वापस लौट रहे कांवड़ियों को राहत पहुंचाने के लिए मंदिर में विश्राम और भोजन की व्यवस्था की है। भोले यहां रुककर थकान दूर कर रहे हैं। गांव वाले उनकी जमकर सेवा कर रहे हैं। मंदिर में भोलों की आमद से गांव का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।