कटनी जमीन सौदेबाजी केस: 14 दिन से फरार निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया, SIT के हाथ अब भी खाली; कोर्ट से राहत नहीं
कटनी जमीन सौदेबाजी और भ्रष्टाचार मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपी 14 दिनों से फरार हैं। अग्रिम जमानत खारिज, इनाम घोषित और लुकआउट नोटिस जारी होने के बावजूद एसआईटी अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश के कटनी जिले के बहुचर्चित जमीन सौदेबाजी और भ्रष्टाचार मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 19 अगस्त को एफआईआर दर्ज होने के बाद से निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, मुख्य फाइनेंसर क्षितिज राज बारापत्रे और कागजी खरीदार मारूफ अहमद हनफी पिछले 14 दिनों से फरार हैं। इस बीच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी जा चुकी हैं, तीनों पर इनाम घोषित हो चुका है और अदालत से अग्रिम जमानत भी खारिज हो चुकी है। एसआईटी टीम सीएसपी कार्यालय से कागजी और डिजिटल साक्ष्य जब्त कर चुकी है। इसके बावजूद अब तक पुलिस और एसआईटी किसी भी आरोपी तक नहीं पहुंच सकी है।
क्या है मामला?
दरअसल, कटनी जिले के कुठला थाना में 19 अगस्त को दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं। शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने आरोप लगाया कि करीब 1.07 करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक जमीन की रजिस्ट्री तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों ने दबाव बनाकर कराई। आरोप है कि जमीन के बदले केवल 15 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि बाद में रजिस्ट्री निरस्त कर जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम दर्ज करा दी गई।
शिकायत में यह भी कहा गया कि जहां जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.46 लाख रुपये था, वहीं दस्तावेजों में इसकी कीमत महज 18.20 लाख रुपये दर्शाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान पहले कटनी एएसपी कमल मौर्य ने संभाली। बाद में जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई और इसके बाद कटनी जिले में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसकी जिम्मेदारी एएसपी अंजना तिवारी को सौंपी गई।
पढे़ं: कटनी की निलंबित डीएसपी नेहा पच्चीसिया पर शिकंजा, विदेश भागने की आशंका में लुकआउट नोटिस की तैयारी
जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7(सी), 12 और 13 भी जोड़ी गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया। जांच के बीच एसआईटी ने सील किए गए सीएसपी कार्यालय की सील खोलकर तलाशी ली और वहां से महत्वपूर्ण कागजी दस्तावेजों के साथ डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। इन साक्ष्यों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है, ताकि पूरे मामले और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
आरोपियों पर इनाम घोषित
उधर, फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। साथ ही इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किए गए, ताकि देश छोड़कर भागने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके। हालांकि, इन सभी कार्रवाइयों के बावजूद तीनों आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
इस बीच प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लीला लोधी की अदालत ने नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापत्रे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, केस डायरी और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया।
न्यायालय के इस आदेश के बाद पुलिस के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता और मजबूत हो गया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि एफआईआर दर्ज होने के 14 दिन बाद भी इनाम घोषित होने, लुकआउट नोटिस जारी होने, एसआईटी के गठन और लगातार दबिश के बावजूद आखिर तीनों आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर कैसे हैं? यही सवाल अब पूरे मामले की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी खड़े हो रहे हैं।
