मेरठ में लाॅकडाउन के बीच अति संवेदनशील क्षेत्र जली कोठी में शनिवार को पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हमला कर दिया। टीम से धक्का-मुक्की करते हुए पथराव भी किया।
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सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला के अनुसार देहली गेट के जली कोठी स्थित तीन मस्जिदों में महाराष्ट्र के माले गांव से 11 लोगों की जमात आई थी। 29 मार्च को यह जमात बुलंदशहर रवाना हो गई थी।
बुलंदशहर पुलिस ने इन जमातियों की जांच कराई थी, जिसमें दो जमातियों की कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई है। जमातियों को कोरोना की पुष्टि होने के बाद मेरठ में भी खलबली मच गई। महाराष्ट्र की जमात में शामिल लोगों से पूछताछ की गई। उसके बाद मेरठ की जली कोठी में भी जांच शुरू कर दी गई।
शुक्रवार देर रात पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम जली कोठी पहुंची, जहां से कोरोना संदिग्ध मानते हुए तीन लोगों को चेकअप के लिए मेडिकल कॉलेज ले गए। तीनों लोगों को कोरोना की पुष्टि हो गई।
इसके बाद उन तीनों युवकों के बताए अनुसार जली कोठी में सात और लोगों को संदिग्ध माना गया है। जिसमें शनिवार सुबह सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्र सिंह, एसओ देहली गेट रविंद्र सिंह पलावत समेत पुलिस टीम जली कोठी में पहुंची।
पुलिस प्रशासन की टीम ने तीन लोगों को पकड़ा। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय के लोगों को कोरोना बताकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। इसकी बात सुनते ही लोगों की भीड़ लग गई।
लोगों ने पुलिस प्रशासन की टीम पर हमला बोल दिया। धक्का-मुक्की करते हुए पथराव भी कर दिया। जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्र सिंह और देहली गेट थाने के दरोगा मुकेश कुमार को चोट आई।
सिटी मजिस्ट्रेट और दरोगा को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां सिटी मजिस्ट्रेट के हाथ में फ्रेक्चर आना बताया है।