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विकास दुबे के खास गुर्गे 50-50 हजार इनामी जिलेदार समेत दो ने कोर्ट में किया सरेंडर, दो और साथी पुलिस ने दबोचे
Wed, 19 Aug 2020 11:10 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 19 Aug 2020 11:10 PM IST
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
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बिकरू कांड के दो और आरोपियों ने बुधवार पुलिस को चकमा देकर माती कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसमें विकास दुबे का खास गुर्गा व भीटी गांव का प्रधान जिलेदार भी शामिल है। दोनों पर 50-50 हजार का इनाम था। वारदात के दिन विकास संग इन दोनों ने भी पुलिस टीम पर गोलियां चलाई थीं। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में शामिल विष्णुपाल सिंह यादव उर्फ जिलेदार दहशतगर्द विकास का खास गुर्गा है। उसे विकास का राइट हैंड कहते हैं। विकास की नामौजूदगी में वह ही सारा काम देखता था। वहीं दूसरा आरोपी शिवम दुबे एसटीएफ द्वारा चित्रकूट में पकड़े गए बाल गोविंद का बेटा है।
विकास दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
दो जुलाई की रात जिलेदार और शिवम दुबे ने भी पुलिस टीम पर हमला किया था। पुलिस ने इनको भी नामजद आरोपी बनाया है। इसके बाद से दोनों फरार चल रहे थे। उन पर 50 हजार का इनाम है। बुधवार को आरोपी अपने-अपने वकीलों के साथ स्पेशल जज दस्यु प्रभावित कोर्ट में पेश हो गए। एसपी ग्रामीण बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
विकास की सरपरस्ती में ही प्रधान बना था जिलेदार
दहशतगर्द विकास दुबे का आतंक बिकरू के साथ ही आसपास के गांवों में भी था। चौबेपुर व मैथा ब्लाक की तीस ग्राम पंचायतों में पंचायत चुनाव के दौरान विकास का फरमान चलता था। वह जिस पर हाथ रखता, वही प्रधान बनता था। विष्णुपाल सिंह उर्फ जिलेदार विकास की सरपरस्ती में ही भीटी गांव का प्रधान प्रधान बना था। कहा जाता है कि जिलेदार तो केवल नाम का प्रधान है। उसका पूरा काम विकास के आदेश पर ही होता था।
दहशतगर्द विकास दुबे का आतंक बिकरू के साथ ही आसपास के गांवों में भी था। चौबेपुर व मैथा ब्लाक की तीस ग्राम पंचायतों में पंचायत चुनाव के दौरान विकास का फरमान चलता था। वह जिस पर हाथ रखता, वही प्रधान बनता था। विष्णुपाल सिंह उर्फ जिलेदार विकास की सरपरस्ती में ही भीटी गांव का प्रधान प्रधान बना था। कहा जाता है कि जिलेदार तो केवल नाम का प्रधान है। उसका पूरा काम विकास के आदेश पर ही होता था।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
पूर्व थानाप्रभारी की जमानत अर्जी निरस्त
बिकरू कांड के आरोपी चौबेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष विनय तिवारी के अधिवक्ता ने स्पेशल जज डकैती की कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी। बुधवार को मामले की सुनवाई तय थी, लेकिन विनय तिवारी के अधिवक्ता कोर्ट में आए ही नहीं। इस पर कोर्ट ने उसके जमानती प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। दरोगा केके शर्मा के जमानती प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने उसकी जमानत निरस्त कर दी थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि विनय तिवारी के अधिवक्ता के न आने की वजह से प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया है।
बिकरू कांड के दो आरोपी गिरफ्तार
चौबेपुर पुलिस ने बिकरू कांड में शामिल दो अन्य आरोपितों को बुधवार रात बेला क्रासिंग से दबोच लिया। आरोपितों की पहचान रमेश चंद्र दुबे व मनीष उर्फ वीरू के रूप में हुई है। आरोपित एक लाख के इनामिया धीरेंद्र दुबे के पिता और भाई हैं। दो जुलाई की रात दोनों ने विकास संग पुलिस वालों पर गोलियां चलाई थीं।
बिकरू गांव निवासी रमेश चंद्र दुबे विकास दुबे के खास गुर्गे एक लाख इनामी धीरेंद्र का पिता है। धीरेंद्र ने मंगलवार को माती कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान धीरेंद्र के पिता रमेश चंद्र और उसके भाई मनीष उर्फ वीरू का नाम बढ़ाया गया था। पिता-पुत्र भी कोर्ट में सरेंडर की फिराक में थे। पूछताछ की जा रही है।
बिकरू कांड के आरोपी चौबेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष विनय तिवारी के अधिवक्ता ने स्पेशल जज डकैती की कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी। बुधवार को मामले की सुनवाई तय थी, लेकिन विनय तिवारी के अधिवक्ता कोर्ट में आए ही नहीं। इस पर कोर्ट ने उसके जमानती प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। दरोगा केके शर्मा के जमानती प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने उसकी जमानत निरस्त कर दी थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि विनय तिवारी के अधिवक्ता के न आने की वजह से प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया है।
बिकरू कांड के दो आरोपी गिरफ्तार
चौबेपुर पुलिस ने बिकरू कांड में शामिल दो अन्य आरोपितों को बुधवार रात बेला क्रासिंग से दबोच लिया। आरोपितों की पहचान रमेश चंद्र दुबे व मनीष उर्फ वीरू के रूप में हुई है। आरोपित एक लाख के इनामिया धीरेंद्र दुबे के पिता और भाई हैं। दो जुलाई की रात दोनों ने विकास संग पुलिस वालों पर गोलियां चलाई थीं।
बिकरू गांव निवासी रमेश चंद्र दुबे विकास दुबे के खास गुर्गे एक लाख इनामी धीरेंद्र का पिता है। धीरेंद्र ने मंगलवार को माती कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान धीरेंद्र के पिता रमेश चंद्र और उसके भाई मनीष उर्फ वीरू का नाम बढ़ाया गया था। पिता-पुत्र भी कोर्ट में सरेंडर की फिराक में थे। पूछताछ की जा रही है।