मेरठ से हस्तिनापुर सेंचुरी का वेटलैंड क्षेत्र विदेशी प्रवासी पक्षियों को यूं ही नहीं रास आता। यहां की अनुकूल परिस्थितियां उन्हें प्रतिवर्ष सात समुंदर पार से क्षेत्र में आने के लिए मजबूर करती हैं। इन दिनों वेटलैंड क्षेत्र की आबो-हवा राज्य पक्षी सारस को काफी भा रही है। उन्हें यहां पर मनपसंद भोजन तो मिल ही रहा है, इसके साथ ही ये पक्षी यहां पर अपना कुनबा भी बढ़ा हैं। वेटलैंड क्षेत्र में इनकी अठखेलियां लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। सारस पक्षी के कई जोड़े यहां जगह-जगह अठखेलियां करते देखे जा सकते हैं। सारस को वेटलैंड में देखकर वन विभाग के अधिकारी और पक्षी प्रेमी भी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
अद्भुत: साथी की मौत पर दूसरा भी वियोग में दे देता है जान, हस्तिनापुर वैटलेंड में अठखेलियां करते दिख रहे सारस
साथी के वियोग में खुद भी दे देते हैं जान
जोड़े में रह रहे सारस में से अगर एक की किसी कारण मृत्यु हो जाती है तो दूसरा सारस भी साथी के वियोग में दम तोड़ देता है। सामाजिक वानिकी और वन्य जंतु प्रभाग शीतकालीन गणना में सारस की संख्या में वृद्धि को अच्छा माना जा रहा है।
अधिकारियों और जानकारों का मानना है कि अनुकूल वातावरण और खुद को सुरक्षित महसूस करने के चलते सेंचुरी के वेटलैंड क्षेत्र में सारस का कुनबा बढ़ रहा है। सारस तालाब, पोखर और झीलों के किनारे दलदली जमीन के साथ कृषि भूमि को अपना बसेरा बनाते हैं। खेतों के कीड़े-मकौड़े उनका भोजन होते हैं। ऐसे में इस पक्षी को किसानों का मित्र भी कहा जाता है।
सारस का बढ़ रहा कुनबा
रेंजर नवरत्न सिंह ने बताया कि गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष सारस की गणना में इनकी संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है। 2021 की गणना के अनुसार वन रेंज में करीब 45 सारस मौजूद थे, जबकि 2022 में इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है।
इस समय बच्चे छोटे होने के कारण स्पष्ट आंकड़े भी जुटाने में परेशानी हो रही है। दिसंबर माह में सटीक जानकारी सामने आ जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि वेटलैंड में सारस को अनुकूल वातावरण मिल रहा है। सारस के बीच कई बच्चे भी नजर आ रहें हैं। इससे जाहिर है कि इनकी संख्या भी बढ़ रही है।
18 वर्ष होती है सारस की आयु
सारस का औसत भार 73 किलोग्राम तक होता है। लंबाई 176 सेंमी (5.66 फीट) तक हो सकती है। पंखो फैलाव 250 सेमी (985 फीट) तक होता है। इस पक्षी को धरती के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षी की संज्ञा दी गई है।
जोड़े में मादा को छोटे शरीर के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है। विश्व में सारस की कुल आठ प्रजातियां पाई जाती है। इनमें से चार भारत में है। हस्तिनापुर के वेटलैंड में इन दिनों सोहगीबरवा प्रजाति के सारस नजर आ रहे हैं। सारस का संपूर्ण जीवनकाल 18 साल तक हो सकता है। रात के समय सारस परिवार के साथ दलदल के टीले या पेड़ के नीचे रहते हैं।
दो माह में उड़ने लगते हैं सारस के बच्चे
सारस अधिकतर मुख्यभौगोलिक क्षेत्र में निवास करते हैं। सारस खेतों में पड़े कीड़े-मकौड़े घास-फूस के बीज और अनाज के दाने खाते हैं। मादा एक बार में दो से तीन अंडे देती है। लगभग एक महीने बाद शिशु चूजों के रूप में अंडों से बाहर आते हैं। ये चूजे तेजी से बड़े होते हैं और लगभग दो माह में पहली उड़ान भरने के योग्य हो जाते हैं।