मेरठ में अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ के 11वें आयोजन में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या यादगार बन गई। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। देश के प्रसिद्ध कवियों व शायरों ने कविताओं और शायरी के माध्यम से माहौल में देशभक्ति का जोश भर दिया। शहर के हर वर्ग ने कविताओं और शायरी का लुत्फ उठाया। देर रात तक चले कार्यक्रम में श्रोता अंत तक जमे रहे और प्रेक्षागृह देशभक्ति के नारों से गूंजता रहा।
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कवि सम्मेलन
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ओज के प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर से 370 को ही खत्म नहीं किया, बल्कि मेरी कई कविताओं को भी खत्म कर दिया। लेकिन इसका उन्हें दुख नहीं बल्कि खुशी है। आज मेरी कविता है नहीं बल्कि था में तब्दील हो गई है। अब मन करता है कि सरकार के पक्ष में कविता लिखूं। हरिओम पंवार ने कश्मीर को लेकर अपनी पुरानी कविता को नये अंदाज में कुछ यूं प्रस्तुत किया ‘कश्मीर था जहां हमारा राष्ट्रगान शर्मिंदा था, भारत मां को गाली देकर भी खलनायक जिंदा था, मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला था’।
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हाशिम फिरोजाबादी ने ‘जब जब हम सरहद पर जाएं’ पंक्तियों के साथ शुरुआत की। उन्होंने कहा कि ‘जो है मेरे देश के गद्दार, नहीं हैं इनको देश से प्यार, वो हिंदुस्तान छोड़ दें, जो मजलूमों को सताते हैं, जो दंगों को भड़काते हैं, जो नफरत को फैलाते हैं, वो हिंदुस्तान छोड़ दें।
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हास्य व्यंग के कवि तेज नारायण बेचैन ने हास्य व्यंग से माहौल को खुशनुमा करते हुए कहा कि ‘समूचा देश है एक साथ, अब तैयार मोदी जी, भरी है वीर सेना में हुंकार मोदी जी, समय वो आ गया, शायद पाक के टुकड़े किए दो इंद्रा जी ने, आप चार कर दो मोदी जी’।
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फरीदाबाद से आए गजलकार और गीतकार दिनेश रघुवंशी ने कहा कि ‘वतन के दुश्मनों से रात दिन जूझती है वर्दी, सभी से प्रश्न केवल एक पूछती है वर्दी, पुराने सूट नेताओं के बिकते हैं करोड़ों में, पड़ी मिलती है कचरे में लहू से भीगती वर्दी’।