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विकास के पांच पाप: इन खुलासों ने सभी को झकझोर दिया, कई गद्दार पुलिसकर्मियों के चेहरे से भी उतरा नकाब
Thu, 09 Jul 2020 04:24 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 09 Jul 2020 04:24 PM IST
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर एनकाउंटर मामले के बाद यूं तो कुख्यात विकास दुबे से जुड़ी अनगिनत बातें सामने आईं हैं। वहीं इस बीच पुलिस जांच में कुछ ऐसे खुलासे भी हुए जो हैरान कर देने वाले थे। कानपुर एनकाउंटर और विकास दुबे से जुड़े पांच बड़े खुलासे भी जानिए...
कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
विकास की रोटी-बोटी पर पल रहे थे ये पुलिसकर्मी
चौबेपुर के बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर में तत्कालीन चौबेपुर एसओ विनय तिवारी और हलका इंचार्ज दरोगा केके शर्मा की गद्दारी पर मुहर लग गई है। आठ पुलिसकर्मियों की मौत के जिम्मेदार यही हैं। आंखों से खूनी खेल देखने के बाद मौके से फरार हो गए थे।
पुलिसकर्मियों की शहादत पर ये पुलिसकर्मी खुश हुए थे। एनकाउंटर में डीएसपी देवेंद्र मिश्र, शिवराजपुर एसओ महेश यादव समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। शुरुआती जांच में ही पता चला था कि थाने से दहशतगर्द विकास को सूचना दी गई थी कि दबिश पड़ने वाली है।
इसलिए उसने पूरी तैयारी के साथ पुलिस पर हमला किया। एसएसपी ने इस प्रकरण की जांच एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव को दी थी। जांच में पता चला कि एसओ और दरोगा ने गद्दारी की। दबिश की सूचना विकास को दी। फिर भाग निकले। हमला होने के कुछ मिनटों पहले तक एसओ वहां मौजूद रहा था। फिर वहां से भाग निकला।
चौबेपुर के बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर में तत्कालीन चौबेपुर एसओ विनय तिवारी और हलका इंचार्ज दरोगा केके शर्मा की गद्दारी पर मुहर लग गई है। आठ पुलिसकर्मियों की मौत के जिम्मेदार यही हैं। आंखों से खूनी खेल देखने के बाद मौके से फरार हो गए थे।
पुलिसकर्मियों की शहादत पर ये पुलिसकर्मी खुश हुए थे। एनकाउंटर में डीएसपी देवेंद्र मिश्र, शिवराजपुर एसओ महेश यादव समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। शुरुआती जांच में ही पता चला था कि थाने से दहशतगर्द विकास को सूचना दी गई थी कि दबिश पड़ने वाली है।
इसलिए उसने पूरी तैयारी के साथ पुलिस पर हमला किया। एसएसपी ने इस प्रकरण की जांच एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव को दी थी। जांच में पता चला कि एसओ और दरोगा ने गद्दारी की। दबिश की सूचना विकास को दी। फिर भाग निकले। हमला होने के कुछ मिनटों पहले तक एसओ वहां मौजूद रहा था। फिर वहां से भाग निकला।
कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मी शहीद
- फोटो : अमर उजासा
सीओ ने पहले ही कहा था भ्रष्ट है थानेदार
कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र के निलंबित एसओ विनय तिवारी पर जिले के पूर्व एसएसपी साहब की खूब मेहरबानी बरसती थी। नजरअंदाजी का आलम यह था कि बिल्हौर के सीओ ने विनय तिवारी की करतूतें उजागर करते हुए उस पर कार्रवाई की सिफारिश भी थी, लेकिन उनकी रिपोर्ट को अनसुना किया गया।
सीओ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि थानेदार भ्रष्ट है। विवेचनाओं में गड़बड़ियां करता है और पैसे वसूलता है। इस पर विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन आला अधिकारियों ने मामले को आया-गया कर दिया। ऐसे कारणों के चलते ही विकास दुबे के हौसले बढ़ते गए और उसने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया।
कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र के निलंबित एसओ विनय तिवारी पर जिले के पूर्व एसएसपी साहब की खूब मेहरबानी बरसती थी। नजरअंदाजी का आलम यह था कि बिल्हौर के सीओ ने विनय तिवारी की करतूतें उजागर करते हुए उस पर कार्रवाई की सिफारिश भी थी, लेकिन उनकी रिपोर्ट को अनसुना किया गया।
सीओ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि थानेदार भ्रष्ट है। विवेचनाओं में गड़बड़ियां करता है और पैसे वसूलता है। इस पर विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन आला अधिकारियों ने मामले को आया-गया कर दिया। ऐसे कारणों के चलते ही विकास दुबे के हौसले बढ़ते गए और उसने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया।
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कानपुर एनकाउंटर में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
विकास के गुर्गे ने खोली चौबेपुर पुलिस की करतूत
कानपुर मुठभेड़ में पकड़े गए विकास दुबे के खास गुर्गे दया शंकर अग्निहोत्री ने चौबेपुर पुलिस की करतूत खोलकर रख दी। उसने बताया कि गुरुवार रात को दबिश से पहले थाने से ही फोन आया। इसके बाद विकास अलर्ट हो गया और उसने हमले की तैयार कर डाली। असलहा एकत्र किए, 40-50 बदमाशों को बुलवाया और छत पर तैनात कर दिया।
सड़क पर जेसीबी भी खड़ी कर दी। इसके चलते ही पुलिस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। दया शंकर ने बताया कि दबिश करीब रात एक बजे पड़ी। इसके कई घंटे पहले ही विकास को सूचना मिल गई थी।
कानपुर मुठभेड़ में पकड़े गए विकास दुबे के खास गुर्गे दया शंकर अग्निहोत्री ने चौबेपुर पुलिस की करतूत खोलकर रख दी। उसने बताया कि गुरुवार रात को दबिश से पहले थाने से ही फोन आया। इसके बाद विकास अलर्ट हो गया और उसने हमले की तैयार कर डाली। असलहा एकत्र किए, 40-50 बदमाशों को बुलवाया और छत पर तैनात कर दिया।
सड़क पर जेसीबी भी खड़ी कर दी। इसके चलते ही पुलिस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। दया शंकर ने बताया कि दबिश करीब रात एक बजे पड़ी। इसके कई घंटे पहले ही विकास को सूचना मिल गई थी।
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कानपुर एनकाउंटर में पूरा चौबेपुर थाना शक के घेरे में
- फोटो : amar ujala
इन क्षेत्रों से विकास को पहुंचता है 50 लाख गुंडा टैक्स
शिवराजपुर, चौबेपुर, शिवली व बिठूर थाना क्षेत्र में विकास दुबे की दहशत का ये आलम है कि बगैर उसकी इजाजत के कोई उद्योगपति अपना काम नहीं शुरू करता। उद्योगपतियों से लेकर खनन माफिया तक विकास को चढ़ावा चढ़ाते जब उन्हें संरक्षण मिलता। आसपास क्षेत्र में चलने वाले बड़े उद्योगों से वसूला जाने वाला लाखों का गुंडा टैक्स ही विकास दुबे की आय का मुख्य साधन था।
बिठूर, शिवराजपुर और चौबेपुर थाना क्षेत्र में डिटर्जेंट, इलेक्ट्रानिक पार्ट्स, धागा, मिल्क प्रोडक्ट्स, मसाले, प्लास्टिक दाना, राइस मिल, बर्फ आदि की करीब 100 से अधिक बड़ी फैक्ट्रियां हैं। इसके अलावा आधा दर्जन बड़े मुर्गी फार्म और दर्जन भर से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं। वहीं, चौबेपुर में गंगा कटरी की दुर्गापुर पट्टी बिल्हौर, बिठूर, उन्नाव और बांगरमऊ विधानसभाओं के बॉर्डर में आते हैं।
इस कारण यह क्षेत्र खनन माफियाओं के लिए काफी मुफीद माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि इन सभी कामों और उद्योगों को चलाने के लिए मालिकों को पंडितजी को समझना पड़ता है। ऐसा न करने वालों को क्षेत्र में काम नहीं करने दिया जाता था। उनकी जमीनों पर कब्जा हो जाता था। बिठूर में करीब तीन साल पहले जमीन कब्जे को लेकर गोलीकांड हुआ था।
शिवराजपुर, चौबेपुर, शिवली व बिठूर थाना क्षेत्र में विकास दुबे की दहशत का ये आलम है कि बगैर उसकी इजाजत के कोई उद्योगपति अपना काम नहीं शुरू करता। उद्योगपतियों से लेकर खनन माफिया तक विकास को चढ़ावा चढ़ाते जब उन्हें संरक्षण मिलता। आसपास क्षेत्र में चलने वाले बड़े उद्योगों से वसूला जाने वाला लाखों का गुंडा टैक्स ही विकास दुबे की आय का मुख्य साधन था।
बिठूर, शिवराजपुर और चौबेपुर थाना क्षेत्र में डिटर्जेंट, इलेक्ट्रानिक पार्ट्स, धागा, मिल्क प्रोडक्ट्स, मसाले, प्लास्टिक दाना, राइस मिल, बर्फ आदि की करीब 100 से अधिक बड़ी फैक्ट्रियां हैं। इसके अलावा आधा दर्जन बड़े मुर्गी फार्म और दर्जन भर से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं। वहीं, चौबेपुर में गंगा कटरी की दुर्गापुर पट्टी बिल्हौर, बिठूर, उन्नाव और बांगरमऊ विधानसभाओं के बॉर्डर में आते हैं।
इस कारण यह क्षेत्र खनन माफियाओं के लिए काफी मुफीद माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि इन सभी कामों और उद्योगों को चलाने के लिए मालिकों को पंडितजी को समझना पड़ता है। ऐसा न करने वालों को क्षेत्र में काम नहीं करने दिया जाता था। उनकी जमीनों पर कब्जा हो जाता था। बिठूर में करीब तीन साल पहले जमीन कब्जे को लेकर गोलीकांड हुआ था।